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तेलंगाना के 365 मंडल सूखाग्रस्त घोषित, 20,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की मांग

हैदराबाद (कृषि भूमि ब्यूरो): तेलंगाना सूखा 2026: तेलंगाना में कम और असमान बारिश, लंबे समय तक शुष्क मौसम तथा मिट्टी में नमी की कमी ने खरीफ फसलों पर दबाव बढ़ा दिया है। हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने 2026 के खरीफ सीजन के लिए 33 में से 31 जिलों के 365 मंडलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इनमें 111 मंडल गंभीर और 254 मंडल मध्यम सूखा प्रभावित श्रेणी में रखे गए हैं। सरकार ने जिला प्रशासन को तत्काल राहत उपाय शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, सूखे का आकलन राष्ट्रीय सूखा प्रबंधन नियमावली, 2016 के मानकों के आधार पर किया गया है। इसमें बारिश की स्थिति, फसलों की बुवाई, मिट्टी में नमी, भूजल स्तर और कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखा गया। 23 अक्टूबर को कैबिनेट उपसमिति ने सूखे की स्थिति की समीक्षा की थी। इसके बाद सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों की अधिसूचना जारी की। यह अधिसूचना छह महीने तक प्रभावी रहेगी, जब तक इसे पहले वापस नहीं लिया जाता।

सामान्य से 17 फीसदी कम बारिश, धान की खेती प्रभावित

तेलंगाना में 1 जून से 30 सितंबर 2026 के बीच 615.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 740.6 मिलीमीटर होती है। इस तरह राज्य में मानसून के दौरान 17 प्रतिशत की कमी रही। सरकार ने इसके लिए मजबूत होते अल नीनो प्रभाव, बंगाल की खाड़ी में कमजोर निम्न दबाव प्रणालियों और फसलों की महत्वपूर्ण विकास अवस्थाओं में लंबे शुष्क दौर को जिम्मेदार बताया है।

बारिश की कमी का असर खेती के रकबे पर भी दिखाई दिया है। राज्य में खरीफ फसलों का कुल क्षेत्रफल 139.28 लाख एकड़ से घटकर 126.06 लाख एकड़ रह गया। धान की बुवाई का रकबा 69.19 लाख एकड़ से घटकर 57 लाख एकड़ पर पहुंच गया, जो लगभग 18 प्रतिशत की गिरावट है।

जलाशयों में पानी की उपलब्धता भी चिंता का विषय है। प्रमुख और मध्यम जलाशयों में उपलब्ध जल भंडारण 179.63 टीएमसी रहा, जबकि इनकी कुल क्षमता 585 टीएमसी है। इससे सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, पशुधन और बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

नलगोंडा और संगारेड्डी सबसे अधिक प्रभावित

जिलों में सूखे का असर समान नहीं है। नलगोंडा और संगारेड्डी में 28-28 मंडल सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं। सूर्यापेट में 23, जबकि आदिलाबाद और विकाराबाद में 20-20 मंडल प्रभावित हैं। निजामाबाद और रंगारेड्डी में 18-18 तथा यादाद्री और खम्मम में 17-17 मंडल सूखा प्रभावित श्रेणी में शामिल हैं।

अधिसूचना में शामिल क्षेत्रों में नगर निकायों को मंडल स्तर की सूखा सूची में अलग रखा जाएगा, लेकिन पेयजल आपूर्ति के मामले में उन्हें भी सूखा प्रभावित माना जाएगा। अधिसूचित सूची से बाहर के मंडलों की स्थिति पर निगरानी जारी रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पूरक अधिसूचना के जरिए शामिल किया जा सकता है।

किसानों को इनपुट सब्सिडी, ऋण पुनर्गठन पर जोर

राज्य सरकार ने जिला कलेक्टरों को प्रभावित किसानों तक राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा है। इनमें फसल नुकसान के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए इनपुट सब्सिडी, पेयजल आपूर्ति बढ़ाना, पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था और जरूरत पड़ने पर पशु शिविर स्थापित करना शामिल है। ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा, जिला कलेक्टरों को राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के साथ समन्वय कर कृषि ऋणों के पुनर्गठन की संभावनाओं पर काम करने और भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के तहत कर्ज वसूली के लिए दबाव नहीं डालने को कहा गया है। कृषि एवं सहकारिता विभाग को केंद्र से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) की सहायता मिलने के एक महीने के भीतर पात्र किसानों को इनपुट सब्सिडी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक करने की व्यवस्था भी की गई है।

केंद्र से 20,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की मांग

तेलंगाना विधानसभा ने 18 सितंबर को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से सूखे की स्थिति में हस्तक्षेप करने की मांग की थी। राज्य ने 20,000 करोड़ रुपये के विशेष सूखा राहत पैकेज, एनडीआरएफ से सहायता और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष में केंद्र के हिस्से की राशि जारी करने का अनुरोध किया है।

राज्य की मांगों में फसल नुकसान का मुआवजा, इनपुट सब्सिडी, पेयजल और पशु चारे की उपलब्धता तथा जल निकायों के पुनरुद्धार के लिए सहायता शामिल है। तेलंगाना ने ग्रामीण रोजगार योजना के तहत 50 दिन का अतिरिक्त रोजगार देने और उसका पूरा खर्च केंद्र से वहन कराने की मांग भी की है। इसके अतिरिक्त, राज्य ने उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाने, 1,500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली देने और वित्त वर्ष 2026-27 में उधारी सीमा को सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.5 प्रतिशत करने का अनुरोध किया है।

फिलहाल राहत पैकेज और केंद्रीय सहायता की अंतिम राशि पर निर्णय होना बाकी है। राज्य के सामने अब प्रभावित किसानों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने, ग्रामीण आजीविका की रक्षा करने और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने की चुनौती है। आने वाले महीनों में रबी फसलों की बुवाई और सिंचाई की जरूरतों को देखते हुए राहत उपायों की समयबद्धता भी अहम होगी।

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