राज्य मंत्रिमंडल की सूखा राहत उपसमिति की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में बावनकुले ने कहा कि सूखे की स्थिति को देखते हुए सरकार किसानों और ग्रामीण समुदायों को राहत देने के लिए कई कदम उठा रही है। इनमें कर्ज वसूली के नाम पर किसानों को होने वाली परेशानी रोकने के साथ पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता, जल संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना शामिल है।
कर्ज वसूली के नाम पर उत्पीड़न पर कार्रवाई
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब राज्य के कई हिस्सों में सूखे के कारण खेती और ग्रामीण आजीविका पर दबाव है। फसल प्रभावित होने से किसानों की आमदनी घटने और समय पर कर्ज चुकाने में कठिनाई होने की आशंका बढ़ जाती है।
बावनकुले के मुताबिक, नांदेड़ की घटना के बाद मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि किसानों को मानसिक रूप से परेशान करने वाले फाइनेंस कंपनियों के अधिकारियों और वसूली एजेंटों के खिलाफ पुलिस मामले दर्ज किए जाएं।
इससे पहले भी राज्य सरकार सूखे की स्थिति में किसानों से कर्ज वसूली के तरीके को लेकर चिंता जता चुकी है। ऐसे में नई कार्रवाई का उद्देश्य वसूली के दौरान किसानों को कथित उत्पीड़न से राहत देना है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कार्रवाई संबंधित शिकायतों और मामले के तथ्यों के आधार पर होगी।
304 सूखाग्रस्त तालुकाओं में चारे की व्यवस्था
सूखा राहत उपसमिति ने राज्य के 304 सूखाग्रस्त तालुकाओं में पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला कलेक्टरों को अधिक अधिकार देने का फैसला किया है।
संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत सूखा चारा 12 रुपये प्रति किलोग्राम और हरा चारा 8 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जाएगा। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति चारे की खरीद, स्थानीय स्तर पर उत्पादन और दूसरे जिलों से आपूर्ति की व्यवस्था की निगरानी करेगी।
सरकार जिला योजना समिति (DPC) के कोष का इस्तेमाल वन, राजस्व और जल संसाधन विभागों की उपलब्ध जमीन पर चारा उगाने के लिए भी करेगी। इसके अलावा, सिंधुदुर्ग और रत्नागिरि जिलों में उपलब्ध अतिरिक्त चारे को सूखाग्रस्त क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य पशुओं के लिए चारे की कमी को कम करना और सूखे के दौरान पशुपालन पर निर्भर ग्रामीण परिवारों को राहत देना है।
जलाशयों की गाद खेतों तक पहुंचाने के लिए सब्सिडी
सरकार ने झीलों और बांधों से गाद निकालने तथा उसे कृषि भूमि तक पहुंचाने के लिए वित्तीय सहायता देने का भी निर्णय लिया है। इसके तहत गाद निकालने पर 31 रुपये प्रति घन मीटर और उसके परिवहन पर 35 रुपये प्रति घन मीटर की सब्सिडी दी जाएगी।
जलाशयों से निकली गाद को खेतों तक पहुंचाने से मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलने की संभावना है। साथ ही, जलाशयों में गाद की मात्रा कम होने से उनकी जल भंडारण क्षमता बढ़ाने में भी सहायता मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ गाद की गुणवत्ता, खेतों की जरूरत और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
इसके अतिरिक्त, सड़क निर्माण के लिए झीलों से निकाली जाने वाली मिट्टी, मुरुम और बजरी पर रॉयल्टी माफ करने का फैसला किया गया है।
कुछ नए क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग
बावनकुले ने बताया कि पुणे जिले के हवेली, मावल और मुलशी तालुकाओं, कोल्हापुर जिले के हातकणंगले तथा कोंकण के कुछ क्षेत्रों को भी सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग मिली है।
इन क्षेत्रों को सूखाग्रस्त सूची में शामिल करने पर अंतिम फैसला जिला कलेक्टरों की रिपोर्ट मिलने के बाद अगली मंगलवार की बैठक में लिया जाएगा। इससे पहले संबंधित क्षेत्रों में सूखे की स्थिति का आकलन किया जाएगा।
राज्य सरकार के सामने फिलहाल किसानों को आर्थिक राहत देने, पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराने और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट से निपटने की चुनौती है। कर्ज वसूली के दौरान उत्पीड़न के मामलों में पुलिस कार्रवाई का निर्देश इसी व्यापक राहत प्रयास का हिस्सा है। इन उपायों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रशासन इन्हें प्रभावित क्षेत्रों में कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू करता है।
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