मुंबई (कृषि भूमि ब्यूरो): केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि सरकार की फिलहाल पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की सीमा 20 फीसदी से आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। गोवा में आयोजित 29वें एनर्जी टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन मीट के उद्घाटन के अवसर पर उन्होंने E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को भ्रामक बताया। उनके मुताबिक, इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से देश को आर्थिक लाभ हुआ है और किसानों को भी इसका फायदा मिला है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब E20 ईंधन की वाहन अनुकूलता और इथेनॉल उत्पादन के लिए कृषि उपज की उपलब्धता पर चर्चा हो रही है।
E20 पेट्रोल पर क्या बोले हरदीप सिंह पुरी?27 अक्टूबर को गोवा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पुरी ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए 20 फीसदी का लक्ष्य निर्धारित किया गया था और फिलहाल इससे आगे बढ़ने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने E20 ईंधन को लेकर फैल रही आशंकाओं और वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचने संबंधी दावों पर सवाल उठाए।
E20 पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल होता है। केंद्र सरकार ने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, घरेलू ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने और कृषि उत्पादों के वैकल्पिक उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की नीति को आगे बढ़ाया है।
हालांकि, मंत्री के बयान और सोशल मीडिया पर सामने आ रहे दावों के बीच वाहन चालकों के लिए यह समझना जरूरी है कि सभी वाहन हर प्रकार के इथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए डिजाइन नहीं किए जाते। वाहन की निर्माता कंपनी द्वारा निर्धारित ईंधन संबंधी निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण है।
सरकार ने बताई 1.6 लाख करोड़ रुपये की बचत
हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है। उन्होंने दावा किया कि इसमें से करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये किसानों तक पहुंचे हैं। मंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम ने किसानों की भूमिका को खाद्य उत्पादन से आगे बढ़ाकर ऊर्जा आपूर्ति से भी जोड़ने में मदद की है।
इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना, मक्का और चावल जैसे कृषि उत्पादों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे किसानों के लिए उपज की अतिरिक्त मांग पैदा हो सकती है और चीनी मिलों सहित कृषि आधारित उद्योगों को भी अवसर मिल सकते हैं।
हालांकि, इस व्यवस्था का लाभ कृषि उपज की उपलब्धता, उसकी कीमत, खाद्य जरूरतों और पशु आहार की मांग के बीच संतुलन पर निर्भर करता है। इसलिए इथेनॉल उत्पादन में वृद्धि के साथ खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय से जुड़े पहलुओं पर भी नजर रखना जरूरी है।
E100 तक चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को मान्यता
इथेनॉल ब्लेंडिंग पर सरकार के रुख के बीच सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन की जानकारी दी। इसके तहत E85 और E100 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चलने में सक्षम फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए नियामकीय प्रावधान किए गए हैं। E85 में अधिकतम 85 फीसदी इथेनॉल होता है, जबकि E100 लगभग शुद्ध इथेनॉल आधारित ईंधन है।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि वे अलग-अलग अनुपात में इथेनॉल और पेट्रोल के मिश्रण पर चल सकें। इसके विपरीत, सामान्य पेट्रोल वाहन केवल उन्हीं ईंधनों के लिए उपयुक्त होते हैं, जिनके इस्तेमाल की निर्माता कंपनी ने अनुमति दी हो।
इस संशोधन का अर्थ यह नहीं है कि सामान्य पेट्रोल कारों में E100 का इस्तेमाल किया जा सकता है। वाहन की तकनीकी क्षमता और प्रमाणन के अनुरूप ही ईंधन का चयन किया जाना चाहिए।
मक्का और चावल पर बढ़ सकती है निर्भरता
इथेनॉल उत्पादन की नीति के सामने कृषि उपज की उपलब्धता भी एक अहम मुद्दा है। चीनी की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए गन्ने और चीनी से इथेनॉल उत्पादन पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद मक्का और चावल जैसे दूसरे स्रोतों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
मक्का से इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने में इसकी दूसरी जरूरतें भी चुनौती पैदा कर सकती हैं। मक्का का इस्तेमाल पोल्ट्री और पशु आहार में बड़े पैमाने पर होता है। यदि इथेनॉल उद्योग में इसकी मांग तेजी से बढ़ती है, तो खाद्य और पशु आहार क्षेत्र के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। वहीं, उत्पादन में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने पर उपलब्धता और कीमतों पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है।
ऐसे में E20 लक्ष्य को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए पर्याप्त कच्चे माल की उपलब्धता, किसानों को उचित मूल्य और विभिन्न क्षेत्रों की मांग के बीच संतुलन जरूरी होगा।
ऊर्जा सुरक्षा और कृषि के बीच संतुलन की चुनौती
भारत के लिए इथेनॉल ब्लेंडिंग का प्रमुख उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाना और घरेलू ऊर्जा संसाधनों का उपयोग बढ़ाना है। लेकिन इस नीति की सफलता केवल मिश्रण के निर्धारित प्रतिशत तक पहुंचने से नहीं मापी जा सकती। इसके साथ ईंधन की गुणवत्ता, वाहनों की अनुकूलता, कृषि उपज की उपलब्धता और किसानों को मिलने वाले वास्तविक लाभ का आकलन भी जरूरी है।
हरदीप सिंह पुरी के ताजा बयान से फिलहाल यह स्पष्ट है कि सरकार E20 से आगे ब्लेंडिंग बढ़ाने की योजना नहीं बना रही है। दूसरी ओर, E85 और E100 के अनुकूल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए नियमों में बदलाव उच्च इथेनॉल मिश्रण वाली तकनीक के लिए रास्ता खोलता है। आने वाले समय में इस नीति की दिशा इस बात पर भी निर्भर करेगी कि देश ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों को कृषि उत्पादन, खाद्य उपलब्धता और वाहन प्रौद्योगिकी के साथ किस तरह संतुलित करता है।
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