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किसानों के आंदोलन के बाद सरकार ने बढ़ाया प्याज खरीद मूल्य, दालों का बफर स्टॉक रिकॉर्ड 43 लाख टन पर पहुंचा

Onion Price Crash

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): प्याज खरीद मूल्य: महाराष्ट्र में किसानों के विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक के लिए प्याज खरीद मूल्य में 24.4 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। अब सरकार प्याज की खरीद 12.70 रुपये प्रति किलोग्राम के बजाय 15.80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से करेगी। सरकार का कहना है कि प्याज खरीद मूल्य में बढ़ोत्तरी का फैसला मौजूदा बाजार परिस्थितियों और किसानों को बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

सोमवार को आयोजित अंतर-मंत्रालयी प्रेस ब्रीफिंग में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अनुपम मिश्रा ने बताया कि संशोधित प्याज खरीद मूल्य की अधिसूचना 22 मई 2026 को जारी की गई थी, जबकि चालू सीजन के लिए प्याज खरीद अभियान 15 मई से शुरू हो चुका है।

किसानों को राहत देने के लिए बढ़ाया गया प्याज खरीद मूल्य

प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने और किसानों तथा उपभोक्ताओं दोनों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार हर साल मूल्य स्थिरीकरण कोष (Price Stabilisation Fund-PSF) के तहत बफर स्टॉक तैयार करती है।

इस वर्ष सरकार ने 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य तय किया है। हालांकि यह लक्ष्य पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में खरीदे गए 3 लाख टन की तुलना में कम है। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर कीमतों को स्थिर रखने के लिए यह स्टॉक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है और हाल के दिनों में किसानों ने कम बाजार भाव को लेकर विरोध प्रदर्शन किए थे। इसके बाद सरकार ने प्याज खरीद मूल्य में संशोधन का निर्णय लिया।

दालों का बफर स्टॉक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

सरकार ने दालों की खरीद और भंडारण के मोर्चे पर भी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मई 2026 में देश का दाल बफर स्टॉक बढ़कर रिकॉर्ड 43 लाख टन पर पहुंच गया है।

यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है।

वर्ष दाल बफर स्टॉक
मई 2024 21 लाख टन
मई 2025 18 लाख टन
मई 2026 43 लाख टन

सरकार के अनुसार, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे बाजार कीमतें आने पर लागू की जाने वाली मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत अब तक 5.34 लाख टन तूर (अरहर) और 20.35 लाख टन चना की खरीद की जा चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड बफर स्टॉक भविष्य में दालों की कीमतों को नियंत्रित रखने और खाद्य मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने में मदद करेगा।

आयात पर निर्भरता में आई कमी

घरेलू उत्पादन में वृद्धि का असर आयात पर भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का कुल दाल आयात लगभग 30 प्रतिशत घटकर 60 लाख टन रह गया, जबकि पिछले वर्ष यह 73 लाख टन था।

चना आयात में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 2024-25 में जहां देश ने 15.06 लाख टन चना आयात किया था, वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा 51 प्रतिशत तक घट गया।

सरकार का मानना है कि आत्मनिर्भरता की दिशा में यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू आपूर्ति पर कम पड़ेगा।

दाल उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि

सरकारी अनुमान के अनुसार, वर्ष 2025-26 में देश का कुल दाल उत्पादन रिकॉर्ड 274.09 लाख टन रहने की संभावना है। यह पिछले वर्ष के 257 लाख टन की तुलना में 6.7 प्रतिशत अधिक है, जबकि 2023-24 के 242 लाख टन की तुलना में लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

प्रमुख दालों के उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

प्याज खरीद मूल्य
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दाल 2024-25 उत्पादन 2025-26 अनुमानित उत्पादन
चना 111 लाख टन 125.14 लाख टन
मूंग 42.44 लाख टन 44.92 लाख टन
मसूर 16.54 लाख टन 17.62 लाख टन

उत्पादन में यह वृद्धि सरकार की खरीद नीतियों और किसानों द्वारा दालों की खेती बढ़ाने का परिणाम मानी जा रही है।

ईरान युद्ध के बावजूद दाल आपूर्ति पर सीमित असर

अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान अधिकारियों ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान युद्ध के संभावित प्रभावों पर भी चर्चा की। अतिरिक्त सचिव अनुपम मिश्रा ने कहा कि भारत को दालों की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देश—म्यांमार, तंजानिया, मलावी, मोजाम्बिक, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील—इस संघर्ष से सीधे प्रभावित नहीं हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि दालों की आपूर्ति श्रृंखला पर तत्काल किसी बड़े व्यवधान की आशंका नहीं है और आवश्यक खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता फिलहाल सुरक्षित बनी हुई है।

खाद्य सुरक्षा को मिलेगी मजबूती

प्याज खरीद मूल्य में वृद्धि और दालों के रिकॉर्ड बफर स्टॉक से यह संकेत मिलता है कि सरकार किसानों को बेहतर मूल्य देने के साथ-साथ खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता और मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है। बढ़ते घरेलू उत्पादन, मजबूत भंडारण और घटते आयात के चलते आने वाले महीनों में खाद्य सुरक्षा की स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।

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