नई दिल्ली, 13 अगस्त (कृषि भूमि ब्यूरो):
देश में कृषि क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर (AIF) के तहत अब तक बड़ी उपलब्धि दर्ज की गई है। 30 जून 2025 तक, इस कोष से 1,13,419 परियोजनाओं को कुल 66,310 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं के जरिए कृषि क्षेत्र में 1,07,502 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया गया है। इनमें 2,454 शीत गृह (कोल्ड स्टोरेज) परियोजनाओं को 8,258 करोड़ रुपये की मंजूरी भी शामिल है।
AIF का उद्देश्य फसल-पश्चात प्रबंधन अवसंरचना, फार्म-गेट भंडारण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और कृषि परिसंपत्तियों के निर्माण को बढ़ावा देना है, ताकि किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर दाम मिल सकें, बिचौलियों पर निर्भरता घटे और कटाई के बाद होने वाला नुकसान कम हो।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना का विस्तार कर इसे और आकर्षक, प्रभावी और समावेशी बनाने के कई कदम उठाए। योजना के तहत किसानों, कृषि उद्यमियों, सहकारी समितियों और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को भी ऋण गारंटी और ब्याज सब्सिडी का लाभ मिल रहा है।
इसके साथ ही सरकार अन्य योजनाओं के जरिए भी कृषि बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ कर रही है। इसमें कृषि विपणन अवसंरचना (AMI), एकीकृत शीत श्रृंखला, पूंजी निवेश सब्सिडी योजना, एकीकृत बागवानी मिशन (MIDH), पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और सूक्ष्म सिंचाई कोष शामिल हैं। इन पहलों से भंडारण क्षमता, प्रसंस्करण सुविधाएं, निर्यात क्षमता और डिजिटल कनेक्टिविटी में तेजी से वृद्धि हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन योजनाओं से ग्रामीण आजीविका में सुधार होगा, कृषि क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनेगा तथा देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। साथ ही, निजी क्षेत्र की भागीदारी और तकनीकी निवेश बढ़ने से भारत का कृषि पारिस्थितिकी तंत्र वैश्विक स्तर पर अधिक सक्षम हो सकता है।
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