नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): ग्रामीण उपभोक्ता: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सितंबर 2026 के ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास सर्वे ने ग्रामीण और कस्बाई भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। सर्वे के मुताबिक, परिवारों के बीच मौजूदा अर्थव्यवस्था, रोजगार और व्यक्तिगत आमदनी को लेकर निराशा बढ़ी है। दूसरी ओर, महंगाई की आशंकाएं तेज होने के बावजूद घरेलू खर्च में मजबूती बनी हुई है और लोग अगले एक साल की आर्थिक स्थिति को लेकर अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं।
8,799 लोगों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित यह सर्वे 10 से 20 सितंबर 2026 के बीच ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में किया गया। भारतीय रिजर्व बैंक ने इसके नतीजे 7 अक्टूबर को जारी किए। सर्वे के निष्कर्ष बताते हैं कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को लेकर परिवारों का नजरिया लगातार कमजोर हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह गिरावट लगातार छठे सर्वे दौर में दर्ज की गई है।
छह महीने से लगातार गिर रहा उपभोक्ता विश्वास
RBI का करंट सिचुएशन इंडेक्स (CSI) मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के प्रति परिवारों की धारणा को दर्शाता है। इसमें अर्थव्यवस्था, रोजगार, कीमतों, आमदनी और खर्च से जुड़े अनुभवों को शामिल किया जाता है।
सितंबर में यह सूचकांक जुलाई के 91.7 से गिरकर 90.6 पर पहुंच गया। जनवरी 2026 में इसका स्तर 100.5 था, जबकि सितंबर 2025 में यह 100.9 दर्ज किया गया था। यानी पिछले एक साल में मौजूदा आर्थिक स्थिति को लेकर उपभोक्ताओं का भरोसा उल्लेखनीय रूप से कमजोर हुआ है।
सूचकांक का 100 से नीचे होना बताता है कि मौजूदा परिस्थितियों को लेकर नकारात्मक आकलन सकारात्मक आकलन से अधिक है। यह संकेत घरेलू आर्थिक दबाव और उपभोक्ता मनोभाव में आई कमजोरी को रेखांकित करता है।
आमदनी और रोजगार को लेकर बढ़ी चिंता
सर्वे में घरेलू आय को लेकर सामने आए आंकड़े खास तौर पर चिंताजनक हैं। सितंबर में केवल 20.6 प्रतिशत लोगों ने बताया कि पिछले साल की तुलना में उनकी आमदनी बढ़ी है। इसके उलट, 30.5 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि उनकी आय घटी है। सितंबर 2025 में आय में गिरावट की बात कहने वालों का अनुपात 26.5 प्रतिशत था।
रोजगार को लेकर भी ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास की धारणा खराब हुई है। रोजगार संबंधी नेट रिस्पॉन्स जुलाई के -8.0 से गिरकर सितंबर में -10.5 हो गया। सामान्य आर्थिक स्थिति का नेट रिस्पॉन्स भी -11.9 से घटकर -14.1 पर पहुंच गया, जबकि आय के मामले में यह -8.7 से गिरकर -9.9 रहा।
ये आंकड़े बताते हैं कि परिवारों के लिए केवल महंगाई ही चुनौती नहीं है। आमदनी में सुधार की सीमित संभावनाएं और रोजगार की स्थिति को लेकर अनिश्चितता भी उनकी आर्थिक धारणा को प्रभावित कर रही हैं।
महंगाई की मार से राहत की उम्मीद कमजोर
ग्रामीण परिवारों के लिए बढ़ती कीमतें सबसे बड़ी परेशानियों में शामिल हैं। सर्वे में 93.2 प्रतिशत लोगों ने कहा कि पिछले एक साल में कीमतें बढ़ी हैं। जुलाई में ऐसा मानने वालों का अनुपात 91.6 प्रतिशत था।
वर्तमान महंगाई को लेकर परिवारों का अनुमान मई के 5.9 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई में 6.1 प्रतिशत और सितंबर में 6.8 प्रतिशत हो गया। अगले एक साल के लिए महंगाई का अनुमान भी जुलाई के 7.4 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 7.9 प्रतिशत पहुंच गया।
इसके अलावा, 85.9 प्रतिशत उत्तरदाताओं को उम्मीद है कि अगले साल कीमतें और बढ़ेंगी। यह धारणा घरेलू बजट पर दबाव बने रहने की आशंका को दर्शाती है। हालांकि, ये आंकड़े परिवारों की महंगाई संबंधी धारणाओं और अपेक्षाओं को दिखाते हैं, न कि आधिकारिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की वास्तविक महंगाई दर को।
खर्च में मजबूती, जरूरी वस्तुओं पर ज्यादा जोर
कमजोर ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास के बावजूद खर्च संबंधी आंकड़े अपेक्षाकृत बेहतर रहे। सितंबर में खर्च का नेट रिस्पॉन्स जुलाई के 77.4 से बढ़कर 79.6 हो गया। जरूरी वस्तुओं पर खर्च का आंकड़ा 84.2 रहा, जबकि गैर-जरूरी वस्तुओं के लिए यह 39.3 दर्ज किया गया।
इससे पता चलता है कि परिवारों का खर्च पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है। हालांकि, जरूरी और गैर-जरूरी वस्तुओं के आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर बताता है कि घरेलू खर्च की प्राथमिकताओं में आवश्यक जरूरतों का महत्व अधिक बना हुआ है।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि खर्च का मजबूत नेट रिस्पॉन्स अपने आप में वास्तविक खपत की मात्रा या परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ने का प्रमाण नहीं है। कीमतें बढ़ने पर भी घरेलू खर्च ऊंचा रह सकता है।
भविष्य को लेकर उम्मीदें बरकरार
मौजूदा परिस्थितियों के विपरीत, भविष्य को लेकर ग्रामीण उपभोक्ता पूरी तरह निराश नहीं हैं। फ्यूचर एक्सपेक्टेशंस इंडेक्स (FEI) सितंबर में 112.8 पर रहा। यह जुलाई के 113.6 से कम है, लेकिन 100 के स्तर से ऊपर होने के कारण भविष्य के प्रति सकारात्मक नजरिया दर्शाता है।
हालांकि, जनवरी 2026 के 129.3 के स्तर से इसकी गिरावट बताती है कि आने वाले समय को लेकर आशावाद भी पहले जितना मजबूत नहीं रहा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए क्या हैं संकेत?
RBI के सर्वे से स्पष्ट होता है कि ग्रामीण और अर्धशहरी परिवारों के सामने मौजूदा आर्थिक दबाव बढ़ रहे हैं। आय और रोजगार को लेकर कमजोर धारणा तथा महंगाई की ऊंची अपेक्षाएं घरेलू बजट और उपभोक्ता विश्वास के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
आने वाले महीनों में ग्रामीण मांग की मजबूती इस बात पर निर्भर कर सकती है कि आमदनी में कितना सुधार होता है, रोजगार के अवसर किस दिशा में बढ़ते हैं और कीमतों का दबाव कितना कम होता है। फिलहाल, भविष्य को लेकर बनी सकारात्मक उम्मीदें राहत का संकेत जरूर देती हैं, लेकिन मौजूदा आर्थिक स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
प्रमुख आंकड़े एक नजर में
| सर्वे का संकेतक | जुलाई 2026 | सितंबर 2026 |
|---|---|---|
| करंट सिचुएशन इंडेक्स (CSI) | 91.7 | 90.6 |
| फ्यूचर एक्सपेक्टेशंस इंडेक्स (FEI) | 113.6 | 112.8 |
| वर्तमान महंगाई का अनुमान | 6.1% | 6.8% |
| एक साल आगे महंगाई का अनुमान | 7.4% | 7.9% |
| खर्च का नेट रिस्पॉन्स | 77.4 | 79.6 |
| रोजगार का नेट रिस्पॉन्स | -8.0 | -10.5 |
स्रोत: RBI के सितंबर 2026 ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास सर्वे पर आधारित प्रकाशित रिपोर्टें।
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