[polylang_langswitcher]

अल नीनो होगा और ताकतवर, दिसंबर में बन सकता है रिकॉर्ड; भारत समेत कई क्षेत्रों में सूखा-बाढ़ का खतरा

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp
अल नीनो 2026

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अल नीनो को लेकर बड़ा जलवायु अलर्ट जारी किया है। संगठन के मुताबिक अक्टूबर-दिसंबर 2026 के दौरान अल नीनो की स्थिति और मजबूत होगी और दिसंबर के आसपास यह चरम पर पहुंच सकती है। मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने का अनुमान है। इसका असर दुनिया के तापमान और बारिश के पैटर्न पर पड़ सकता है तथा कई क्षेत्रों में सूखे और बाढ़ का जोखिम बढ़ सकता है।

WMO ने 8 अक्टूबर को जारी अपने नवीनतम Global Seasonal Climate Update में कहा कि मौजूदा अल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है। संगठन की महासचिव सेलेस्टे साउलो के अनुसार, फरवरी 2027 तक इसके बने रहने की संभावना करीब 100 प्रतिशत है और यह 1950 के बाद दर्ज सबसे शक्तिशाली अल नीनो घटनाओं में से एक हो सकता है।

Niño 3.4 में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

अल नीनो की ताकत मापने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रमुख संकेतक Niño 3.4 में हाल के महीनों में तेजी से वृद्धि हुई है। WMO के अनुसार जून 2026 में मध्य-पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से औसतन 1.6 डिग्री सेल्सियस अधिक था। अगस्त में यह अंतर बढ़कर 2.5 डिग्री सेल्सियस हो गया।

अब अक्टूबर-नवंबर-दिसंबर 2026 के लिए Niño 3.4 समुद्री सतह तापमान विसंगति का मौसमी औसत करीब +3.7 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इसके दिसंबर के आसपास चरम पर पहुंचने की संभावना है। WMO के मुताबिक यह रिकॉर्ड स्तर होगा और नवंबर 2015-जनवरी 2016 के दौरान दर्ज +2.6 डिग्री सेल्सियस के पिछले रिकॉर्ड से काफी ऊपर होगा।

इस पूर्वानुमान को 13 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पूर्वानुमान केंद्रों के मॉडल और आंकड़ों से तैयार किया गया है। इसमें समुद्री बॉय, उपग्रह और रेडियोसाउंड समेत विभिन्न स्रोतों से मिलने वाले वास्तविक समय के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। WMO के अनुसार अलग-अलग पूर्वानुमान प्रणालियों के बीच अंतर अपेक्षाकृत कम है, जिससे मौजूदा अनुमान में भरोसा बढ़ता है।

दुनिया के बड़े हिस्से में बढ़ेगी गर्मी

मजबूत अल नीनो का असर केवल प्रशांत महासागर तक सीमित नहीं रहेगा। WMO के अक्टूबर-दिसंबर मौसमी पूर्वानुमान में दुनिया के बड़े हिस्से में सामान्य से अधिक तापमान रहने की प्रबल संभावना जताई गई है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर जगह और हर दिन तापमान सामान्य से ज्यादा रहेगा। इसका अर्थ मौसमी स्तर पर गर्म परिस्थितियों की संभावना बढ़ना है। इससे हीटवेव और अत्यधिक गर्मी से जुड़े स्वास्थ्य, कृषि और ऊर्जा संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।

बारिश के पैटर्न में बड़ा बदलाव

अल नीनो के मजबूत होने के साथ बारिश का वितरण भी बदलने की संभावना है। WMO के अनुसार मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में सामान्य से अधिक बारिश का संकेत है। इसके अलावा अफ्रीका के ग्रेटर हॉर्न क्षेत्र, मध्य एशिया के कुछ हिस्सों, पूर्वी एशिया के तटीय इलाकों, अरब प्रायद्वीप के उत्तरी हिस्सों, 45 डिग्री उत्तरी अक्षांश के दक्षिण में उत्तरी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों और दक्षिण-पूर्वी दक्षिण अमेरिका में भी सामान्य से अधिक बारिश की संभावना है।

इसके विपरीत पश्चिमी प्रशांत और भूमध्यरेखीय अटलांटिक क्षेत्र में सामान्य से कम बारिश का व्यापक संकेत है। दक्षिण प्रशांत से दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों तक भी शुष्क परिस्थितियों की संभावना दिखाई दे रही है।

अल नीनो 2026भारत के लिए क्या है संकेत?

भारत के लिए WMO का पूर्वानुमान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। संगठन ने भारतीय उपमहाद्वीप में अक्टूबर-दिसंबर के दौरान सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई है। दक्षिणी मध्य अमेरिका, कैरेबियन के कुछ हिस्सों और उत्तर-पश्चिमी दक्षिण अमेरिका में भी सामान्य से कम बारिश का संकेत है।

हालांकि मौसमी पूर्वानुमान को किसी क्षेत्र के स्थानीय मौसम का निश्चित अनुमान नहीं माना जा सकता। WMO ने स्पष्ट किया है कि ये व्यापक जलवायु संकेत हैं और स्थानीय स्तर पर मौसम की स्थिति दूसरे कारकों से भी प्रभावित हो सकती है।

इंडियन ओशन डाइपोल भी निभाएगा भूमिका

अल नीनो के साथ पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) भी महत्वपूर्ण जलवायु कारक है। WMO के अनुसार पॉजिटिव IOD अक्टूबर 2026 में चरम पर पहुंच सकता है और उसके बाद कमजोर होने का अनुमान है। अक्टूबर-दिसंबर के लिए इसका मौसमी औसत तापमान विचलन करीब +0.5 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

भूमध्यरेखीय अटलांटिक महासागर में समुद्र की सतह का तापमान भी सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। इन अलग-अलग महासागरीय परिस्थितियों का संयुक्त प्रभाव आने वाले महीनों में वैश्विक तापमान और बारिश के क्षेत्रीय पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।

आपदा प्रबंधन के लिए बढ़ी चुनौती

मजबूत अल नीनो के संभावित प्रभावों को देखते हुए WMO और उसके सदस्य देश तैयारी बढ़ा रहे हैं। राष्ट्रीय मौसम विज्ञान एवं जल विज्ञान सेवाएं और क्षेत्रीय जलवायु केंद्र नियमित अपडेट उपलब्ध करा रहे हैं, ताकि सरकारें, मानवीय सहायता संगठन और अन्य निर्णयकर्ता संभावित जोखिमों के लिए पहले से तैयारी कर सकें।

आने वाले महीनों में तापमान, बारिश, कृषि, जल संसाधन और स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। WMO का ताजा पूर्वानुमान यह संकेत देता है कि 2026 के अंत और 2027 की शुरुआत में अल नीनो वैश्विक मौसम व्यवस्था का एक प्रमुख प्रभावकारी कारक बना रह सकता है।

= = = = = =
लेटेस्ट अपडेट्स के लिए ‘कृषि भूमि’ के व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़ें
= = = = = =
इन ख़बरों को भी पढ़ें…

गेहूं MSP में सिर्फ ₹25 की बढ़ोतरी, किसान संगठनों में नाराजगी; लागत और C2+50% फॉर्मूले पर उठे सवाल

यूपी की सभी 251 मंडियां अब Agmarknet 2.0 से जुड़ीं, किसान एक क्लिक में जान सकेंगे कहां क्या भाव

बारिश ने बिगाड़ा सब्जियों का गणित: मंडियों में आवक घटी, धनिया-अदरक के दाम 250 रुपये किलो तक

महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर से शुरू होगा 2026-27 का गन्ना पेराई सत्र, सरकार ने लिया बड़ा फैसला

शेयर :

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

संबंधित श्रेणी न्यूज़

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

ताज़ा न्यूज़

विज्ञापन

विशेष न्यूज़

Stay with us!

Subscribe to our newsletter and get notification to stay update.

राज्यों की सूची