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RBI ने रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 5.50% किया, महंगाई पर सख्ती का संकेत

मुंबई (कृषि भूमि ब्यूरो): RBI Repo Rate Hike: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 7 अक्टूबर 2026 को नीतिगत रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया। यह फरवरी 2023 के बाद पहली दर बढ़ोतरी है। MPC की 63वीं बैठक 5 से 7 अक्टूबर के बीच RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई। रेपो रेट बढ़ाने का फैसला सभी छह सदस्यों ने सर्वसम्मति से लिया।

रेपो रेट बढ़ाने के साथ RBI ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में निकट अवधि में दरों में कटौती का विकल्प फिलहाल सामने नहीं है। आगे की नीति कार्रवाई दर बढ़ाने या उसे मौजूदा स्तर पर बनाए रखने के रूप में हो सकती है।

महंगाई के बढ़ते जोखिम ने बढ़ाई चिंता

RBI के मुताबिक महंगाई का परिदृश्य पिछले वर्ष की तुलना में अब उतना अनुकूल नहीं है। अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.5 प्रतिशत थी। खाद्य और ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ कोर महंगाई में भी तेजी के संकेत मिले हैं। चीनी और प्याज जैसी वस्तुओं में कीमतों का दबाव अधिक व्यापक हुआ है।

अगस्त में कोर महंगाई 4.2 प्रतिशत रही, जबकि कीमती धातुओं को हटाने पर यह 2.9 प्रतिशत थी। RBI ने यह भी कहा कि CPI बास्केट में 4 प्रतिशत से अधिक महंगाई वाली वस्तुओं का भारित हिस्सा बढ़कर करीब 37 प्रतिशत हो गया है। यह संकेत देता है कि महंगाई का दबाव कुछ चुनिंदा वस्तुओं तक सीमित नहीं रह गया है।

केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए CPI महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है। दूसरी तिमाही में महंगाई 4.9 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही के लिए यह अनुमान 5.6 प्रतिशत है। वहीं FY27 में कोर महंगाई का अनुमान 4.4 प्रतिशत रखा गया है।

मानसून, अल नीनो और कच्चे तेल से जोखिम

RBI ने महंगाई के लिए कई आपूर्ति-पक्षीय जोखिमों को रेखांकित किया है। कमजोर मानसून, जारी अल नीनो परिस्थितियां तथा ऊर्जा और अन्य कमोडिटी की ऊंची कीमतें आने वाले महीनों में कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष के फिर बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव ने भी वैश्विक आर्थिक माहौल को अधिक अनिश्चित बनाया है।

ऐसे माहौल में RBI का ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ रुख बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। हालांकि दर बढ़ाने पर MPC में कोई मतभेद नहीं था, लेकिन नीति रुख बदलने पर मत विभाजित रहे। दो सदस्यों—डॉ. नागेश कुमार और प्रो. राम सिंह—ने न्यूट्रल रुख बनाए रखने का समर्थन किया।

आर्थिक विकास पर RBI का भरोसा कायम

महंगाई के दबाव के बावजूद RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता को लेकर सकारात्मक आकलन किया है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही, जो उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन को दर्शाती है। घरेलू मांग, निजी खपत, निवेश और सेवा गतिविधियों ने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है।

RBI ने FY27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि का अनुमान 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। दूसरी तिमाही में 7.2 प्रतिशत, तीसरी में 6.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.8 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। FY28 की पहली तिमाही में GDP वृद्धि 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।

RBI के अनुसार मजबूत क्षमता उपयोग, बेहतर क्रेडिट प्रवाह, सरकारी बुनियादी ढांचा खर्च और निजी पूंजीगत निवेश में सुधार की संभावनाएं निवेश गतिविधियों को समर्थन दे सकती हैं। सेवा क्षेत्र की मजबूती और घरेलू मांग भी विकास की रफ्तार को सहारा दे रही है।

RBI
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आगे क्या होगा?

रेपो रेट 5.50 प्रतिशत होने और नीति रुख के अधिक सख्त होने का सीधा असर आने वाले समय में कर्ज की लागत, बॉन्ड यील्ड और ब्याज दर संवेदनशील क्षेत्रों पर पड़ सकता है। खासकर होम लोन, ऑटो लोन और कारोबार के लिए नए कर्ज की लागत पर दबाव बढ़ सकता है, हालांकि वास्तविक असर बैंकों द्वारा दरों में बदलाव और मौद्रिक नीति के ट्रांसमिशन पर निर्भर करेगा।

RBI का ताजा फैसला बताता है कि फिलहाल केंद्रीय बैंक की प्राथमिकता महंगाई को नियंत्रित रखना है, जबकि मजबूत आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने की कोशिश जारी है। आगे की दर नीति महंगाई के वास्तविक आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों, मानसून, वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों और घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर निर्भर करेगी।

ताजा बाजार संकेत भी बताते हैं कि RBI के फैसले के बाद भारतीय शेयर बाजार और रुपया दबाव में रहे, जबकि ऊंची तेल कीमतों ने महंगाई को लेकर चिंता बढ़ाई है।

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