नई दिल्ली, 20 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): Rabi Crops Area Coverage 2025-26 – कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 16 जनवरी 2026 तक रबी फसलों के क्षेत्र विस्तार के ताजा आंकड़े जारी कर दिए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चालू रबी सीजन में बुवाई की रफ्तार मजबूत बनी हुई है और कुल रबी फसलों का रकबा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 20.88 लाख हेक्टेयर बढ़ गया है। रबी 2025-26 में कुल फसल क्षेत्र बढ़कर 652.33 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो सीजन की स्थिर और सकारात्मक प्रगति को दर्शाता है।
गेहूं की बुवाई में मजबूती बनी हुई
रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं का रकबा इस साल स्पष्ट रूप से बढ़ा है। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, गेहूं की बुवाई 334.17 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 6.13 लाख हेक्टेयर अधिक है। यह बढ़ोतरी संकेत देती है कि किसानों का झुकाव एक बार फिर गेहूं की ओर मजबूत हुआ है, खासकर तब जब सरकारी खरीद, न्यूनतम समर्थन मूल्य और निर्यात प्रतिबंधों में स्थिरता जैसे कारक किसानों को भरोसा दे रहे हैं।
दलहन फसलों में चना बना किसानों की पहली पसंद
दलहन फसलों के कुल क्षेत्रफल में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चालू रबी सीजन में दलहनों का रकबा 3.82 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। इसमें सबसे बड़ा योगदान चने का रहा है। चने की बुवाई में 4.66 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी देखी गई है, जो साफ तौर पर बेहतर बाजार संकेतों, अपेक्षाकृत स्थिर कीमतों और कम जोखिम वाले उत्पादन की ओर किसानों की बढ़ती रुचि को दर्शाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चने के क्षेत्र में यह बढ़ोतरी आगे चलकर दालों की उपलब्धता और कीमतों पर सकारात्मक असर डाल सकती है।
तिलहन क्षेत्र में भी सकारात्मक संकेत
रबी तिलहन फसलों का कुल क्षेत्रफल 96.86 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जिसमें 3.53 लाख हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई है। खास तौर पर सरसों और रेपसीड की बुवाई में 2.79 लाख हेक्टेयर का इजाफा हुआ है। यह बढ़ोतरी सरकार के तिलहन उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों और आयात निर्भरता घटाने की रणनीति के अनुरूप मानी जा रही है।
सरसों की मजबूत बुवाई से आने वाले महीनों में खाद्य तेल बाजार को भी कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मोटे अनाज और श्री अन्न की स्थिति
श्री अन्न और मोटे अनाज के तहत भी रबी सीजन में बुवाई का रुझान सकारात्मक रहा है। मक्का, जौ और रागी जैसी फसलों के क्षेत्र में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि ज्वार के रकबे में हल्की गिरावट देखने को मिली है। कुल मिलाकर मोटे अनाज का प्रदर्शन संतुलित रहा है, जो फसल विविधीकरण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
कृषि सीजन के लिए क्या संकेत मिलते हैं
कृषि मंत्रालय के अनुसार, रबी फसलों के रकबे में यह बढ़ोतरी किसानों के भरोसे, अनुकूल मौसम परिस्थितियों और सरकारी नीतिगत समर्थन को दर्शाती है। पर्याप्त मिट्टी में नमी, समय पर बुवाई और इनपुट उपलब्धता ने भी रबी सीजन को मजबूती दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में बुवाई के अंतिम आंकड़े सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। हालांकि मौजूदा रुझानों को देखते हुए रबी 2025-26 सीजन उत्पादन के लिहाज से एक मजबूत और संतुलित सीजन साबित हो सकता है।
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