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Silver Price Crash: चांदी का ब्लैक फ्राइडे: 24 घंटे में ₹96,000 का क्रैश, क्या 1980 का ‘सिल्वर थर्सडे’ फिर लौट आया?

नई दिल्ली, 31 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): कमोडिटी बाजार में शुक्रवार का दिन निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। हफ्तों तक रॉकेट की रफ्तार से ऊपर चढ़ने वाली चांदी एक ही झटके में औंधे मुंह गिर पड़ी। कीमतों में आई इस ऐतिहासिक गिरावट ने न सिर्फ निवेशकों की कमाई मिटा दी, बल्कि बाजार को 1980 के उस काले अध्याय की याद भी दिला दी, जिसे आज भी ‘सिल्वर थर्सडे’ कहा जाता है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज—Multi Commodity Exchange (MCX)—पर मार्च एक्सपायरी वाली चांदी अपने उच्च स्तर से करीब 24 प्रतिशत तक टूट गई। महज 24 घंटे के भीतर ₹96,000 प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई और भाव फिसलकर लगभग ₹3,03,916 प्रति किलो तक आ गए। यह गिरावट इसलिए भी ज्यादा डरावनी मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले चांदी ने बहुत कम समय में असाधारण तेजी दिखाई थी।

बाजार में क्यों मचा कोहराम?

पिछले कुछ हफ्तों से चांदी को लेकर माहौल पूरी तरह बुलिश था। वैश्विक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई की आशंकाओं और सोलर पैनल जैसे इंडस्ट्रियल सेक्टर से बढ़ती मांग ने चांदी को निवेशकों का चहेता बना दिया था। लेकिन शुक्रवार को तस्वीर पूरी तरह बदल गई।

एक साथ कई ट्रिगर्स एक्टिव हुए:

  • बड़े निवेशकों ने रिकॉर्ड स्तर पर मुनाफावसूली शुरू की
  • फ्यूचर्स बाजार में भीड़भाड़ वाली लॉन्ग पोज़िशन अचानक खुलीं
  • डॉलर में मजबूती से कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा
  • वोलैटिलिटी बढ़ते ही स्टॉप-लॉस ट्रिगर हुए, जिससे गिरावट और तेज हुई

नतीजा—चांदी में ऐसी बिकवाली आई, जिसने बाजार की दिशा ही पलट दी।

एक दिन की गिरावट: आंकड़ों में झटका

पैरामीटर विवरण
एक्सचेंज MCX
कॉन्ट्रैक्ट मार्च एक्सपायरी
एक दिन की गिरावट ~24%
अधिकतम नुकसान ₹96,000 प्रति किलो
गिरावट के बाद भाव ₹3,03,916 प्रति किलो
सोने की स्थिति गोल्ड फ्यूचर्स ~9% नीचे

1980 की परछाईं: क्यों हो रही है तुलना?

बाजार के जानकार इस गिरावट को इतिहास के सबसे चर्चित सिल्वर क्रैश से जोड़कर देख रहे हैं। 1970 के दशक के अंत में अमेरिका के अरबपति हंट ब्रदर्स ने चांदी में आक्रामक खरीद कर बाजार को ‘कॉर्नर’ करने की कोशिश की थी।

तब क्या हुआ था?

  • 1973 में चांदी करीब $1.95 प्रति औंस
  • 1979–80 में कीमतें बेकाबू होकर $50 प्रति औंस तक पहुंचीं
  • अमेरिकी नियामकों ने सख्त नियम लगाए
  • 27 मार्च 1980 को कीमतें एक ही दिन में 50% से ज्यादा टूट गईं
  • यह दिन इतिहास में दर्ज हुआ—‘सिल्वर थर्सडे’

आज का बाजार भले ही उस दौर जैसा न हो, लेकिन समानताएं निवेशकों को सतर्क कर रही हैं—तेज रैली, भारी सट्टेबाजी और फिर अचानक आई जबरदस्त गिरावट।

दस साल की उड़ान, एक दिन का झटका

पिछले दशक में चांदी ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिए हैं। यही वजह है कि इसमें बड़ी संख्या में रिटेल और प्रोफेशनल निवेशक जुड़े।

धातु 10 साल में रिटर्न (लगभग)
चांदी 10 गुना
सोना 5 गुना

इतने तेज रिटर्न के बाद बाजार में करेक्शन आना कई एक्सपर्ट्स के मुताबिक “स्वाभाविक” था, लेकिन गिरावट की रफ्तार ने सभी को चौंका दिया।

डॉलर फैक्टर और वैश्विक संकेत

शुक्रवार की गिरावट के पीछे एक बड़ा कारण डॉलर की मजबूती भी रहा। अमेरिका में फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन के नाम के ऐलान के बाद डॉलर इंडेक्स में उछाल आया। चूंकि सोना और चांदी डॉलर में ट्रेड होती हैं, इसलिए डॉलर के मजबूत होते ही इन धातुओं पर दबाव बढ़ जाता है।

इसके अलावा अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, वैश्विक फंड्स का कमोडिटी से आंशिक एग्जिट और जोखिम भरे एसेट्स से दूरी- इन सबने मिलकर गिरावट को और गहरा किया।

एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी हमेशा से हाई-बीटा कमोडिटी रही है—यानी इसमें उतार-चढ़ाव तेज होता है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार-
– शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है
– तेज गिरावट के बाद टेक्निकल बाउंस संभव
– लॉन्ग टर्म निवेशकों को चरणबद्ध निवेश की सलाह
– बिना हेजिंग के बड़े दांव जोखिम भरे

आगे का रास्ता: निवेशकों के लिए सबक

  • तेजी के दौर में लालच से बचें
  • स्टॉप-लॉस और रिस्क मैनेजमेंट अनिवार्य
  • पोर्टफोलियो में केवल एक एसेट पर निर्भर न रहें
  • चांदी में निवेश करते समय इंडस्ट्रियल डिमांड + मैक्रो फैक्टर दोनों देखें

कुलमिलाकर, चांदी का यह क्रैश सिर्फ कीमतों का नहीं, बल्कि बाजार की मानसिकता का भी आईना है। इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी एसेट में अंधाधुंध तेजी आई है, उसके बाद दर्दनाक गिरावट भी देखने को मिली है। सवाल अब यही है—क्या यह 1980 जैसा बड़ा मोड़ है, या फिर लंबी रैली के बाद आया एक जरूरी करेक्शन?

फिलहाल इतना तय है कि चांदी की चमक जितनी तेज थी, उसकी फिसलन उतनी ही खतरनाक साबित हुई है।

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