नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (CCEA) ने विपणन सीजन 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि यह फैसला किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने और दलहन-तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहन देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष MSP में सबसे अधिक बढ़ोतरी सूरजमुखी के बीज में 622 रुपये प्रति क्विंटल की गई है। इसके अलावा कपास में 557 रुपये, नाइजरसीड में 515 रुपये और तिल में 500 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि दर्ज की गई है। यह संकेत माना जा रहा है कि केंद्र सरकार खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए तिलहन उत्पादन को प्राथमिकता दे रही है।
धान, दालों और तिलहन पर विशेष फोकस
धान (सामान्य) का MSP 2369 रुपये से बढ़ाकर 2441 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जबकि ग्रेड-ए धान का MSP 2461 रुपये तय किया गया है। दलहन फसलों में अरहर का MSP 8450 रुपये, मूंग का 8780 रुपये और उरद का 8200 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दालों और तिलहन पर एमएसपी बढ़ोतरी का उद्देश्य किसानों को परंपरागत धान-गेहूं चक्र से बाहर निकालकर वैकल्पिक फसलों की ओर आकर्षित करना है। इससे जल संरक्षण और पोषण सुरक्षा दोनों को बढ़ावा मिल सकता है।
प्रमुख फसलों के नए एमएसपी
| फसल | MSP 2026-27 (रु./क्विंटल) | MSP में वृद्धि |
|---|---|---|
| धान (सामान्य) | 2441 | 72 रु. |
| बाजरा | 2900 | 125 रु. |
| मक्का | 2410 | 10 रु. |
| अरहर | 8450 | 450 रु. |
| मूंग | 8780 | 12 रु. |
| उरद | 8200 | 400 रु. |
| सूरजमुखी बीज | 8343 | 622 रु. |
| तिल | 10346 | 500 रु. |
| कपास (मध्यम रेशा) | 8267 | 557 रु. |
लागत से 50 प्रतिशत अधिक MSP का दावा
केंद्र सरकार ने कहा है कि एमएसपी निर्धारण केंद्रीय बजट 2018-19 की उस घोषणा के अनुरूप है, जिसमें किसानों को उनकी औसत उत्पादन लागत का कम से कम डेढ़ गुना मूल्य देने की बात कही गई थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, किसानों को मूंग पर उत्पादन लागत के मुकाबले 61 प्रतिशत, बाजरा और मक्का पर 56 प्रतिशत तथा अरहर पर 54 प्रतिशत तक लाभ मिलने का अनुमान है।
हालांकि कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि MSP बढ़ाने के साथ-साथ प्रभावी सरकारी खरीद व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। कई राज्यों में किसानों को घोषित MSP का पूरा लाभ नहीं मिल पाता क्योंकि खरीद केंद्र सीमित होते हैं या निजी व्यापारियों का दबदबा बना रहता है।
सरकार ने खरीद और भुगतान के आंकड़े भी जारी किए
सरकार ने पिछले वर्षों के MSP भुगतान और खरीद के आंकड़े जारी करते हुए दावा किया कि 2014-15 से 2025-26 के दौरान धान की खरीद 8418 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि 2004-05 से 2013-14 के बीच यह 4590 लाख मीट्रिक टन थी।
इसी अवधि में धान उत्पादक किसानों को MSP के रूप में 16.08 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि पूर्ववर्ती दशक में यह राशि 4.44 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं, 14 खरीफ फसलों के किसानों को 2014-15 से 2025-26 के बीच कुल 18.99 लाख करोड़ रुपये MSP भुगतान के रूप में दिए गए।
कृषि अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर
विश्लेषकों का मानना है कि MSP में यह वृद्धि ग्रामीण मांग को सहारा दे सकती है, खासकर ऐसे समय में जब खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। डीजल, उर्वरक, मजदूरी और सिंचाई खर्च में बढ़ोतरी के बीच MSP में संशोधन किसानों के लिए राहत माना जा रहा है।
हालांकि बाजार विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि MSP वृद्धि का असर खाद्य मुद्रास्फीति पर पड़ सकता है। आने वाले महीनों में सरकार के लिए किसानों की आय और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
सरकार की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि खरीफ सीजन में दलहन और तिलहन की बुवाई बढ़ाने के लिए राज्यों के साथ मिलकर विशेष अभियान चलाए जाएंगे। ऐसे में आगामी मानसून और बाजार स्थितियां यह तय करेंगी कि MSP वृद्धि का वास्तविक लाभ किसानों तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंच पाता है।
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