नई दिल्ली, 28 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) ने प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत पूरी होने और समझौते को अंतिम रूप देने की घोषणा की है। यह भारत का अब तक का 19वां व्यापार समझौता होगा, जिससे 27 देशों वाले यूरोपीय ब्लॉक के साथ आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इस समझौते का सबसे सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, क्योंकि इसके तहत जैतून का तेल, प्रोसेस्ड फूड, बिस्कुट, चॉकलेट, पास्ता और फलों के जूस जैसे रोजमर्रा और प्रीमियम खाद्य उत्पादों पर लगने वाले ऊंचे इंपोर्ट टैरिफ खत्म या काफी कम किए जाएंगे।
क्यों अहम है India-EU FTA
वैश्विक व्यापार इस समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। अमेरिका द्वारा कई उत्पादों पर ऊंचे टैरिफ लगाए जाने से अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और भारत को भी कुछ मामलों में 50 प्रतिशत तक के टैरिफ दबाव का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे माहौल में EU के साथ FTA भारत को अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाने का मौका देगा और चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति को मजबूती देगा। EU के लिए भी भारत एक बड़ा और तेजी से बढ़ता उपभोक्ता बाजार है, जो अमेरिकी टैरिफ जोखिम का संतुलन बना सकता है।
खाद्य और कृषि उत्पादों पर बड़ा असर
समझौते के तहत यूरोपीय कृषि-खाद्य उत्पादों पर भारत में लगने वाली ड्यूटी को चरणबद्ध तरीके से घटाया जाएगा। जैतून का तेल, मार्जरीन और अन्य वनस्पति तेलों पर लगने वाली करीब 45 प्रतिशत तक की ड्यूटी को पांच वर्षों में पूरी तरह समाप्त करने का प्रावधान किया गया है। इससे भारत में जैतून के तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आने की संभावना है, जो अब तक ऊंची कीमतों के कारण सीमित उपभोक्ता वर्ग तक ही सिमटा हुआ था।
इसी तरह, ब्रेड, पेस्ट्री, बिस्कुट, पास्ता, चॉकलेट और पेट फूड जैसे प्रोसेस्ड फूड पर लगने वाले 50 प्रतिशत तक के टैरिफ हटाए जाएंगे। फलों के जूस और नॉन-अल्कोहलिक बीयर पर भी 55 प्रतिशत तक की इंपोर्ट ड्यूटी घटाकर शून्य की जाएगी। इसके अलावा, कीवी और नाशपाती जैसे फलों पर कोटा आधारित ड्यूटी में कटौती की जाएगी, जिससे इन फलों की खुदरा कीमतें भी कम हो सकती हैं।
कुल मिलाकर, भारत में यूरोपीय कृषि-खाद्य निर्यात पर लगने वाले औसतन 36 प्रतिशत से अधिक के टैरिफ या तो खत्म होंगे या बड़े स्तर पर घटाए जाएंगे। इससे उपभोक्ताओं को न सिर्फ सस्ते उत्पाद मिलेंगे, बल्कि बाजार में विकल्प और प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।
व्यापार और निवेश को मिलेगी रफ्तार
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-EU द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 136.53 बिलियन डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 75.85 बिलियन डॉलर और आयात 60.68 बिलियन डॉलर का था। EU भारत का सबसे बड़ा वस्तु व्यापार भागीदार बन चुका है और भारत के कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत है। सेवाओं को मिलाकर देखें तो भारत ने EU को करीब 106 बिलियन डॉलर का निर्यात किया, जबकि EU से भारत को लगभग 84.5 बिलियन डॉलर का आयात हुआ।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि FTA से सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि निवेश, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सप्लाई-चेन इंटीग्रेशन को भी बढ़ावा मिलेगा। फार्मा, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के लिए EU बाजार में पहुंच आसान होगी।
उपभोक्ताओं और उद्योग के लिए क्या मायने
जहां एक ओर भारतीय उपभोक्ताओं को यूरोपीय खाद्य उत्पाद कम कीमतों पर और अधिक विकल्पों के साथ मिलेंगे, वहीं घरेलू उद्योग के सामने प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। नीति विशेषज्ञों के अनुसार, FTA का असली लाभ तभी सामने आएगा जब भारतीय उद्योग गुणवत्ता, पैकेजिंग और वैल्यू एडिशन पर फोकस बढ़ाएगा।
कुल मिलाकर, India-EU FTA को भारत की लॉन्ग-टर्म ट्रेड और जियो-इकोनॉमिक स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले वर्षों में बाजार, निवेश और उपभोक्ता व्यवहार—तीनों पर दिखाई देगा।
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