नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Copper Price Hike: दुनियाभर में कॉपर की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। ग्लोबल सप्लाई में कमी, खदानों में उत्पादन बाधाएं और चीन की मजबूत मांग ने लाल धातु यानी कॉपर को रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचा दिया है। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) और न्यूयॉर्क के कॉमेक्स (COMEX) दोनों बाजारों में कॉपर के दाम तेजी से ऊपर चढ़ रहे हैं।
बुधवार को LME पर कॉपर लगातार आठवें कारोबारी सत्र में तेजी के साथ $14,196.50 प्रति टन तक पहुंच गया। यह जनवरी में बने $14,527.50 प्रति टन के ऑल-टाइम हाई के बेहद करीब है। वहीं COMEX पर कॉपर फ्यूचर्स $6.69 प्रति पाउंड के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए।
Copper Price Hike पर विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में कॉपर की कीमतों को सबसे बड़ा सपोर्ट सप्लाई संकट से मिल रहा है, जबकि इलेक्ट्रिफिकेशन और ग्रीन एनर्जी सेक्टर की बढ़ती मांग कीमतों को और मजबूती दे रही है।
Copper Price Hike: सप्लाई संकट ने बढ़ाई चिंता
कॉपर बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह ग्लोबल सप्लाई में आ रही रुकावटें हैं। मध्य पूर्व में सल्फर की सप्लाई घटने से अफ्रीका की कई कॉपर खदानों में उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। इससे पहले से चल रही सप्लाई दिक्कतें और गंभीर हो गई हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कॉपर उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की उपलब्धता कम होने से कई स्मेल्टर और रिफाइनरी दबाव में हैं। चीन में भी कंसन्ट्रेट की कमी के कारण रिफाइंड कॉपर का उत्पादन घटने लगा है।
बीजिंग एंटाइक इंफॉर्मेशन कंपनी के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में चीन का रिफाइंड कॉपर उत्पादन 1.05 मिलियन टन रहा, जो मार्च के मुकाबले करीब 3% कम है। मई में स्मेल्टर मेंटेनेंस के कारण उत्पादन में और गिरावट आ सकती है।
चीन की मजबूत मांग दे रही सपोर्ट
कॉपर की कीमतों में तेजी का दूसरा बड़ा कारण चीन की मजबूत मांग है। दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर उपभोक्ता चीन पावर ग्रिड, इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर में भारी निवेश कर रहा है।
इन सेक्टर्स में कॉपर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, जिसके चलते इंडस्ट्रियल मेटल्स की मांग लगातार बढ़ रही है।
केओस टर्नरी फ्यूचर्स कंपनी के रिसर्च हेड ली ज़ुएझी के अनुसार, “सप्लाई की लगातार समस्याओं और मजबूत डिमांड के कारण इंडस्ट्रियल मेटल्स में खास तौर पर तेजी बनी हुई है।”
Copper Price Hike: US टैरिफ ने बढ़ाया प्रीमियम
अमेरिका द्वारा रिफाइंड मेटल के इंपोर्ट पर संभावित टैरिफ लगाने की तैयारी भी बाजार में बड़ा फैक्टर बन गई है। यही वजह है कि COMEX कॉपर का प्रीमियम LME कॉपर के मुकाबले $500 प्रति टन से ज्यादा हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका आयात शुल्क बढ़ाता है तो दुनिया भर से रिफाइंड कॉपर अमेरिकी बाजार की ओर खिंच सकता है, जिससे अन्य देशों में सप्लाई और कम हो जाएगी।
अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी 30 जून तक घरेलू कॉपर बाजार पर अपडेटेड रिपोर्ट पेश करेंगे। यह कदम अमेरिका की इलेक्ट्रिफिकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं के लिए जरूरी कॉपर सप्लाई सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
दूसरे बेस मेटल्स में भी तेजी
कॉपर की मजबूती (Copper Price Hike) का असर दूसरे बेस मेटल्स पर भी दिखाई दे रहा है। शंघाई बाजार में एल्युमीनियम 0.3% बढ़कर $3,574 प्रति टन पर पहुंच गया, जबकि टिन 0.5% की तेजी के साथ $55,070 प्रति टन पर कारोबार करता दिखा।
| मेटल | ताजा भाव | बदलाव |
|---|---|---|
| कॉपर | $14,196.50 प्रति टन | ↑ |
| एल्युमीनियम | $3,574 प्रति टन | +0.3% |
| टिन | $55,070 प्रति टन | +0.5% |
आगे क्या रह सकता है ट्रेंड?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि ग्लोबल सप्लाई बाधाएं बनी रहती हैं और चीन की मांग मजबूत रहती है, तो कॉपर जल्द ही नया ऑल-टाइम हाई बना सकता है।
ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल और AI डेटा सेंटर जैसे सेक्टर्स में कॉपर की बढ़ती जरूरत आने वाले समय में इस धातु को और महंगा बना सकती है। ऐसे में निवेशकों और इंडस्ट्रियल खरीदारों की नजर अब आगामी अमेरिकी टैरिफ फैसलों और चीन के उत्पादन आंकड़ों पर टिकी हुई है।
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