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मुंबई (कृषि भूमि ब्यूरो): देश में हल्दी की कीमतों में तेजी के बीच वायदा बाजार में गिरावट दर्ज की गई है। प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में फसल को लेकर बनी चिंताओं और हाजिर बाजार में सीमित उपलब्धता से कीमतों को समर्थन मिल रहा है। हालांकि, हालिया कारोबारी सत्रों में तेजी के बाद निवेशकों और कारोबारियों की मुनाफावसूली ने वायदा भाव पर दबाव बनाया। नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) से जुड़े वायदा आंकड़ों के अनुसार, 27 अक्टूबर 2026 को हल्दी वायदा 814 रुपये यानी 2.92 फीसदी गिरकर 26,502 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। इससे एक दिन पहले, 26 अक्टूबर को इसमें 2.57 फीसदी की तेजी आई थी।

निजामाबाद में हाजिर भाव 25,304 रुपये के पार

NCDEX के हाजिर बाजार आंकड़ों के अनुसार, 27 अक्टूबर को तेलंगाना के निजामाबाद में पॉलिश्ड हल्दी का भाव 25,304.95 रुपये प्रति क्विंटल रहा। इसमें पिछले संदर्भ भाव के मुकाबले 0.89 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। इसी बाजार में अनपॉलिश्ड हल्दी का भाव 23,641.35 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जिसमें 0.25 फीसदी की तेजी आई। महाराष्ट्र के सांगली में राजापुरी हल्दी का भाव 28,173.50 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जो 0.62 फीसदी अधिक था।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि हाजिर बाजार में हल्दी के विभिन्न प्रकारों और उत्पादक केंद्रों में मजबूती बनी हुई है। हालांकि, अलग-अलग किस्मों और गुणवत्ता के कारण इन भावों की सीधे तुलना नहीं की जानी चाहिए।

फसल को लेकर चिंता से कीमतों को सहारा

हल्दी बाजार में तेजी की एक प्रमुख वजह दक्षिण भारत के कुछ उत्पादक क्षेत्रों में मौसम संबंधी अनिश्चितता है। 21 अक्टूबर को प्रकाशित ईटीएग्रीकल्चर की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण भारत में असमान बारिश और मिट्टी में नमी की कमी से हल्दी सहित कई मसाला फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।

उद्योग के अनुमानों के अनुसार, 2026-27 में हल्दी का उत्पादन लगभग 10 फीसदी घट सकता है, जबकि बुवाई क्षेत्र में 10 से 15 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है। यदि शुष्क मौसम का असर जारी रहता है, तो उत्पादन में गिरावट 20 से 25 फीसदी तक पहुंचने की आशंका भी जताई गई है। ये उद्योग के अनुमान हैं, अंतिम उत्पादन आंकड़े नहीं।

कर्नाटक में सूखे और फसल नुकसान को लेकर पहले भी चिंता सामने आई है। ऐसे हालात में बाजार की नजर नई फसल की वास्तविक पैदावार, गुणवत्ता और मंडियों में आने वाली मात्रा पर बनी हुई है।

सीमित आवक और स्टॉक रखने की प्रवृत्ति

अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में बाजार पर उपलब्ध एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में नई आवक धीमी होने और कारोबारियों द्वारा स्टॉक रोककर रखने से हाजिर बाजार में उपलब्धता सीमित बनी हुई है। प्रोसेसरों और उपभोग केंद्रों की मांग भी कीमतों को समर्थन दे रही है।

जब मंडियों में आवक कम होती है और स्टॉकधारक तत्काल बिक्री से बचते हैं, तो खरीदारों को उपलब्ध माल के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। हालांकि, बाजार में वास्तविक कमी कितनी है, इसका आकलन आवक, भंडार और मांग के ताजा आंकड़ों से ही किया जा सकता है।

तेजी के बाद वायदा बाजार में मुनाफावसूली

हाजिर बाजार में मजबूती के बावजूद वायदा भाव में गिरावट इस बात का संकेत है कि कारोबारी अल्पकालिक लाभ सुरक्षित कर रहे हैं। 26 अक्टूबर को तेजी के बाद अगले सत्र में हल्दी वायदा 27,326 रुपये प्रति क्विंटल पर खुला और कारोबार के दौरान 27,848 रुपये के उच्च स्तर तक पहुंचा। इसके बाद भाव फिसलकर 26,502 रुपये पर बंद हुआ। दिन का निचला स्तर 26,482 रुपये रहा।

इस गिरावट से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि फसल को लेकर चिंताएं समाप्त हो गई हैं। वायदा कीमतों में बदलाव मांग, कारोबारियों की पोजिशन, मुनाफावसूली और भविष्य में आपूर्ति की उम्मीदों से भी प्रभावित होता है।

आगे हल्दी बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर?

आने वाले दिनों में हल्दी की कीमतों की दिशा मुख्य रूप से नई फसल के उत्पादन अनुमान, प्रमुख मंडियों में आवक, उपलब्ध स्टॉक और घरेलू व निर्यात मांग पर निर्भर करेगी। यदि मौसम संबंधी चिंताओं के कारण उत्पादन प्रभावित होता है और आवक सीमित रहती है, तो हाजिर भाव को समर्थन मिल सकता है। इसके विपरीत, बेहतर पैदावार या मांग में कमजोरी से कीमतों पर दबाव आ सकता है।

फिलहाल बाजार में हाजिर मजबूती और वायदा गिरावट का मिला-जुला रुख दिखाई दे रहा है। किसानों और कारोबारियों के लिए मंडी के स्थानीय भाव, गुणवत्ता के अंतर और वास्तविक आवक पर नजर रखना जरूरी है। वायदा बाजार में एक दिन की गिरावट को कीमतों की दीर्घकालिक दिशा का संकेत मानने से पहले आगे के कारोबारी आंकड़ों का इंतजार करना उचित होगा।

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