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Sugar Crisis: नेपाल में चीनी के लिए हाहाकार! 120 रुपये किलो पहुंची कीमत, भारत से मंगाने की तैयारी

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Sugar Crisis – नेपाल में चीनी का संकट: नेपाल में दशैं और तिहार जैसे प्रमुख त्योहारों से पहले चीनी की कीमत और उपलब्धता दोनों चिंता का विषय बन गए हैं। नेपाली बाजारों में जिस चीनी की खुदरा कीमत कुछ समय पहले करीब 95-100 नेपाली रुपये प्रति किलोग्राम थी, उसके दाम कई जगह 120 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। समस्या सिर्फ महंगी चीनी की नहीं है—कई दुकानों पर अधिक कीमत देने के बावजूद उपभोक्ताओं को चीनी आसानी से नहीं मिल रही।

Sugar Crisis: नेपाल में चीनी की यह स्थिति अचानक पैदा हुई समस्या नहीं है। इसके पीछे घरेलू उत्पादन की सीमाएं, आयात पर निर्भरता, भारत की निर्यात नीति और त्योहारों से पहले बढ़ने वाली मांग जैसे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं।

Sugar Crisis: भारत के फैसले ने बढ़ाई नेपाल की चिंता

नेपाल के लिए भारत चीनी आपूर्ति का महत्वपूर्ण स्रोत है। भारत ने 13 मई 2026 को कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात को 30 सितंबर 2026 तक प्रतिबंधित कर दिया था। हालांकि, सरकारी अनुरोध पर खाद्य सुरक्षा जरूरतों के लिए कुछ सरकार-से-सरकार (G2G) निर्यात की अनुमति का प्रावधान रखा गया है।

भारत सरकार का यह फैसला घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लिया गया था। भारत में भी अगस्त में चीनी की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। सरकार ने पहले डीलरों के स्टॉक पर सीमा लगाई और अब बड़े थोक उपभोक्ताओं के लिए भी स्टॉक रखने की अवधि सीमित की है।

इसका असर नेपाल पर इसलिए अधिक पड़ रहा है क्योंकि नेपाल की घरेलू चीनी उत्पादन क्षमता उसकी कुल मांग को पूरी तरह पूरा नहीं करती।

घरेलू उत्पादन मांग से पीछे

हालिया नेपाली रिपोर्टों के अनुसार देश में सालाना चीनी की मांग करीब 3 लाख टन है, जबकि घरेलू उत्पादन लगभग 2 लाख टन के आसपास है। यानी करीब 1 लाख टन की कमी आयात से पूरी करनी पड़ती है। त्योहारों के दौरान मासिक मांग भी सामान्य अवधि के मुकाबले बढ़ जाती है।

यही कारण है कि भारत से नियमित आयात बाधित होने पर नेपाल के बाजार में कीमतों और उपलब्धता पर तुरंत असर पड़ता है।

जून में भी नेपाल में चीनी की कीमत करीब 95 रुपये से बढ़कर 110 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई थी। उस समय उद्योग और सरकारी अधिकारियों ने पर्याप्त स्टॉक होने का भरोसा दिया था।

लेकिन बाद की रिपोर्टों में स्टॉक की स्थिति को लेकर तस्वीर ज्यादा चिंताजनक नजर आई। इससे बाजार में जमाखोरी, कृत्रिम कमी और आपूर्ति तंत्र की निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

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G2G आयात से राहत की कोशिश

Sugar Crisis: नेपाल सरकार अब भारत के साथ सरकार-से-सरकार व्यवस्था के जरिए चीनी आयात पर जोर दे रही है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल के पास भारत द्वारा पहले स्वीकृत कोटे में 10,000 टन चीनी का शेष हिस्सा मौजूद है, जिसके तहत आयात की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। खाद्य व्यवस्था तथा व्यापार कम्पनी ने शुरुआती तौर पर 1,000 टन चीनी नेपालगंज पहुंचने की जानकारी भी दी है।

यह कदम दशैं, तिहार और छठ के दौरान संभावित मांग को देखते हुए महत्वपूर्ण है। हालांकि, केवल सरकारी आयात से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। नेपाल को घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आयात नीति को समय पर स्पष्ट करने और पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखने की जरूरत होगी।

क्या भारत-नेपाल चीनी संकट का सीधा कनेक्शन है?

हां, कनेक्शन स्पष्ट है, लेकिन पूरी समस्या सिर्फ भारत के निर्यात प्रतिबंध की वजह से नहीं है। भारत का फैसला तत्काल आपूर्ति दबाव बढ़ाने वाला बड़ा कारण है। इसके साथ नेपाल की आयात निर्भरता, घरेलू उत्पादन और मांग के बीच अंतर, त्योहारों से पहले बढ़ती खपत तथा बाजार में संभावित जमाखोरी ने संकट को गहरा किया है।

स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने खुद घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए स्टॉक सीमा और अन्य उपाय लागू किए हैं।

अगर नेपाल समय रहते पर्याप्त चीनी बाजार में नहीं पहुंचा पाता, तो दशैं-तिहार के दौरान कीमतों में और तेजी आने का जोखिम बना रहेगा। फिलहाल G2G आयात से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन त्योहारों की बढ़ती मांग के बीच असली परीक्षा आपूर्ति की निरंतरता और बाजार निगरानी की होगी।

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