नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): सरसों के भाव में ऐतिहासिक तेजी: राजस्थान की कृषि मंडियों में सरसों के दाम लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। अच्छी गुणवत्ता वाली सरसों वर्तमान में 8,000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है, जो पिछले करीब 10 वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है। बाजार में आई इस उछाल के पीछे मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक खाद्य तेल बाजार में बनी अनिश्चितता है।
क्यों बढ़ रहे हैं सरसों के भाव?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, समुद्री व्यापार मार्गों में आई बाधाओं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता का सीधा असर भारत के तेलहन बाजार पर पड़ रहा है। खाद्य तेलों की संभावित कमी की आशंका को देखते हुए तेल मिलों ने अपनी खरीद को आक्रामक तरीके से बढ़ा दिया है। मेड़ता मंडी सहित राज्य की प्रमुख मंडियों में सरसों की भारी मांग देखी जा रही है, जिसने कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर धकेल दिया है।
बाजार का भविष्य: क्या 8,500 के पार जाएगी सरसों?
मंडी व्यापारियों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में स्थिति तनावपूर्ण बनी रहती है, तो सरसों के भाव जल्द ही 8,500 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को भी पार कर सकते हैं। हालांकि, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में परिस्थितियां सामान्य होती हैं, तो कीमतों में कुछ नरमी आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।
किसानों के लिए स्थिति: बेचना या इंतजार करना?
वर्तमान में किसानों के बीच उपज बेचने को लेकर बड़ी दुविधा बनी हुई है:
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विकल्प 1: वर्तमान लाभ: जिन किसानों ने स्टॉक कर रखा है, वे 8,000 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ लेने के लिए बाजार में धीरे-धीरे अपनी उपज ला रहे हैं।
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विकल्प 2: बेहतर भविष्य: कई किसान इस उम्मीद में अपनी उपज रोके हुए हैं कि यदि बाजार में तेजी जारी रही, तो दाम 10,000 रुपये प्रति क्विंटल तक भी पहुंच सकते हैं।

कृषि विशेषज्ञों की राय
कृषि और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय सरसों की कीमतें घरेलू उत्पादन से कहीं अधिक वैश्विक घटनाओं से संचालित हो रही हैं। विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि:
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वे जल्दबाजी में कोई भी बड़ा निर्णय लेने से बचें।
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बाजार की दैनिक चाल और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निरंतर नजर रखें।
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उपज का एक हिस्सा अभी बेचकर मुनाफा सुनिश्चित करें और शेष हिस्सा बाजार की स्थिति के आधार पर रोकें।
कुलमिलाकर, सरसों का बाजार फिलहाल अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। किसानों के लिए यह समय विवेकपूर्ण तरीके से कदम उठाने का है। वैश्विक घटनाओं में आने वाला कोई भी छोटा सा बदलाव कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव ला सकता है।
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