नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Mango Storage: आम दुनिया के सबसे लोकप्रिय उष्णकटिबंधीय फलों में गिना जाता है। अपने मीठे स्वाद, सुगंध और पोषण गुणों के कारण इसकी मांग वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ रही है। लेकिन आम उत्पादक देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह रहती है कि तुड़ाई के बाद फल तेजी से पकने लगता है, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है और भंडारण व परिवहन के दौरान खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
अब चीन की हेनान यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने Mango Storage की समस्या का प्रभावी समाधान खोजने का दावा किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि आम को 12 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जाए तो उसकी ताजगी लंबे समय तक बनी रह सकती है। यह अध्ययन जर्नल Tropical Plants में प्रकाशित हुआ है और इसमें बताया गया है कि यह तापमान आम की पकने की प्रक्रिया को धीमा करने के साथ-साथ उसकी प्राकृतिक संरचना और पोषण गुणवत्ता को भी सुरक्षित रखता है।
गर्म तापमान में तेजी से पकता है आम
आमतौर पर उष्णकटिबंधीय देशों में आम का परिवहन 26°C से 30°C तापमान के बीच किया जाता है। यह व्यवस्था व्यावहारिक तो मानी जाती है, लेकिन उच्च तापमान फल के तेजी से पकने का कारण बनता है। परिणामस्वरूप आम जल्दी नरम हो जाता है, उसका वजन घटने लगता है और खराब होने की संभावना बढ़ जाती है।
वैज्ञानिकों को पहले से यह जानकारी थी कि कम तापमान पकने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है। हालांकि, आम जैसे उष्णकटिबंधीय फल अत्यधिक ठंड के प्रति संवेदनशील होते हैं और उनमें ‘चिलिंग इंजरी’ यानी ठंड से होने वाला नुकसान देखा जाता है। इसी कारण सही तापमान की पहचान करना चुनौतीपूर्ण रहा है।

24 दिनों तक किया गया परीक्षण
शोधकर्ताओं ने ‘ताइनोंग नंबर-1’ किस्म के आमों पर अध्ययन किया। इसके तहत फलों को 24 दिनों तक दो अलग-अलग तापमान—12°C और 30°C—पर रखा गया। इस दौरान रंग, कठोरता, वजन, शुगर स्तर, अम्लता और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) जैसे कारकों की जांच की गई।
शुरुआती 12 दिनों तक दोनों तापमान पर रखे गए आमों में ज्यादा अंतर दिखाई नहीं दिया। लेकिन 16वें दिन के बाद परिणाम स्पष्ट होने लगे। 30°C पर रखे गए आम तेजी से पीले होने लगे, जबकि 12°C पर रखे गए आमों में क्लोरोफिल का क्षरण धीमा रहा और उनका प्राकृतिक रंग लंबे समय तक बरकरार रहा।
स्वाद और गुणवत्ता भी रही बेहतर
अध्ययन में पाया गया कि गर्म तापमान पर आमों में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ा और फिर घटने लगा, जबकि 12°C पर यह प्रक्रिया स्थिर रही। इसी तरह अम्लता भी ठंडे तापमान में बेहतर बनी रही, जिससे स्वाद संतुलित रहा।
सबसे महत्वपूर्ण अंतर वजन और कठोरता में देखा गया। 30°C पर रखे गए आमों का वजन 17 प्रतिशत से अधिक घट गया, जबकि 12°C पर यह कमी 4 प्रतिशत से भी कम रही। वहीं ठंडे तापमान पर आम अधिक समय तक सख्त और ताजा बने रहे।
सूक्ष्म परीक्षणों में यह भी सामने आया कि 12°C पर रखे गए आमों की कोशिका दीवारें और स्टार्च संरचना 24 दिनों बाद भी सुरक्षित थीं। इसके विपरीत, अधिक तापमान पर कोशिकाएं जल्दी कमजोर होकर टूटने लगीं।
एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा प्रणाली हुई मजबूत
शोध में यह भी पाया गया कि 12°C तापमान पर रखने से आम में ऑक्सीडेटिव तनाव कम हुआ। रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) और मालोनडायल्डिहाइड (MDA) जैसे हानिकारक तत्वों का स्तर कम पाया गया, जो फल के खराब होने से जुड़े होते हैं।

इसके अलावा, विटामिन-सी, फिनोलिक्स और फ्लेवोनॉयड्स जैसे महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट तत्व भी लंबे समय तक सुरक्षित रहे। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये तत्व फल की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने में मदद करते हैं।
Mango Storage: निर्यात और कोल्ड-चेन उद्योग को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन आम उत्पादकों, निर्यातकों और कोल्ड-चेन कंपनियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यदि परिवहन और भंडारण के दौरान करीब 12°C तापमान बनाए रखा जाए तो आमों को लंबी दूरी तक बेहतर गुणवत्ता के साथ पहुंचाया जा सकेगा।
इससे न केवल फलों की बर्बादी कम होगी, बल्कि उपभोक्ताओं तक अधिक ताजे और पौष्टिक आम पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। बढ़ते वैश्विक निर्यात बाजार के बीच यह तकनीक आम उद्योग के लिए बड़ा बदलाव ला सकती है।
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