मुंबई (कृषि भूमि ब्यूरो): कॉकरोच जनता पार्टी (CJP): भारत में सोशल मीडिया पर उभरी एक नई डिजिटल मुहिम ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने कुछ ही दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा छेड़ दी है। यह समूह खासतौर पर Gen Z यानी 1995 से 2007 के बीच जन्मे युवाओं की बेरोज़गारी, महंगाई और राजनीतिक उपेक्षा जैसी चिंताओं को आवाज़ देने का दावा कर रहा है। इंस्टाग्राम पर तेजी से लोकप्रिय हुए इस ग्रुप ने कुछ ही दिनों में लगभग 15 मिलियन फॉलोअर्स जुटा लिए, जो कई स्थापित राजनीतिक दलों से अधिक बताए जा रहे हैं।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) खुद को “आलसी और बेरोज़गारों की आवाज़” कहता है। इसका लोगो मोबाइल फोन स्क्रीन पर बने कॉकरोच की आकृति पर आधारित है। समूह के संस्थापक 30 वर्षीय अभिजीत डिपके ने कहा कि यह पहल युवाओं को मुख्यधारा की राजनीतिक चर्चा में जगह दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
चीफ जस्टिस की टिप्पणी से शुरू हुई बहस
इस आंदोलन की शुरुआत उस विवाद के बाद हुई जब भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कथित तौर पर कुछ बेरोज़गार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” से की थी। हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा नकली डिग्री रखने वाले और व्यवस्था का दुरुपयोग करने वाले लोगों की ओर था, न कि सभी युवाओं की ओर।
इसी टिप्पणी को प्रतीक बनाकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने अपने अभियान की शुरुआत की। अभिजीत डिपके ने कहा कि युवाओं को लगातार “नजरअंदाज” किया जा रहा है और रोजगार, शिक्षा व आर्थिक अवसरों जैसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श से गायब होते जा रहे हैं।
सोशल मीडिया बना असंतोष का मंच
कॉकरोच जनता पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर बेरोज़गारी, शिक्षा व्यवस्था, मीडिया स्वतंत्रता, संसद और कैबिनेट में महिलाओं के आरक्षण तथा परीक्षा पेपर लीक जैसे मुद्दों पर पोस्ट और वीडियो साझा किए जा रहे हैं।
हाल ही में राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े पेपर लीक विवाद को भी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने प्रमुखता से उठाया। इस परीक्षा के रद्द होने से लगभग 23 लाख छात्रों पर असर पड़ा था। सोशल मीडिया पर युवाओं ने इसे “भविष्य के साथ खिलवाड़” बताया।
विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म आज युवाओं की राजनीतिक और सामाजिक अभिव्यक्ति का बड़ा माध्यम बन चुका है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) इसी डिजिटल असंतोष का नया चेहरा बनकर सामने आया है।
डेलॉइट सर्वे ने भी दिखाई युवाओं की चिंता
इस सप्ताह जारी डेलॉइट ग्लोबल सर्वे में भी भारतीय युवाओं की आर्थिक और मानसिक चिंताओं को रेखांकित किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की Gen Z आबादी बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और आर्थिक असुरक्षा से सबसे अधिक प्रभावित है।
सर्वे में कहा गया कि बड़ी संख्या में युवा घर खरीदने, शादी करने और परिवार शुरू करने जैसे बड़े फैसले टाल रहे हैं। लगभग 54 प्रतिशत भारतीय Gen Z प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि वित्तीय दबाव के कारण वे जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय आगे बढ़ा रहे हैं।
भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। देश की कुल 1.42 अरब आबादी में लगभग 65 प्रतिशत लोग 35 वर्ष से कम आयु के हैं। हालांकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग में बेरोज़गारी दर राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक बनी हुई है।
AI और रोजगार को लेकर बढ़ती चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग ने भी युवाओं की चिंता बढ़ाई है। खासकर भारत की आईटी और बैक-ऑफिस इंडस्ट्री में एंट्री-लेवल नौकरियों पर इसका असर देखने को मिल रहा है।
युवाओं को डर है कि ऑटोमेशन और AI आने वाले वर्षों में रोजगार के अवसर और सीमित कर सकते हैं। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर रोजगार और आर्थिक असुरक्षा को लेकर बहस लगातार तेज हो रही है।
राजनीतिक आंदोलन बनने की संभावना?
हालांकि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने फिलहाल खुद को राजनीतिक पार्टी घोषित नहीं किया है, लेकिन इसके संस्थापक अभिजीत डिपके का कहना है कि यह “भारत के राजनीतिक विमर्श को बदलने वाला आंदोलन” बन सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका अभियान पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रहेगा।
डिपके के अनुसार, अब तक चार लाख से अधिक लोगों ने Google Form के जरिए सदस्यता के लिए आवेदन किया है, जिनमें 70 प्रतिशत से अधिक युवा 19 से 25 वर्ष आयु वर्ग के हैं।
लखनऊ के 26 वर्षीय सिद्धार्थ कनौजिया जैसे कई युवाओं का कहना है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) उन मुद्दों को उठा रहा है जिन पर मुख्यधारा की राजनीति अक्सर चुप रहती है। यही वजह है कि यह आंदोलन तेजी से युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहा है।
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