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वैश्विक खाद्य तेल बाजार में तेजी से घरेलू तिलहन क्षेत्र को मिला सहारा; सरसों ₹7000 के पार

MSP से ऊपर पहुंचे सरसों के भाव

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): वैश्विक खाद्य तेल बाजार में जारी उथल-पुथल अब भारतीय किसानों के लिए राहत और बेहतर कमाई का बड़ा अवसर बनती दिख रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल की कीमतों में तेजी और आयात में कमी के कारण घरेलू तिलहन बाजार को मजबूती मिली है। इसका सबसे बड़ा असर सरसों की कीमतों में देखने को मिल रहा है, जो अब न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी ऊपर पहुंच चुकी हैं।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अध्यक्ष संजीव अस्थाना का कहना है कि वैश्विक बाजार का मौजूदा माहौल घरेलू तिलहन क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत दे रहा है। आयातित खाद्य तेल की ऊंची कीमतें भारतीय बाजार में भी तेजी बनाए हुए हैं, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं।

सरसों की कीमतों में मजबूती

देश की कई प्रमुख मंडियों में सरसों का भाव करीब ₹7,000 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। यह सरकार द्वारा तय किए गए ₹6,200 प्रति क्विंटल के MSP से काफी अधिक है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक खाद्य तेल महंगाई, आयात में कमी और घरेलू मांग में मजबूती ने सरसों की कीमतों को सहारा दिया है।

अप्रैल 2026 में करीब 16 लाख टन सरसों की रिकॉर्ड पेराई दर्ज की गई, जिससे देश में खाद्य तेल की उपलब्धता बढ़ी है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि ऊंचे बाजार भाव किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रहे हैं, जबकि सरकार पर MSP खरीद और भंडारण का दबाव कम हो सकता है।

प्रमुख आंकड़ेस्थिति
सरसों का मौजूदा भावकरीब ₹7,000 प्रति क्विंटल
सरसों MSP₹6,200 प्रति क्विंटल
अप्रैल 2026 सरसों पेराईलगभग 16 लाख टन
2025-26 सरसों उत्पादन117.6 लाख टन
पिछले वर्ष उत्पादन115.2 लाख टन

खरीफ सीजन में बढ़ सकता है तिलहन रकबा

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कीमतों के कारण किसान आगामी खरीफ सीजन में तिलहन फसलों का रकबा बढ़ा सकते हैं। अंतिम फसल अनुमानों के अनुसार 2025-26 में सरसों का उत्पादन 117.6 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 115.2 लाख टन से अधिक है। इससे यह संकेत मिलता है कि किसानों का रुझान तिलहन खेती की ओर लगातार बढ़ रहा है।

सरसों के भाव
सूरजमुखी और अरंडी को भी मिल रहा सहारा

सूरजमुखी और अरंडी को भी मिल रहा सहारा

सरकार ने सूरजमुखी किसानों को राहत देते हुए 2026-27 सीजन के लिए इसका MSP ₹7,721 से बढ़ाकर ₹8,343 प्रति क्विंटल कर दिया है। MSP में यह बढ़ोतरी किसानों को सूरजमुखी की खेती बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।

वहीं अरंडी (कैस्टर) उत्पादन में भी सुधार देखने को मिला है। SEA के दूसरे अखिल भारतीय अनुमान के मुताबिक 2025-26 सीजन में अरंडी का उत्पादन बढ़कर 17.16 लाख टन तक पहुंच सकता है, जबकि पिछले वर्ष यह 15.90 लाख टन था। अरंडी का रकबा भी करीब 3 प्रतिशत बढ़कर 8.90 लाख हेक्टेयर हो गया है। बेहतर उत्पादकता और किसानों की बढ़ती भागीदारी इस वृद्धि की मुख्य वजह मानी जा रही है।

कपास मिशन से खाद्य तेल क्षेत्र को उम्मीद

हाल ही में सरकार द्वारा मंजूर किए गए कपास उत्पादकता मिशन (2026-31) को खाद्य तेल उद्योग के लिए भी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार कपास उत्पादन बढ़ने से बिनौला (Cottonseed) की उपलब्धता बढ़ेगी और इससे बिनौला तेल उत्पादन में भी सुधार होगा।

संजీవ अस्थाना का कहना है कि भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए घरेलू खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाना बेहद जरूरी है। इससे आयात पर निर्भरता घटेगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी।

आगे क्या रहेगा ट्रेंड?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक खाद्य तेल कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और आयात महंगा रहता है, तो घरेलू तिलहन बाजार में मजबूती जारी रह सकती है। इससे किसानों की आय में सुधार होगा और भारत की खाद्य तेल आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।

आने वाले महीनों में मौसम, वैश्विक सप्लाई और सरकारी नीतियां तिलहन बाजार की दिशा तय करेंगी।

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