डॉलर के दबाव में एशियाई करेंसी, सेंट्रल बैंकों की सक्रियता बढ़ी
नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Currency Market – वैश्विक करेंसी बाजार में पिछले हफ्ते भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जब कई एशियाई देशों ने अपनी स्थानीय करेंसी को कमजोर होने से बचाने के लिए बाजार में दखल देना शुरू किया। जापान, भारत और इंडोनेशिया जैसे देशों के सेंट्रल बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय दिखाई दिए, जिससे निवेशकों के बीच नई हलचल पैदा हो गई है।
पिछले मंगलवार को जापानी येन में अचानक तेज़ मजबूती देखने को मिली। इसके बाद बाजार में यह अटकलें तेज़ हो गईं कि जापान का केंद्रीय बैंक या वित्त मंत्रालय करेंसी को सहारा देने के लिए हस्तक्षेप कर रहा है। हालांकि जापान की फाइनेंस मिनिस्ट्री ने इस पर आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
बाजार सूत्रों के मुताबिक, हाल के हफ्तों में जापानी प्रशासन डॉलर बेचकर येन खरीद रहा है ताकि करेंसी को लगातार गिरावट से बचाया जा सके। Currency market में डॉलर के मुकाबले येन की कमजोरी लंबे समय से जापान के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
Currency Market: एशिया में करेंसी डिफेंस मोड में सेंट्रल बैंक
केवल जापान ही नहीं, इंडोनेशिया ने भी खुलकर संकेत दिए हैं कि उसका केंद्रीय बैंक रुपिया को बचाने के लिए “प्रूडेंट इंटरवेंशन” यानी समझदारी भरा दखल देने को तैयार है।
इसी बीच, बाजार में यह भी चर्चा रही कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी रुपये की गिरावट को रोकने के लिए डॉलर बेचकर हस्तक्षेप किया होगा। हालांकि RBI ने इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
विश्लेषकों के अनुसार, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कारण एशियाई करेंसी पर लगातार दबाव बना हुआ है। निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी एसेट्स की ओर जा रहे हैं।
भारतीय रुपया उभरते एशिया की सबसे कमजोर करेंसी
Currency Market: भारतीय रुपया इस साल अब तक 6% से अधिक गिर चुका है, जिससे यह उभरते एशियाई बाजारों में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली प्रमुख करेंसी बन गया है।
| करेंसी | इस वर्ष अनुमानित गिरावट | मुख्य कारण |
|---|---|---|
| भारतीय रुपया | 6%+ | डॉलर मजबूती, तेल आयात |
| जापानी येन | लगातार दबाव | लो इंटरेस्ट रेट |
| इंडोनेशियाई रुपिया | मध्यम गिरावट | विदेशी पूंजी निकासी |
| दक्षिण कोरियाई वॉन | दबाव में | टेक सेक्टर कमजोरी |
विशेषज्ञों का मानना है कि currency market में भारत का बढ़ता ट्रेड डेफिसिट और महंगे क्रूड ऑयल इम्पोर्ट रुपये पर अतिरिक्त दबाव बना रहे हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी रुपया कमजोर करने में भूमिका निभाई है।
Currency Market: येन में तेजी से ‘रेट हाइक’ की उम्मीदें बढ़ीं
जापानी येन में आई अचानक मजबूती के बाद बाजार में यह अटकलें भी तेज़ हो गई हैं कि बैंक ऑफ जापान भविष्य में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है।
जापान लंबे समय तक अल्ट्रा-लो इंटरेस्ट रेट पॉलिसी पर चलने वाला देश रहा है। लेकिन लगातार कमजोर होते येन और बढ़ती महंगाई ने केंद्रीय बैंक पर दबाव बढ़ा दिया है।
यदि जापान ब्याज दरें बढ़ाता है, तो इसका असर केवल एशिया ही नहीं बल्कि वैश्विक बॉन्ड और करेंसी बाजारों पर भी दिखाई दे सकता है। कई निवेशक जापानी यील्ड में बदलाव को वैश्विक लिक्विडिटी के लिए अहम संकेत मानते हैं।
डॉलर इंडेक्स बना सबसे बड़ा दबाव
विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने डॉलर इंडेक्स को ऊंचे स्तर पर बनाए रखा है। इसका सीधा असर एशियाई करेंसी पर पड़ रहा है।
जब डॉलर मजबूत होता है, तब उभरते बाजारों की करेंसी पर दबाव बढ़ जाता है क्योंकि आयात महंगे हो जाते हैं और विदेशी निवेशक सुरक्षित अमेरिकी बाजारों की ओर रुख करते हैं।
भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है क्योंकि उन्हें ऊर्जा और कमोडिटी आयात के लिए बड़े पैमाने पर डॉलर की जरूरत होती है।
आगे क्या रह सकता है बाजार का रुख?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि currency market में यदि डॉलर की मजबूती जारी रहती है, तो एशियाई सेंट्रल बैंकों को आगे भी सक्रिय हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।
हालांकि केवल हस्तक्षेप से लंबे समय तक करेंसी को स्थिर रखना आसान नहीं माना जाता। इसके लिए ब्याज दर नीति, विदेशी निवेश प्रवाह और वैश्विक आर्थिक माहौल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत के संदर्भ में, RBI के पास अभी पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जिससे वह अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित कर सकता है। लेकिन यदि कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो रुपये पर दबाव और तेज़ हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में एशियाई करेंसी बाजार (currency market) में अस्थिरता बनी रह सकती है और निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेड, बैंक ऑफ जापान और RBI की अगली नीतिगत चालों पर रहेगी।
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