[polylang_langswitcher]

भारत में सिल्वर इम्पोर्ट रिस्ट्रिक्शन का असर: घरेलू बाजार में बढ़ सकता है ‘इंडिया प्रीमियम’, ग्लोबल मार्केट पर भी दबाव

सिल्वर इम्पोर्ट

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): सिल्वर इम्पोर्ट – भारत दुनिया का सबसे बड़ा सिल्वर इम्पोर्टर माना जाता है। वर्ष 2022 में देश ने लगभग 9500 टन सिल्वर आयात किया था, जबकि 2023 में यह आंकड़ा करीब 3700 टन रहा। वैश्विक सिल्वर डिमांड में भारत की हिस्सेदारी 20-25% तक मानी जाती है। ऐसे में यदि भारत सरकार सिल्वर इम्पोर्ट पर किसी प्रकार का नियंत्रण लागू करती है, तो उसका सीधा असर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाती है, क्वांटिटी कोटा लागू करती है या केवल RBI-नॉमिनेटेड एजेंसियों को इम्पोर्ट की अनुमति देती है, तो भारत में सिल्वर की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में काफी ऊंचे स्तर पर ट्रेड कर सकती हैं।

घरेलू बाजार में बढ़ सकता है ‘India Premium’

भारत में सिल्वर की कीमतें मुख्य रूप से इंटरनेशनल रेट, इम्पोर्ट ड्यूटी, GST और लोकल प्रीमियम के आधार पर तय होती हैं। यदि सरकार ड्यूटी 10% से बढ़ाकर 15% करती है, तो इसका सीधा असर लैंडेड कॉस्ट पर पड़ेगा और MCX सिल्वर की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।

इसके अलावा, यदि क्वांटिटी रिस्ट्रिक्शन या कोटा सिस्टम लागू किया गया, तो बाजार में सप्लाई कम हो सकती है जबकि डिमांड बनी रहेगी। ऐसी स्थिति में फिजिकल सिल्वर MCX कीमत से 8-15% प्रीमियम पर बिक सकता है।

संभावित सरकारी कदमबाजार पर असरमुख्य कारण
इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ानाकीमतों में तेजीलैंडेड कॉस्ट बढ़ेगी
क्वांटिटी कोटालोकल प्रीमियम बढ़ेगासप्लाई घटेगी
TRQ/CEPA रूट बंदइंडस्ट्रियल कॉस्ट बढ़ेगीसस्ता इम्पोर्ट रुकेगा
केवल नॉमिनेटेड एजेंसी इम्पोर्टसप्लाई टाइट होगीबाजार में सीमित उपलब्धता

विशेषज्ञों के अनुसार, गोल्ड की तुलना में सिल्वर का “India Premium” ज्यादा बढ़ सकता है क्योंकि इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड काफी मजबूत और प्राइस-इनइलास्टिक है।


सिल्वर इम्पोर्ट

भारत के सिल्वर इम्पोर्ट पर सरकार की सख्ती से बाजार में हलचल

 

इंडस्ट्रियल सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव

भारत में लगभग 60% सिल्वर की खपत इंडस्ट्रियल सेक्टर में होती है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, EV और 5G उपकरणों में सिल्वर का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। यदि इम्पोर्ट महंगा होता है, तब भी कंपनियां उत्पादन बनाए रखने के लिए ऊंचे दाम पर सिल्वर खरीदने को मजबूर होंगी।

UAE के जरिए आने वाले कम ड्यूटी वाले सिल्वर पर रोक लगने से ज्वेलरी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की लागत बढ़ सकती है। इससे छोटे कारोबारियों और ज्वेलर्स पर अतिरिक्त दबाव बनने की आशंका है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार पर क्या होगा असर?

भारत यदि बड़े स्तर पर सिल्वर इम्पोर्ट कम करता है, तो ग्लोबल मार्केट में शुरुआती दबाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि LBMA और COMEX पर सिल्वर की कीमतों में 3-5% तक की गिरावट संभव है।

2023 में भारत का सिल्वर इम्पोर्ट करीब 60% गिरा था, जिसके बाद इंटरनेशनल सिल्वर प्राइस लगभग 22 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गई थी।

हालांकि, मिड-टर्म में सप्लाई दूसरे देशों की ओर शिफ्ट हो सकती है। चीन, थाईलैंड और टर्की जैसे बाजार अतिरिक्त सप्लाई को एब्जॉर्ब कर सकते हैं, लेकिन भारत जैसे बड़े खरीदार की भरपाई आसान नहीं मानी जाती।


स्मगलिंग और अनऑफिशियल ट्रेड बढ़ने का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार सिल्वर इम्पोर्ट पर बहुत सख्त नियंत्रण लागू करती है, तो गोल्ड की तरह सिल्वर में भी स्मगलिंग बढ़ सकती है। 2013-14 में गोल्ड इम्पोर्ट रिस्ट्रिक्शन के दौरान लोकल प्रीमियम 20% तक पहुंच गया था।

यदि केवल सरकारी एजेंसियों या PSU बैंकों को इम्पोर्ट की अनुमति दी जाती है, तो छोटे ज्वेलर्स और ट्रेडर्स को सप्लाई मिलने में दिक्कत हो सकती है। इससे हवाला और अनऑफिशियल चैनल सक्रिय हो सकते हैं।


रुपया कमजोर हुआ तो और बढ़ेंगी कीमतें

सिल्वर इम्पोर्ट महंगा होने का असर भारतीय रुपये पर भी पड़ सकता है। यदि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो MCX सिल्वर की कीमतें और तेजी से बढ़ सकती हैं। 2022 में भी डॉलर मजबूती और ऊंची इम्पोर्ट लागत के कारण घरेलू सिल्वर कीमतों में तेज उछाल देखा गया था।


सिल्वर इम्पोर्ट: आगे क्या हो सकता है?

विश्लेषकों का कहना है कि सरकार का उद्देश्य करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को नियंत्रित करना हो सकता है, लेकिन सिल्वर की प्रकृति गोल्ड से अलग है। सिल्वर का बड़ा हिस्सा इंडस्ट्रियल उपयोग में आता है, इसलिए लंबे समय तक सख्त प्रतिबंध बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

कमोडिटी बाजार में एक पुराना ट्रेडिंग सिद्धांत है — “Buy International Dip, Sell India Premium”। यानी भारत में रिस्ट्रिक्शन लगने पर इंटरनेशनल गिरावट में खरीदारी और घरेलू प्रीमियम पर मुनाफावसूली की रणनीति काम कर सकती है।

यदि आने वाले महीनों में चीन की डिमांड मजबूत रहती है, तो इंटरनेशनल बाजार शुरुआती गिरावट के बाद दोबारा रिकवर भी कर सकता है।

====

लेटेस्ट अपडेट्स के लिए ‘कृषि भूमि’ से जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45

ये भी पढ़ें…

ग्रामीण भारत में गहराया रोजगार संकट, अप्रैल 2026 में बेरोजगारी दर बढ़कर 5.2% पहुंची

पाम ऑयल आयात में उछाल से 13% बढ़ा भारत का खाद्य तेल आयात, महंगा हुआ आयात बिल

नए गन्ना नियंत्रण आदेश 2026 पर बढ़ा विवाद, किसान संगठनों ने बताया ‘कॉरपोरेट समर्थक’

साल 2026 में ‘सुपर अलनीनो’ का खतरा: रिकॉर्ड गर्मी और चरम मौसम की आशंका

शेयर :

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

ताज़ा न्यूज़

विज्ञापन

विशेष न्यूज़

Stay with us!

Subscribe to our newsletter and get notification to stay update.

राज्यों की सूची