अप्रैल में भारत का निर्यात मजबूत, लेकिन कृषि क्षेत्र ने बढ़ाई चिंता
नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): India Export Growth: वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत ने अप्रैल 2026 में निर्यात के मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन किया है। वित्त वर्ष 2026-27 के पहले महीने में भारत का कुल वस्तु और सेवा निर्यात 13.59 प्रतिशत बढ़कर 80.80 अरब डॉलर पहुंच गया। हालांकि इस सकारात्मक तस्वीर के बीच कृषि निर्यात में आई गिरावट ने नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में भारत का वस्तु निर्यात 43.56 अरब डॉलर और सेवा निर्यात 37.24 अरब डॉलर रहा। पिछले वर्ष इसी महीने कुल निर्यात 71.13 अरब डॉलर था।
कृषि निर्यात में गिरावट क्यों अहम?
कुल निर्यात में वृद्धि के बावजूद कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन कमजोर रहा। भारत के प्रमुख कृषि निर्यात उत्पादों में शामिल चावल, चाय, मसाले, तंबाकू, काजू और फल-सब्जियों के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई।
सबसे बड़ा असर चावल निर्यात पर दिखाई दिया। अप्रैल 2025 में जहां चावल निर्यात 108.15 करोड़ डॉलर था, वहीं अप्रैल 2026 में यह घटकर 101.49 करोड़ डॉलर रह गया। यह लगभग 6.16 प्रतिशत की गिरावट है।
| कृषि उत्पाद | गिरावट |
|---|---|
| चावल | 6.16% |
| चाय | 17.81% |
| तंबाकू | 40.38% |
| मसाले | 6.80% |
| काजू | 13.97% |
| फल-सब्जियां | 21.08% |
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक मांग में नरमी, शिपिंग लागत में बढ़ोतरी और कुछ बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण कृषि निर्यात पर दबाव बना हुआ है।
India Export Growth: किन उत्पादों ने दिखाई मजबूती?
हालांकि सभी कृषि उत्पादों में गिरावट नहीं रही। कुछ सेक्टरों में उल्लेखनीय वृद्धि भी दर्ज की गई। अन्य अनाजों के निर्यात में सबसे ज्यादा 210 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई। हालांकि इनका कुल निर्यात मूल्य अभी भी अपेक्षाकृत छोटा है। इसके अलावा कॉफी, मरीन उत्पाद और मीट-डेयरी-पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात में भी तेजी देखने को मिली।
| उत्पाद | वृद्धि |
|---|---|
| अन्य अनाज | 210.19% |
| कॉफी | 7.51% |
| मरीन उत्पाद | 14.74% |
| मीट, डेयरी व पोल्ट्री | 48.03% |
विश्लेषकों का कहना है कि प्रोसेस्ड फूड और वैल्यू-एडेड कृषि उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ने से कुछ श्रेणियों को फायदा मिला है।
आयात में भी बड़ा उछाल
अप्रैल 2026 में भारत का कुल आयात 88.61 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष के 82.29 अरब डॉलर की तुलना में काफी अधिक है। इसमें वस्तु आयात 71.94 अरब डॉलर और सेवा आयात 16.66 अरब डॉलर का रहा।
सबसे ज्यादा 18.62 अरब डॉलर का आयात कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का हुआ, हालांकि इसमें लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
दूसरी तरफ सोने और चांदी के आयात में तेज उछाल देखने को मिला।
| आयात उत्पाद | वृद्धि |
|---|---|
| सोना | 81% |
| चांदी | 157% |
| वनस्पति तेल | 39.86% |
| फल-सब्जियां | 45.59% |
सोने का आयात 3.09 अरब डॉलर से बढ़कर 5.62 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि चांदी का आयात 15.98 करोड़ डॉलर से बढ़कर 41.1 करोड़ डॉलर हो गया।
सरकार ने क्यों बढ़ाई इंपोर्ट ड्यूटी?
विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव और बढ़ते आयात बिल को देखते हुए केंद्र सरकार ने हाल ही में सोना और चांदी के आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया है।
India Export Growth: आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचे सोना आयात से चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार गैर-जरूरी आयात को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।
क्या कृषि क्षेत्र के लिए चेतावनी है ये आंकड़े?
India Export Growth: विशेषज्ञों का कहना है कि कुल निर्यात वृद्धि सकारात्मक संकेत है, लेकिन कृषि निर्यात में लगातार कमजोरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय हो सकती है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े कृषि निर्यातकों में शामिल है और चावल, मसाले तथा चाय जैसे उत्पाद वैश्विक बाजार में उसकी मजबूत पहचान रहे हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में गिरावट लंबे समय तक जारी रहने पर किसानों और कृषि आधारित उद्योगों पर असर पड़ सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार आने वाले महीनों में मानसून, वैश्विक मांग और लॉजिस्टिक्स लागत जैसे कारक तय करेंगे कि भारत का कृषि निर्यात दोबारा रफ्तार पकड़ पाएगा या नहीं।
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