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सोयाबीन किसानों में मचा हाहाकार: MSP से ₹2300 तक नीचे फिसला सोयाबीन का भाव

मुंबई, 25 नवम्बर, 2025 (कृषि भूमि ब्यूरो): देश में खरीफ की प्रमुख तिलहन फसल सोयाबीन के बाजार भाव में आई भारी गिरावट ने किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है। देश की कई प्रमुख मंडियों में सोयाबीन के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ₹1000 से लेकर ₹2300 प्रति क्विंटल तक नीचे गिर गए हैं। इस अप्रत्याशित गिरावट के कारण किसानों की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।

एमएसपी और बाज़ार भाव का बड़ा अंतर

केंद्र सरकार ने विपणन सत्र (Marketing Season) 2025-26 के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (₹5328 प्रति क्विंटल) घोषित किया है। इसके बावजूद, देश के सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की मंडियों में भाव इस एमएसपी से काफी नीचे चल रहे हैं।

  • मौजूदा औसत भाव: महाराष्ट्र की लातूर, अकोला और जलगांव जैसी बड़ी मंडियों में सोयाबीन की औसत कीमतें ₹4300 से ₹4550 प्रति क्विंटल के बीच दर्ज की गई हैं।

  • न्यूनतम भाव: कुछ स्थानों पर, विशेषकर नमी वाली फसल के लिए, न्यूनतम भाव ₹3000 से ₹3500 प्रति क्विंटल तक गिर गया है। चंद्रपुर मंडी में तो न्यूनतम भाव मात्र ₹1800 प्रति क्विंटल तक पहुँचने की खबरें भी सामने आई हैं।

किसानों का कहना है कि लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि बाज़ार भाव स्थिर रूप से गिर रहा है, जिससे उन्हें हर क्विंटल पर हज़ारों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

25 नवंबर 2025 के भाव:-

मंडीआवक (क्विंटल में)न्‍यूनतम कीमत (रु./क्विंटल)अध‍िकतम कीमत (रु./क्विंटल)औसत कीमत (रु./क्विंटल)
जलगांव117390045754550
नागपुर1408370044524264
लातूर23548375048314550
अकोला4004405050854455
सिंदखेड़ राजा587390045004300

24 नवंबर 2025 के भाव:- 

मंडीआवक (क्विंटल)न्‍यूनतम कीमत (रु./क्विंटल)    अध‍िकतम कीमत (रु./क्विंटल)    औसत कीमत (रु./क्विंटल)
येवला75370046004522
येवला-आंदरसूल7310046514000
लासलगांव1142300045704491
लासलगांव-विंचूर960300046404550
शहादा28366144764463
नांदेड़954364545254300
माजलगांव1588340045614400
चंद्रपुर75180043804020

भाव गिरने के पीछे मुख्य कारण

सोयाबीन के दाम में इतनी बड़ी गिरावट के पीछे कई घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कारण ज़िम्मेदार हैं:

1. अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार का दबाव

सोयाबीन के दाम गिरने का एक प्रमुख कारण वैश्विक बाजार है। लैटिन अमेरिकी देशों (ब्राजील और अर्जेंटीना) में इस साल सोयाबीन का बंपर उत्पादन हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में सस्ते सोयाबीन और सोया तेल की उपलब्धता के कारण भारतीय बाज़ार पर दबाव बढ़ गया है, जिससे घरेलू तेल मिलें भी कम कीमतों पर खरीद कर रही हैं।

2. घरेलू मांग में कमी और गुणवत्ता

  • कमज़ोर पेराई मांग: सोयाबीन में इस समय नमी की मात्रा ज़्यादा है, जिससे तेल मिलों (Oil Mills) की पेराई की मांग कमजोर बनी हुई है।

  • सस्ते आयात: केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए आयात शुल्क (Import Duty) कम कर दिया था। अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार से सस्ता तेल और खली लगातार भारत आ रहा है, जिसने घरेलू सोयाबीन के दामों को प्रभावित किया है।

  • सोया खली की कम मांग: सोयाबीन से तेल निकालने के बाद बनने वाली सोया खली (Soybean Meal) की मांग भी अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू पशुधन फ़ीड बाज़ार में कमज़ोर रही है, जिससे सोयाबीन के दाम गिरे हैं।

3. उत्पादन लागत में वृद्धि

किसानों की शिकायत है कि इस साल भारी बारिश, कीट प्रकोप और बीमारियों के कारण उन्हें दवाइयों, कीटनाशकों और श्रम पर ज़्यादा खर्च करना पड़ा है, जिससे उनकी उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है। ऐसे में एमएसपी से नीचे का दाम मिलना दोहरी मार जैसा है।

किसानों की मांग और सरकारी हस्तक्षेप

भावों में भारी गिरावट के चलते किसान संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की माँग की है।

  • खरीद गारंटी: किसानों की मांग है कि राज्य सरकारें मूल्य समर्थन योजना (Price Support Scheme – PSS) के तहत सोयाबीन की खरीद शुरू करें और यह सुनिश्चित करें कि किसानों को हर हाल में एमएसपी के बराबर दाम मिले।

  • भावांतर योजना: मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भावांतर योजना के तहत एमएसपी और मॉडल रेट के बीच का अंतर सरकार द्वारा दिया जाता है, लेकिन अन्य राज्यों के किसान भी ऐसी ही राहत योजनाओं की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल, किसान निराश होकर कम दाम पर अपनी उपज बेचने को मजबूर हैं या फिर अच्छे दाम की उम्मीद में माल को घरों में रोककर रख रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ती जा रही है।

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