नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): नेशनल कंज्यूमर कोऑपरेटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया (एनसीसीएफ) ने बिहार में पहली बार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत मसूर की संगठित खरीद शुरू कर एक अहम पहल की है। यह कदम न केवल किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि देश में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता को भी मजबूती देगा।
उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, बिहार के लिए MSP पर 32,000 मीट्रिक टन मसूर खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 22 अप्रैल 2026 तक इस अभियान के तहत 16 पैक्स (PACS) और एफपीओ पंजीकृत किए जा चुके हैं, जबकि 59 किसानों को सीधे खरीद प्रक्रिया से जोड़ा गया है। अब तक 100.4 मीट्रिक टन मसूर की खरीद MSP पर की जा चुकी है, जो इस नई व्यवस्था की शुरुआती प्रगति को दर्शाती है।
सहकारी नेटवर्क के जरिए बढ़ेगी खरीद
सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस अभियान को और विस्तार देने के लिए National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India (नाफेड) भी सक्रिय भूमिका निभाएगा। मूल्य समर्थन योजना (Price Support Scheme) के तहत नाफेड अपने सहकारी नेटवर्क के माध्यम से राज्य में खरीद को और गति देगा।
यह खरीद प्रक्रिया 31 मई 2026 तक जारी रहने वाली है, जिससे अधिक से अधिक किसानों को MSP का लाभ मिल सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।
दलहन आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
भारत लंबे समय से दालों की मांग को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर रहा है। ऐसे में बिहार जैसे राज्यों में संगठित खरीद की शुरुआत देश की खाद्य सुरक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है।
मंत्रालय का मानना है कि इस पहल से किसानों को मसूर की खेती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे उत्पादन में वृद्धि होगी और आयात पर निर्भरता घटेगी।
छत्तीसगढ़ में भी तेज हुआ MSP खरीद अभियान
छत्तीसगढ़ में PM-AASHA के तहत खरीद अभियान को और विस्तार दिया गया है। मंत्रालय के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ई-सम्युक्ति’ के जरिए किसानों की भागीदारी बढ़ाने और जागरूकता अभियानों से इस पहल को मजबूती मिली है।
वर्तमान में राज्य में 85 पैक्स केंद्रों का नेटवर्क सक्रिय है, जिनके माध्यम से धमतरी, दुर्ग, बालोद, बलौदाबाजार, रायपुर, रायगढ़ और सारंगढ़ जिलों में MSP पर खरीद जारी है। जल्द ही सरगुजा, कोंडागांव और कोरिया जिलों को भी इस नेटवर्क में शामिल किया जाएगा।
राज्य के लिए 63,325 मीट्रिक टन चना और 5,360 मीट्रिक टन मसूर खरीद का लक्ष्य तय किया गया है। 22 अप्रैल 2026 तक एनसीसीएफ द्वारा 9,032 मीट्रिक टन चना और 7.98 मीट्रिक टन मसूर खरीदी MSP पर की जा चुकी है। वहीं, नाफेड के माध्यम से 3,850 मीट्रिक टन चना और 109 मीट्रिक टन मसूर की खरीद दर्ज की गई है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ी पारदर्शिता
ई-सम्युक्ति पोर्टल के जरिए किसानों को पंजीकरण और खरीद प्रक्रिया में आसानी मिल रही है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने में भी मदद मिली है।
बिहार और छत्तीसगढ़ में शुरू हुई ये पहलें संकेत देती हैं कि सरकार दलहन उत्पादन और खरीद प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए गंभीर है। यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहता है, तो आने वाले वर्षों में भारत दालों के मामले में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर सकता है।
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