नई दिल्ली, 31 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): WTO MC14 ई-कॉमर्स मोरेटोरियम – कैमरून के याउंडे में 26–29 मार्च के बीच आयोजित विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization) की 14वीं मंत्रिस्तरीय बैठक (MC14) बिना किसी ठोस सहमति के समाप्त हो गई। यह सम्मेलन बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में बढ़ते मतभेदों को उजागर करने वाला साबित हुआ, जहां ई-कॉमर्स, कृषि, ढांचागत सुधार और मत्स्य सब्सिडी जैसे अहम मुद्दों पर सदस्य देश एकमत नहीं हो सके।
डब्ल्यूटीओ की महानिदेशक Ngozi Okonjo-Iweala ने स्वीकार किया कि सदस्य देश समझौते के काफी करीब पहुंच गए थे, लेकिन अंतिम सहमति नहीं बन पाई। उन्होंने कहा कि “याउंडे पैकेज” लगभग तैयार था, जिसे अब जिनेवा में आगे की वार्ताओं के आधार के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
ई-कॉमर्स मोरेटोरियम समाप्त, डिजिटल व्यापार में बड़ा बदलाव

MC14 का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक परिणाम 1998 से लागू ई-कॉमर्स मोरेटोरियम का समाप्त होना रहा। इस प्रावधान के तहत डिजिटल ट्रांसमिशन पर कस्टम ड्यूटी नहीं लगाई जाती थी।
अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान इसे स्थायी रूप से बढ़ाने के पक्ष में थे, लेकिन भारत और अन्य विकासशील देशों ने इसका विरोध किया। भारत का तर्क था कि इससे राजस्व हानि होती है और डिजिटल अर्थव्यवस्था में नीतिगत स्वतंत्रता सीमित होती है।
सहमति न बनने के कारण 26 वर्षों में पहली बार यह मोरेटोरियम समाप्त हो गया, जिससे अब देशों के लिए डिजिटल उत्पादों पर शुल्क लगाने का रास्ता खुल गया है। यह वैश्विक डिजिटल व्यापार के नियमों में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
TRIPS सुरक्षा प्रावधान खत्म, बढ़ेगा कानूनी जोखिम
ई-कॉमर्स मोरेटोरियम के समाप्त होने के साथ ही TRIPS समझौते के तहत “नॉन-वायलेशन” शिकायतों के खिलाफ सुरक्षा प्रावधान भी खत्म हो गया।
इसका प्रभाव विशेष रूप से विकासशील देशों पर पड़ेगा, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य और दवा नीति में लचीलापन बनाए रखने के लिए इन प्रावधानों पर निर्भर थे। भारत के लिए यह पेटेंट कानून, खासकर धारा 3(डी), से जुड़े विवादों के जोखिम को बढ़ा सकता है।
प्रमुख मुद्दों की स्थिति: एक नजर में
| मुद्दा | स्थिति | प्रभाव |
|---|---|---|
| ई-कॉमर्स मोरेटोरियम | समाप्त | डिजिटल व्यापार पर शुल्क संभव |
| TRIPS सेफगार्ड | समाप्त | कानूनी विवाद बढ़ने की आशंका |
| कृषि वार्ता | ठप | विकासशील देशों में असंतोष |
| WTO सुधार | सहमति नहीं | संस्थागत संकट जारी |
| फिशरीज सब्सिडी | आंशिक प्रगति | आगे की वार्ता जिनेवा में |
फिशरीज सब्सिडी पर भारत की सक्रिय भूमिका

भारत ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में फिशरीज सब्सिडी वार्ता में सक्रिय भूमिका निभाई। भारत ने स्पष्ट किया कि छोटे और पारंपरिक मछुआरे वैश्विक ओवरफिशिंग के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।
भारत ने विकासशील देशों के लिए 25 वर्ष की संक्रमण अवधि, विशेष एवं विभेदित उपचार (S&DT), और “प्रदूषक भुगतान सिद्धांत” को शामिल करने की मांग की। गोयल ने कहा कि भारत में प्रति मछुआरा परिवार सब्सिडी लगभग 15 डॉलर सालाना है, जो विकसित देशों की तुलना में बेहद कम है।
WTO सुधार और निवेश समझौते पर गतिरोध
डब्ल्यूटीओ सुधार के रोडमैप पर भी सहमति नहीं बन सकी। विकसित देश तेज और नियम-आधारित प्रणाली चाहते हैं, जबकि विकासशील देश सर्वसम्मति आधारित ढांचे और नीतिगत लचीलापन बनाए रखना चाहते हैं।
निवेश सुविधा समझौता (IFDA) पर भी भारत ने विरोध दर्ज किया। भारत का मानना है कि प्लुरिलैटरल समझौते WTO की बहुपक्षीय प्रकृति को कमजोर कर सकते हैं। इसके बावजूद 66 देशों ने WTO के बाहर ई-कॉमर्स समझौते को आगे बढ़ाया, जो वैश्विक व्यापार में नए शक्ति संतुलन का संकेत देता है।
कृषि गतिरोध बना सबसे बड़ी बाधा
कृषि मुद्दों पर लंबे समय से जारी गतिरोध ने पूरे सम्मेलन को प्रभावित किया। ब्राजील ने ई-कॉमर्स प्रगति को कृषि वार्ता से जोड़ दिया, जिससे समझौते की संभावनाएं लगभग खत्म हो गईं।
यह दर्शाता है कि पुराने विवाद अब नए क्षेत्रों में भी प्रगति को बाधित कर रहे हैं।
बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था पर सवाल
MC14 हाल के वर्षों की सबसे अनिर्णायक बैठकों में से एक रही। World Trade Organization के लिए यह केवल नए समझौतों में विफलता नहीं, बल्कि मौजूदा व्यवस्थाओं को बनाए रखने में भी असफलता का संकेत है।
ई-कॉमर्स और TRIPS जैसे महत्वपूर्ण प्रावधानों का समाप्त होना इस बात का संकेत है कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था एक नए संक्रमण काल में प्रवेश कर चुकी है। अब निगाहें जिनेवा में होने वाली अगली वार्ताओं पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि WTO अपने ढांचे को बचा पाता है या नहीं।
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