नई दिल्ली, 01 दिसंबर (कृषि भूमि ब्यूरो): रबी सीजन में गेहूं की बुआई इस साल रफ्तार पकड़ चुकी है। 21 नवंबर तक गेहूं की खेती 21% बढ़कर 128.37 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गई है। सामान्य क्षेत्र 312.35 लाख हेक्टेयर के एक-तिहाई से अधिक हिस्से पर गेहूं की बुआई पूरी हो चुकी है। बढ़ती बुआई और अनुमानित भारी पैदावार के बीच बाजार में कीमतों पर दबाव गहराता दिख रहा है। इस बार गेहूं की बुआई में रिकॉर्ड बढ़त और इंटरनेशनल मार्केट में कीमतों पर दबाव के चलते इस बार गेहूं में जोरदार उछाल की उम्मीद धुंधली दिखाई पड़ती है।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में गेहूं के दाम 1 महीने के निचले स्तर पर
वैश्विक बाजार में गेहूं की कीमतें कमजोर बनी हुई हैं। ग्लोबल प्राइसेज़ एक महीने के निचले स्तर पर आ चुकी हैं और 530 डॉलर प्रति बुशेल के नीचे कारोबार कर रही हैं। सप्लाई बढ़ने से बीते एक हफ्ते और एक महीने में कीमतें करीब 1 फीसदी गिरी हैं। जनवरी 2025 से अब तक गेहूं लगभग 5 फीसदी और एक साल में करीब 2 फीसदी लुढ़क चुका है। ट्रेडिंग पैटर्न साफ संकेत दे रहा है कि बाजार में ओवरसप्लाई का असर कीमतों पर लगातार बना हुआ है।
सरकारी पॉलिसी का असर अधिक
मिलर्स का कहना है कि इस समय गेहूं का बाजार सीजन के न्यूनतम स्तर पर चल रहा है और कीमतें दबाव में हैं। मौजूदा प्राइस ट्रेंड मांग-आपूर्ति के संतुलन से ज्यादा सरकारी नीति पर निर्भर है। इस साल बंपर पैदावार हुई है और अगले साल भी बड़े उत्पादन की उम्मीद है। सरकार ने OMSS के तहत जो टेंडर जारी किए हैं, उनका प्रभाव बाजार पर साफ दिख रहा है। पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि गेहूं में 3 से 4 फीसदी तक की तेजी आएगी, लेकिन OMSS स्टैंडर्ड आने के बाद यह संभावना लगभग खत्म हो गई है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार गेहूं की कीमतों का भविष्य पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार आगे कितनी मात्रा में स्टॉक बाजार में उतारती है। वर्तमान में फसल की उपलब्धता ज्यादा है और सरकार अपने पुराने स्टॉक्स खाली करने पर फोकस कर रही है ताकि आने वाले सीजन में नई खरीद के लिए जगह बन सके। इन परिस्थितियों में कीमतों में 10 से 50 रुपये तक की हल्की बढ़त संभव है, लेकिन उससे अधिक की तेजी की संभावना बेहद कम है।
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