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आंध्र प्रदेश (AP) सरकार ने यूरिया की खपत घटाने वाले किसानों को प्रति बोरी ₹800 प्रोत्साहन देने की घोषणा की

Andhar Padesh News

हैदराबाद, 17 सितंबर (कृषि भूमि ब्यूरो):

आंध्र प्रदेश (AP) के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को घोषणा की कि जो किसान अपनी यूरिया खपत में कमी करेंगे| उन्हें सरकार की ओर से प्रति बोरी ₹800 का प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह कदम किसानों को संतुलित और टिकाऊ उर्वरक उपयोग के लिए प्रेरित करने की दिशा में उठाया गया है।

प्रति बोरी ₹800 का प्रोत्साहन

अमरावती में आयोजित कलेक्टर्स’ कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यह सब्सिडी किसानों तक सीधे PM प्रणाम योजना के तहत पहुँचाई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में यूरिया की कोई कमी नहीं है, लेकिन इसकी आपूर्ति के लिए वैज्ञानिक योजना और प्रबंधन जरूरी है।

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब चालू खरीफ सीजन में यूरिया की भारी कमी के कारण कई जिलों में खेती प्रभावित हुई है। सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल किसानों को तात्कालिक राहत देगा, बल्कि उन्हें एकीकृत पोषक प्रबंधन (Integrated Nutrient Management) की ओर भी प्रेरित करेगा।

नायडू ने कहा कि हालांकि यूरिया लंबे समय से खेती में एक प्रमुख इनपुट रहा है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य और उत्पादकता पर नकारात्मक असर पड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो आंध्र प्रदेश भी पंजाब जैसे कैंसर प्रभावित राज्यों की श्रेणी में आ सकता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि चीन ने हाल ही में भारतीय मिर्च निर्यात को रासायनिक अवशेषों के कारण अस्वीकार कर दिया, और पंजाब में कैंसर के मामलों की दर बहुत अधिक है। आंध्र प्रदेश वर्तमान में कैंसर मामलों में देश में पांचवें स्थान पर है। “अत्यधिक रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक उपयोग के खतरों पर किसानों को जागरूक करने के लिए तुरंत अभियान चलाना जरूरी है,” उन्होंने कहा।

इस प्रोत्साहन योजना से किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों जैसे कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइज़र, बायोफर्टिलाइज़र और जैविक खाद अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। अधिकारियों ने कहा कि पात्रता, वितरण और निगरानी तंत्र को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे।

कृषि विशेषज्ञों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे “समयानुकूल कदम” बताया है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि वैकल्पिक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता रहे और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाए ताकि वे आसानी से बदलाव कर सकें।

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