राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले एवं विधिक माप विज्ञान मंत्री रिजवान अरशद ने 6 नवंबर को जांच रिपोर्ट जारी करते हुए केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा और अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल की बिक्री पर कार्रवाई की मांग की। हालांकि, 7 नवंबर को केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कर्नाटक के दावों को चुनौती देते हुए कहा कि निर्धारित मानकों के तहत जांचे गए नमूने E20 के अनुरूप हैं। इस तरह अब विवाद का केंद्र केवल पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा नहीं, बल्कि नमूने लेने और उनकी जांच करने की प्रक्रिया भी बन गई है।
14 में से 11 नमूनों में 20 फीसदी से अधिक एथेनॉल
कर्नाटक सरकार के अनुसार, लीगल मेट्रोलॉजी विभाग ने बेंगलुरु, कोलार, चिक्कबल्लापुर, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु से पेट्रोल के नमूने एकत्र किए थे। विभाग ने कुल 63 नमूने जुटाए थे, जबकि जारी रिपोर्ट में 14 नमूनों के एथेनॉल संबंधी नतीजे सामने रखे गए।
बेंगलुरु स्थित NABL से मान्यता प्राप्त और ISO प्रमाणित श्रीराम रिसर्च इंस्टीट्यूट में की गई जांच में 14 में से 11 नमूनों में एथेनॉल की मात्रा 20 फीसदी से अधिक पाई गई।
राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, IOCL के एक नमूने में 31.2 फीसदी, HPCL के नमूने में 30.5 फीसदी और HPCL के एक अन्य नमूने में 27 फीसदी एथेनॉल मिला। भारत पेट्रोलियम (BPCL) के एक नमूने में 26.5 फीसदी और नायरा के पेट्रोल में 26.1 फीसदी मात्रा दर्ज की गई। शेल के एक नमूने में यह 25.5 फीसदी रही।
BPCL के अन्य दो नमूनों में 24.2 और 22.6 फीसदी, HPCL में 22.4 फीसदी, IOCL में 20.8 फीसदी और नायरा में 20.6 फीसदी एथेनॉल पाया गया। वहीं, BPCL के एक नमूने में 19.9 फीसदी, MRPL में 19.2 फीसदी और शेल के एक नमूने में 13.5 फीसदी मात्रा दर्ज हुई।
केंद्र और तेल कंपनियों ने रिपोर्ट को चुनौती दी
कर्नाटक के आरोपों के बाद IOCL, BPCL और HPCL ने संयुक्त रूप से सफाई दी कि राज्य की ओर से जारी नतीजे निर्धारित वैधानिक और तकनीकी प्रक्रियाओं के अनुरूप की गई जांच पर आधारित नहीं हैं। कंपनियों का कहना है कि उनके यहां तैयार और आपूर्ति किया जा रहा E20 पेट्रोल भारतीय मानक IS 17021 के अनुरूप है।
7 नवंबर को केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी आधिकारिक बयान जारी किया। मंत्रालय के मुताबिक, देश के 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जांचे गए 893 नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप मिले हैं। इनमें कर्नाटक के 56 नमूने भी शामिल हैं। इन नमूनों में एथेनॉल की मात्रा 19 से 20 फीसदी के बीच रही और औसत 19.30 फीसदी दर्ज किया गया।
केंद्र और तेल कंपनियों ने कर्नाटक सरकार की अक्टूबर में की गई जांच की सैंपलिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नमूने लेते समय तेल कंपनी और पेट्रोल पंप प्रतिनिधियों की भागीदारी, नमूनों को सीलबंद करना, उनकी प्रतियां सुरक्षित रखना और अधिकृत प्रयोगशाला में जांच कराना जरूरी है। कंपनियों का आरोप है कि अक्टूबर की जांच में इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। उन्होंने संयुक्त रूप से नमूने लेकर स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की है।
वाहनों के माइलेज और मरम्मत खर्च पर चिंता
कर्नाटक सरकार ने अधिक एथेनॉल मिश्रण के संभावित प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई है। राज्य के लीगल मेट्रोलॉजी विभाग के अनुमान के मुताबिक, अधिक मिश्रण के कारण वाहनों का माइलेज घटने और ईंधन प्रणाली के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचने से उपभोक्ताओं पर सालाना करीब 1.01 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
इस अनुमान में करीब 62,000 करोड़ रुपये माइलेज में संभावित गिरावट से अतिरिक्त ईंधन खर्च और 39,000 करोड़ रुपये ईंधन फिल्टर, पंप, इंजेक्टर, पाइप तथा सील की मरम्मत से जुड़े संभावित खर्च के रूप में शामिल हैं। यह राज्य विभाग का अनुमान है, स्वतंत्र रूप से प्रमाणित वास्तविक नुकसान का आंकड़ा नहीं।
राज्य सरकार का कहना है कि देश के अधिकांश पुराने वाहन E20 से अधिक एथेनॉल मिश्रण के लिए प्रमाणित नहीं हैं। अप्रैल 2023 के बाद निर्मित वाहनों को भी E20 के अनुरूप ही तैयार किया गया है। हालांकि, अधिक एथेनॉल मिश्रण से वाहनों को होने वाले वास्तविक नुकसान का निर्धारण वाहन के मॉडल, ईंधन प्रणाली और तकनीकी अनुकूलता के आधार पर करना होगा।
उपभोक्ताओं के लिए मुआवजा और ईंधन विकल्प की मांग
कर्नाटक सरकार ने केंद्र के सामने कई प्रस्ताव रखे हैं। इनमें सभी पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत प्रदर्शित करना, उपभोक्ताओं को अलग-अलग मिश्रण वाले पेट्रोल का विकल्प देना और निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल मिलाने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है।
इसके अलावा राज्य ने E20 क्षतिपूर्ति कोष बनाने की मांग की है। प्रस्ताव के अनुसार, यदि किसी वाहन को अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल से नुकसान होता है और अधिकृत सर्विस सेंटर इसकी पुष्टि करता है, तो वाहन मालिक को समयबद्ध तरीके से मुआवजा दिया जाना चाहिए।
E20 नीति की निगरानी पर बढ़ेगी बहस
कर्नाटक सरकार ने मोटर स्पिरिट एवं हाई स्पीड डीजल (आपूर्ति एवं वितरण का विनियमन तथा कदाचार की रोकथाम) आदेश, 2005 के तहत पेट्रोल के नमूनों की जांच जारी रखने की बात कही है। इस आदेश के तहत अधिकृत अधिकारियों को ईंधन की गुणवत्ता और वितरण में अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है।
फिलहाल दोनों पक्षों के दावों में बड़ा अंतर है। एक तरफ कर्नाटक सरकार की जांच में 20 फीसदी से अधिक एथेनॉल मिलने की बात कही गई है, वहीं केंद्र और तेल कंपनियां निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुई जांच को मानकों के अनुरूप बता रही हैं। ऐसे में विवाद का निष्पक्ष समाधान संयुक्त सैंपलिंग और स्वतंत्र प्रयोगशाला जांच से ही संभव होगा। इसका नतीजा न केवल पेट्रोल की गुणवत्ता, बल्कि देश की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति पर उपभोक्ताओं के भरोसे के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगा।
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