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महाराष्ट्र: सूखा प्रभावित किसानों के साथ गांवों में दिवाली मनाएंगे फडणवीस और मंत्री, 7,500 करोड़ रुपये की राहत का ऐलान

मुंबई (कृषि भूमि ब्यूरो): महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति और किसानों की आर्थिक परेशानियों को देखते हुए राज्य सरकार ने दिवाली के मौके पर किसानों के बीच पहुंचने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को कहा कि राज्य के सभी मंत्री सूखा प्रभावित गांवों में जाकर किसानों और उनके परिवारों के साथ दिवाली मनाएंगे। इस पहल का उद्देश्य संकट से गुजर रहे किसान परिवारों का मनोबल बढ़ाना और उनकी समस्याओं को सीधे समझना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र के किसान इस समय कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। कम बारिश और फसल नुकसान ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे में दिवाली जैसे त्योहार पर किसान परिवारों को अकेला महसूस नहीं होना चाहिए। उन्होंने मंत्रियों से कम से कम एक दिन गांव में किसानों के साथ बिताने और उनसे बातचीत करने की अपील की है।

7,500 करोड़ रुपये की अग्रिम राहत मंजूर

किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने 7,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके तहत करीब 1.50 करोड़ पात्र किसानों को 5,000 रुपये की अग्रिम सूखा राहत देने का फैसला किया गया है।

राज्य मंत्रिमंडल ने 27 अक्टूबर को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जानी है। सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि किसानों को विस्तृत फसल नुकसान आकलन और मुआवजे की अंतिम प्रक्रिया पूरी होने से पहले कुछ आर्थिक सहायता मिल सके।

इस सहायता के लिए 304 सूखा प्रभावित तालुकों में उन किसानों को पात्र माना गया है, जिनकी फसल को 33 फीसदी से अधिक नुकसान हुआ है। यह राशि अंतिम फसल नुकसान मुआवजे के अतिरिक्त अग्रिम सहायता के रूप में दी जा रही है।

73 लाख किसानों के खातों में पहुंची राशि

मुख्यमंत्री फडणवीस ने 4 नवंबर को जानकारी दी थी कि 73 लाख किसानों के बैंक खातों में 5,000 रुपये की सहायता पहुंचाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि अगले दो दिनों में करीब 95 फीसदी पात्र किसानों तक राशि पहुंचाने का लक्ष्य है।

कुछ किसानों के भुगतान में बैंक खातों से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण देरी हुई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए। इसके साथ ही बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि राहत राशि से किसी तरह की कटौती नहीं की जाए और किसानों को पूरी रकम मिले।

गांवों में जाकर किसानों की समस्याएं सुनेंगे मंत्री

सरकार की इस पहल के तहत मंत्रियों को अलग-अलग जिलों के गांवों में जाकर किसानों के साथ दिवाली मनाने और उनकी समस्याएं सुनने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सूखे का तत्काल समाधान संभव नहीं है, लेकिन सरकार प्रभावित किसानों को हरसंभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री स्वयं नागपुर जिले के नरखेड़ तालुका के लोहारी सावंगा गांव में किसानों के साथ दिवाली मनाने जा रहे हैं। यहां वे किसान परिवारों के साथ समय बिताएंगे और खेती, सिंचाई, पानी की उपलब्धता तथा फसल बीमा जैसे मुद्दों पर बातचीत करेंगे।

इस पहल के तहत राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले अमरावती जिले में, कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा मुंबई की आरे कॉलोनी के आदिवासी पाड़ा में और अन्य मंत्री भी अलग-अलग जिलों में किसानों तथा ग्रामीण परिवारों के बीच पहुंचेंगे।

सूखे की व्यापकता से बढ़ी किसानों की चिंता

महाराष्ट्र के बड़े हिस्से में कम बारिश और लंबे शुष्क दौर के कारण खेती प्रभावित हुई है। राज्य के 358 तालुकों में से 305 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसका असर खरीफ फसलों, पशुपालन और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता पर भी पड़ा है।

विशेषकर मराठवाड़ा और विदर्भ के कई क्षेत्रों में किसानों को फसल नुकसान तथा सिंचाई के लिए पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में किसानों की मांग केवल तत्काल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। उन्हें फसल नुकसान का उचित मुआवजा, सिंचाई की व्यवस्था, फसल बीमा भुगतान और कृषि ऋण से राहत की भी जरूरत है।

राहत राशि के साथ स्थायी समाधान की चुनौती

सरकार की ओर से 7,500 करोड़ रुपये की अग्रिम सहायता किसानों को तत्काल राहत देने की कोशिश है। हालांकि, 5,000 रुपये की यह राशि किसानों के पूरे नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती। सूखे की वास्तविक स्थिति और फसल नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद अतिरिक्त मुआवजे की तस्वीर स्पष्ट होगी।

दिवाली पर मंत्रियों का गांवों में पहुंचना किसानों से सीधा संवाद स्थापित करने का अवसर भी है। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि इन मुलाकातों में सामने आने वाली समस्याओं पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और किसानों को आर्थिक सहायता के साथ पानी, बीमा तथा कृषि उत्पादन से जुड़ी दीर्घकालिक राहत कितनी मिल पाती है।

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