नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Sugar Prices: भारत में त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले चीनी की कीमतों में तेजी ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। जुलाई में चीनी की कीमत मासिक आधार पर 2.73% बढ़ी, जो जून के 0.63% और मई के 0.44% से काफी अधिक है। इसी दौरान गुड़ और तैयार मिठाइयों की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हुई।
बाजार में तेजी का असर अगस्त में और साफ दिखाई दिया। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 30 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत ₹64.24 प्रति किलो थी। यह एक सप्ताह पहले के ₹63.12 से 1.77% अधिक थी और एक महीने पहले की तुलना में करीब 30% ज्यादा थी।
जुलाई में चीनी महंगाई ने पकड़ी रफ्तार
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी साल के शुरुआती महीनों से ही धीरे-धीरे तेज हो रही थी। जुलाई में मासिक महंगाई 2.73% तक पहुंच गई, जबकि अप्रैल में यह केवल 0.09%, मई में 0.44% और जून में 0.63% थी।
सालाना आधार पर भी दबाव बढ़ा है। जुलाई में चीनी की कीमत एक साल पहले की तुलना में 4.92% अधिक रही, जबकि जून में यह वृद्धि 2.17% थी। यानी चीनी की कीमतों में तेजी अब केवल एक महीने का मामला नहीं रह गई है।
Sugar Prices: ₹60 के पार पहुंची खुदरा कीमत
जुलाई में करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास रहने वाली चीनी की खुदरा कीमत अगस्त में कई बाजारों में ₹60 के पार चली गई। 30 अगस्त को दिल्ली में चीनी करीब ₹62, मुंबई में ₹66, चेन्नई में ₹63 और रांची में ₹68 प्रति किलो दर्ज की गई।
हालांकि, सितंबर की शुरुआत में कुछ राहत के संकेत भी मिले हैं। ताजा बाजार रिपोर्टों के मुताबिक खुदरा कीमतों में मामूली गिरावट आई है और मुंबई जैसे बाजारों में ₹5-10 प्रति किलो तक कमी देखी गई है। फिर भी कीमतें सामान्य स्तर से काफी ऊपर बनी हुई हैं।
गुड़ और मिठाइयों पर भी महंगाई का असर
चीनी महंगी होने का असर इसके विकल्प और इससे जुड़े खाद्य उत्पादों पर भी दिखाई दे रहा है। जुलाई में गुड़ की कीमत महीने-दर-महीने 1.76% बढ़ी। मई और जून में भी इसमें करीब 1% की वृद्धि हुई थी।
सालाना आधार पर जुलाई में गुड़ की महंगाई 6.28% पहुंच गई, जबकि जून में यह 5.31% थी।
तैयार गैर-दूध वाली मिठाइयों की कीमतों में भी जुलाई में 0.63% की मासिक वृद्धि हुई। इससे पहले जून में 0.82% और मई में 0.70% की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। जुलाई में इन मिठाइयों की सालाना महंगाई 6.08% रही, जो सात महीनों का उच्च स्तर था।
त्योहारों में बढ़ती मांग से कितना बढ़ेगा दबाव?
भारत में नवरात्रि, दशहरा और दिवाली के दौरान चीनी, गुड़ और मिठाइयों की मांग आम तौर पर बढ़ती है। ऐसे में मौजूदा कीमतों पर मांग का अतिरिक्त दबाव बाजार के लिए चुनौती बन सकता है।
हालांकि, पिछले 10 त्योहारों के सीजन के आंकड़े एक महत्वपूर्ण तस्वीर दिखाते हैं। Moneycontrol के विश्लेषण के अनुसार, केवल 2016, 2021 और 2022 में त्योहारों के दौरान चीनी महंगाई पिछले तीन महीनों की तुलना में बढ़ी थी। बाकी सात वर्षों में इसमें कमी आई थी।
इस बार स्थिति इसलिए अलग है क्योंकि त्योहारों की मांग शुरू होने से पहले ही कीमतें तेज गति से बढ़ चुकी हैं।
Sugar Prices: सरकार ने उठाए कई कदम
कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने चीनी के आयात की अनुमति देने, स्टॉक रखने की सीमा सख्त करने और घरेलू उपलब्धता बढ़ाने जैसे कदम उठाए हैं। सरकार ने अगस्त में कहा था कि 20 जुलाई से 20 अगस्त के बीच चीनी की कीमत ₹48.18 से बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो हो गई थी। सरकार ने कीमतों में तेजी के लिए कम घरेलू उत्पादन, फसल को मौसम से नुकसान, त्योहारों से पहले बढ़ती मांग और कुछ हिस्सों में जमाखोरी-सट्टेबाजी को जिम्मेदार बताया था।
सितंबर में सरकार ने डीलरों की चीनी स्टॉक-होल्डिंग सीमा को भी घटाकर 2,000 क्विंटल कर दिया है। यह कदम त्योहारों के दौरान जमाखोरी रोकने और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
आगे राहत मिलेगी या महंगाई बढ़ेगी?
फिलहाल संकेत मिले-जुले हैं। एक तरफ सरकार के आयात और स्टॉक नियंत्रण जैसे उपायों के बाद खुदरा कीमतों में शुरुआती नरमी दिखाई दे रही है। दूसरी तरफ त्योहारों की मांग और उत्पादन से जुड़ी चिंताएं बनी हुई हैं।
ऐसे में आने वाले हफ्तों में चीनी की कीमतों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि आपूर्ति कितनी बढ़ती है, आयात का असर बाजार तक कितनी तेजी से पहुंचता है और त्योहारों में मांग किस स्तर तक जाती है। उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की उम्मीद तो बनी है, लेकिन चीनी, गुड़ और मिठाइयों के बजट पर दबाव पूरी तरह खत्म होता नजर नहीं आ रहा।
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