[polylang_langswitcher]

Sugar Prices: क्या इथेनॉल की वजह से महंगी हुई चीनी? विशेषज्ञों ने बताया असली कारण

चीनी की कीमतों के बीच गन्ने का खेत और चीनी मिल में गन्ने की पेराई

Sugar Prices: चीनी के दाम ₹80 किलो के करीब, इथेनॉल पर उठे सवाल

न्यूज़ पॉइंट्स

  • महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में खुली चीनी का खुदरा भाव ₹75-80 प्रति किलो तक पहुंच गया है।
  • विशेषज्ञों ने मौजूदा तेजी के लिए इथेनॉल उत्पादन को मुख्य वजह मानने से इनकार किया है।
  • 2022-23 से 2024-25 के बीच देश में गन्ने का रकबा 58.85 लाख हेक्टेयर से घटकर करीब 54.50 लाख हेक्टेयर रह गया।
  • महाराष्ट्र में गन्ने की पेराई का औसत सीजन करीब 150 दिन से घटकर लगभग 100 दिन रह गया है।
  • व्यापारियों द्वारा भविष्य में कमी की आशंका में स्टॉक जमा करने से बाजार में उपलब्ध चीनी पर दबाव बढ़ा है।

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Sugar Prices: देश के कई हिस्सों में चीनी की कीमतों में तेज उछाल ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में खुली चीनी का भाव ₹75 से ₹80 प्रति किलो तक पहुंच गया है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण की नीति के कारण चीनी की उपलब्धता कम हुई है?

ताजा रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने इस धारणा को खारिज किया है। उनके मुताबिक कीमतों में तेजी के पीछे एक नहीं, बल्कि कम गन्ना उत्पादन, चीनी उत्पादन में कमी, व्यापारियों की स्टॉकिंग और बाजार में उपलब्धता पर दबाव जैसे कई कारण हैं।

घटा गन्ने की खेती का रकबा

पूर्व महाराष्ट्र चीनी आयुक्त शेखर गायकवाड़ के मुताबिक देश में गन्ने का उत्पादन और प्रति हेक्टेयर उपज दोनों प्रभावित हुए हैं। इसका सीधा असर चीनी उत्पादन पर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार गन्ने का उत्पादन बढ़ाने के लिए नई नीति लागू करती है, तो उसका असर तुरंत नहीं दिखेगा और परिणाम आने में लगभग 30 से 36 महीने लग सकते हैं।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2022-23 में देश में गन्ने का रकबा 58.85 लाख हेक्टेयर था, जो 2024-25 में घटकर करीब 54.50 लाख हेक्टेयर रह गया। हालांकि 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 56.93 लाख हेक्टेयर पहुंचा है, जिससे आगे उत्पादन में सुधार की उम्मीद बनती है।

महाराष्ट्र में पेराई सीजन भी छोटा हुआ

महाराष्ट्र देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में है, लेकिन यहां भी मिलों की पेराई अवधि में कमी आई है। पूर्व नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज के अध्यक्ष जयप्रकाश दांडेगांवकर के अनुसार, जिन मिलों में पहले करीब 150 दिनों तक गन्ने की पेराई होती थी, वहां अब यह अवधि लगभग 100 दिन रह गई है।

उनके मुताबिक मिलों की लागत और किसानों को दिए जाने वाले गन्ने के मूल्य के बीच अंतर भी उद्योग पर दबाव डाल रहा है। उन्होंने ₹3,650 प्रति टन FRP और चीनी के ₹3,100 प्रति क्विंटल MSP का उल्लेख किया।

Sugar Prices
Sugar Prices: क्या इथेनॉल की वजह से महंगी हुई चीनी?

Sugar Prices: क्या इथेनॉल चीनी महंगी होने की वजह है?

वेस्ट इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (WISMA) के अध्यक्ष भैरवनाथ थोंबरे ने कहा है कि Sugar Prices में मौजूदा तेजी के लिए इथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। उनके अनुसार 2020 में इथेनॉल उत्पादन में चीनी डायवर्जन की हिस्सेदारी करीब 100 फीसदी थी, जो अब लगभग 30 फीसदी रह गई है, जबकि खाद्यान्न आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ी है।

सरकार के आंकड़े भी बताते हैं कि इथेनॉल उत्पादन केवल गन्ने या चीनी पर निर्भर नहीं है। इथेनॉल के लिए शीरे के साथ खाद्यान्न का भी इस्तेमाल होता है। सरकार ने अतिरिक्त गन्ने और चीनी को इथेनॉल की ओर मोड़ने की नीति को मुख्यतः अधिशेष उत्पादन की स्थिति में मिलों की वित्तीय स्थिति सुधारने और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के उपाय के रूप में बताया है।

जमाखोरी ने बढ़ाया बाजार का दबाव

विशेषज्ञों के मुताबिक चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी का एक अहम कारण व्यापारियों की स्टॉकिंग भी है। भैरवनाथ थोंबरे के अनुसार, अल नीनो के संभावित प्रभाव से भविष्य में गन्ने और चीनी उत्पादन में कमी की आशंका के चलते व्यापारियों ने बड़ी मात्रा में चीनी खरीदकर स्टॉक कर ली। इससे बाजार में तत्काल उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बढ़ा।

सरकार ने भी कीमतों पर नियंत्रण के लिए स्टॉक होल्डिंग से जुड़े कदम उठाए हैं। 21 अगस्त की सरकारी ब्रीफिंग के अनुसार राज्यों को जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है। सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी आयात की अनुमति देने और डीलरों व कुछ थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा लागू करने जैसे कदम भी बताए हैं।

आगे कब राहत मिल सकती है?

विशेषज्ञों के मुताबिक नई पेराई शुरू होने के बाद बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ सकती है। थोंबरे ने कहा कि पेराई सीजन शुरू होने पर चीनी मिलों से हर महीने करीब 15-20 लाख टन चीनी बाजार में आने की उम्मीद है। इससे आपूर्ति का दबाव कम होने पर कीमतों में नरमी आ सकती है।

कुल मिलाकर, उपलब्ध विशेषज्ञ राय और सरकारी कदमों को देखें तो चीनी की मौजूदा महंगाई को केवल इथेनॉल नीति से जोड़ना सही तस्वीर नहीं देता। कम गन्ना उत्पादन, घटता उपलब्ध स्टॉक, व्यापारियों की स्टॉकिंग और मिलों की बढ़ती लागत—इन सभी ने मिलकर कीमतों पर दबाव बनाया है। आने वाले महीनों में नई फसल, पेराई की रफ्तार और सरकार की स्टॉक-नियंत्रण नीतियां यह तय करेंगी कि चीनी के दाम ₹80 के आसपास टिकते हैं या इनमें राहत मिलती है।

=====
लेटेस्ट अपडेट्स के लिए ‘कृषि भूमि’ के व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़ें

इन ख़बरों को भी पढ़ें…

Sugar Crisis: नेपाल में चीनी के लिए हाहाकार! 120 रुपये किलो पहुंची कीमत, भारत से मंगाने की तैयारी

यूरिया की कीमतों में बड़ी राहत; किसानों को मिल सकती है राहत

Sugar Price: चीनी मिलों पर कृत्रिम कमी पैदा करने का आरोप

Rice Trade: चीन ने 7 भारतीय चावल निर्यातकों का रजिस्ट्रेशन किया रद्द

मध्य प्रदेश के किसानों ने खत्म किया आंदोलन, राज्य सरकार ने मानी मांगें

खाद संकट से बचने के लिए संसदीय समिति ने सरकार को दी सलाह

शेयर :

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

ताज़ा न्यूज़

विज्ञापन

विशेष न्यूज़

Stay with us!

Subscribe to our newsletter and get notification to stay update.

राज्यों की सूची