नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): कमजोर मानसून – संभावित अल नीनो (El Niño) और कमजोर मानसून के खतरे को भांपते हुए केंद्र सरकार दालों की उपलब्धता और कीमतों को लेकर पूरी तरह सतर्क हो गई है। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के विभाग ने मौजूदा परिस्थितियों (कमजोर मानसून) को देखते हुए देश में दालों का पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखने की सख्त आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि आने वाले महीनों में आपूर्ति में किसी भी संभावित कमी से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
नियमों में छूट और स्टॉक बचाने की रणनीति
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे द्वारा कृषि सचिव अतीश चन्द्रा को हाल ही में एक पत्र भेजा गया है। इस पत्र में अनुरोध किया गया है कि कृषि मंत्रालय, मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत दालों को नौ महीने के भीतर बाजार में रिलीज करने के मौजूदा मानक में छूट देने पर विचार करे। इसका मुख्य उद्देश्य निकट कमजोर मानसून के चलते भविष्य में संभावित कमी को देखते हुए दालों के बहुमूल्य स्टॉक को बचाकर रखना है।
विशेष रूप से खरीफ 2025-26 की अरहर (तूर) तथा रबी 2026 के चने के स्टॉक को नौ महीने से अधिक समय तक सुरक्षित रखने का सुझाव दिया गया है। ऐसा करने से राष्ट्रीय सहकारी विपणन संघ (NAFED) और राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (NCCF) के पास दालों का मजबूत भंडार उपलब्ध रहेगा। इससे न सिर्फ प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों से निपटने में मदद मिलेगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर उपभोक्ताओं को किफायती दरों पर दालें मुहैया कराई जा सकेंगी।
ओपन मार्केट सेल और PSS पर पुनर्विचार
पत्र के मुताबिक, मौजूदा हालात को देखते हुए ओपन मार्केट सेल (OMS) के माध्यम से दालों की बिक्री और प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत खरीद से जुड़े नीतिगत निर्णयों पर भी पुनर्विचार करना पड़ सकता है। मौसम की अनिश्चितता को ध्यान में रखते हुए उपभोक्ता मामलों के विभाग ने पहले ही 3 लाख टन अरहर (तूर), 5 लाख टन चना और 50 हजार टन उड़द— जिनका कुल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लगभग 5,882.50 करोड़ रुपये है— को PSS से प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड (PSF) के बफर स्टॉक में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
| दलहन का प्रकार | स्थानांतरित मात्रा (टन में) | न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP मूल्य) |
| अरहर (तूर) | 3 लाख टन | – |
| चना | 5 लाख टन | कुल एमएसपी: 5,882.50 करोड़ रुपये |
| उड़द | 0.50 लाख टन | – |
कमजोर मानसून: दलहन बुआई में गिरावट और मौसम का असर
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 17 जुलाई 2026 तक देश में दलहन की कुल बुआई पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। इस साल केवल 69.2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही दलहन की बुआई हो सकी है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 81.52 लाख हेक्टेयर था।
कमजोर मानसून: जून महीने के दौरान मध्य भारत सहित देश के कई अन्य हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण खरीफ की शुरुआती बुआई बुरी तरह प्रभावित हुई। इसके अलावा, सितंबर महीने में अल नीनो के और अधिक मजबूत होने की आशंका जताई जा रही है, जिसका सीधा असर खरीफ के साथ-साथ आगामी रबी फसलों के उत्पादन पर भी पड़ सकता है।

विशेषज्ञों की राय और भविष्य की चुनौती
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो वाले वर्ष से भी बड़ी और गंभीर चुनौती उसके अगले वर्ष सामने आती है। यदि किसी वर्ष उत्पादन कमजोर रहता है और उसी दौरान पूरा बफर स्टॉक बाजार में खुले तौर पर जारी कर दिया जाए, तो अगले वर्ष देश में गंभीर आपूर्ति संकट खड़ा हो सकता है।
इसी बड़ी दूरदर्शिता के चलते सरकार फिलहाल चालू वर्ष में कुछ हद तक मूल्य दबाव और कीमतों में मामूली बढ़ोतरी स्वीकार करने के लिए तैयार दिखती है। सरकार का मुख्य लक्ष्य आने वाले लंबे समय तक देश में दालों की निर्बाध उपलब्धता और मूल्य स्थिरता को हर हाल में सुनिश्चित करना है।
=====
इन ख़बरों को भी पढ़ें…
भारत का इलायची निर्यात तीन गुना बढ़कर 43.68 करोड़ डॉलर
कमजोर मानसून से खरीफ बुवाई को झटका, रकबा 21% घटा; तिलहन और कपास में बड़ी गिरावट
प्याज बफर स्टॉक खरीद को रफ्तार देने के लिए केंद्र ने बढ़ाई खरीद कीमत
किसानों से महंगा धान, इथेनॉल कंपनियों को सस्ता चावल! सरकार की OMSS नीति पर बड़े सवाल
प्याज किसानों को राहत; केंद्र ने बढ़ाया न्यूनतम खरीद मूल्य, 16.50 रुपये किलो पर होगी खरीद