नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): भविष्य की कृषि: AgriBio 2.0 का रोडमैप – भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने के लिए नीति आयोग ने अपनी हालिया रिपोर्ट, ‘रोडमैप फॉर बिल्डिंग इंडिया एज ए लीडिंग बायोइकोनॉमी पावरहाउस बाइ 2035’ में ‘AgriBio 2.0’ मिशन की रूपरेखा पेश की है। यह मिशन न केवल फसल उत्पादन बढ़ाने पर केंद्रित है, बल्कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम करने का एक व्यापक समाधान है।
AgriBio 2.0 मिशन का मुख्य उद्देश्य
यह मिशन जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और कृषि मंत्रालय के समन्वय से संचालित होगा। इसका मुख्य उद्देश्य मौजूदा सरकारी कृषि योजनाओं (जैसे NMSA, PKVY, सॉयल हेल्थ कार्ड) को एक साझा मंच पर लाकर प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक को तेजी से खेतों तक पहुंचाना है।
प्रमुख तकनीकी स्तंभ
AgriBio 2.0 में आधुनिक विज्ञान का उपयोग करते हुए निम्नलिखित तीन मुख्य क्षेत्रों पर जोर दिया गया है:
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जीन एडिटिंग: CRISPR आधारित तकनीक और मॉलिक्यूलर ब्रीडिंग के जरिए ऐसी फसलें विकसित करना जो सूखे, भीषण गर्मी और लवणता के प्रति सहनशील हों।
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जैविक इनपुट्स: रासायनिक उर्वरकों की जगह उच्च गुणवत्ता वाले बायोफर्टिलाइजर, बायोपेस्टीसाइड और माइक्रोबियल कंसोर्टिया का बड़े पैमाने पर उपयोग।
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फील्ड ट्रायल और सत्यापन: बायोटेक किसान हब और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के जरिए नई किस्मों का किसानों के बीच सफल प्रदर्शन।

बायोइकोनॉमी के आर्थिक आंकड़े (2035 का लक्ष्य)
| लक्ष्य वर्ष | बायोइकोनॉमी का मूल्य (अनुमानित) | प्रमुख लक्ष्य |
| 2025 | 195.3 अरब डॉलर | वर्तमान आधार |
| 2035 | 691 अरब डॉलर | जलवायु अनुकूल कृषि और उच्च रोजगार |
| 2047 | 2.6 ट्रिलियन डॉलर | वैश्विक नेतृत्व (विकसित भारत) |
रोजगार और क्लस्टर विकास
नीति आयोग ने देश भर में ‘बायोइनपुट प्रोडक्शन एंड इनोवेशन क्लस्टर्स’ स्थापित करने की सिफारिश की है। ये केंद्र ग्रामीण जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देंगे, जहाँ बायोस्टिमुलेंट और सीड कोटिंग्स का निर्माण होगा। इन क्लस्टर्स का उद्देश्य न केवल पर्यावरण को बचाना है, बल्कि 2035 तक 3 करोड़ से अधिक उच्च कौशल वाले रोजगारों का सृजन करना भी है।
पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए प्रतिबद्धता
AgriBio 2.0 का दृष्टिकोण केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। यह मिशन मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारने और रासायनिक अवशेषों को कम करके मानव, पशु और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है। पीएम प्रणाम योजना और आत्मनिर्भर क्लीन प्लांट पहल के साथ इसे एकीकृत करके कृषि क्षेत्र में एक स्थायी ‘सस्टेनेबल’ मॉडल तैयार किया जाएगा।
कुलमिलाकर, नीति आयोग का प्रस्तावित AgriBio 2.0 मिशन भारत को वैश्विक कृषि जैव प्रौद्योगिकी के मानचित्र पर शीर्ष पर ले जाने की क्षमता रखता है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो यह आने वाले दशकों में न केवल भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि लाखों किसानों की आय में वृद्धि और पर्यावरण की रक्षा का भी आधार बनेगा।
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