नई दिल्ली ( कृषि भूमि ब्यूरो): भारत-जापान की बड़ी पहल: भारत और जापान ने स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण विकास और टिकाऊ कृषि को नई गति देने के उद्देश्य से देशभर में 1,000 कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और जैविक उर्वरक संयंत्र स्थापित करने की महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है। “भारत-जापान कोऑपरेटिव बायोगैस फॉर ग्रोथ (CBG) इनिशिएटिव” के तहत शुरू की गई यह परियोजना दोनों देशों के रणनीतिक सहयोग को ऊर्जा परिवर्तन और कृषि क्षेत्र तक विस्तारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यह पहल जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की भारत यात्रा के दौरान घोषित 16 प्रमुख द्विपक्षीय परिणामों में शामिल रही। इसका उद्देश्य देशभर में फैले डेयरी सहकारी समितियों के व्यापक नेटवर्क का उपयोग करते हुए बायोगैस उत्पादन, जैविक उर्वरकों के उपयोग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।
डेयरी नेटवर्क के जरिए विकसित होगा स्वच्छ ऊर्जा मॉडल
इस कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित संयंत्रों में गोबर, कृषि अवशेषों और अन्य जैविक अपशिष्टों से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) तथा जैविक खाद का उत्पादन किया जाएगा। इससे न केवल जैविक कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन संभव होगा, बल्कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और सर्कुलर कृषि व्यवस्था को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।
सरकार का मानना है कि डेयरी सहकारी समितियों को नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का विकेंद्रीकृत मॉडल विकसित किया जा सकेगा। इससे स्थानीय स्तर पर ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ ग्रामीण समुदायों की भागीदारी भी सुनिश्चित होगी।
ऊर्जा सुरक्षा पर भारत-जापान का साझा फोकस
संयुक्त प्रेस वक्तव्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भारत-जापान आर्थिक सुरक्षा तथा ऊर्जा सुरक्षा के महत्व को पूरी तरह समझते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा पर संयुक्त रोडमैप अपनाया है, जिसके माध्यम से सेमीकंडक्टर, क्वांटम प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को और मजबूत बनाया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-जापान बायोगैस पहल के तहत स्थापित होने वाले 1,000 संयंत्र केंद्र सरकार की गोबरधन (GOBARdhan) पहल को भी नई मजबूती प्रदान करेंगे। यह कार्यक्रम स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाएगा।
भारत-जापान की पहल: किसानों और ग्रामीण समुदायों को होंगे कई लाभ
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ डेयरी किसानों और ग्रामीण समुदायों को मिलने की उम्मीद है। कृषि एवं पशुधन से निकलने वाले अपशिष्ट का मूल्य संवर्धन होने से किसानों के लिए अतिरिक्त आय के नए स्रोत विकसित होंगे।
साथ ही, संयंत्रों से तैयार होने वाले जैविक उर्वरकों के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी। इससे मिट्टी की उर्वरता में सुधार होगा, उत्पादन प्रणाली अधिक टिकाऊ बनेगी और पर्यावरणीय संतुलन को भी मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से इस मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है तो यह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, अपशिष्ट प्रबंधन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

हरित ऊर्जा सहयोग का होगा विस्तार
भारत और जापान ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में संभावित व्यवधानों, विशेषकर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एनर्जी रेजिलिएंस इनिशिएटिव शुरू करने की भी घोषणा की है।
इसके अलावा दोनों देशों ने बैटरी प्रौद्योगिकी, हरित हाइड्रोजन, परमाणु ऊर्जा तथा अन्य स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। दोनों सरकारों का उद्देश्य ऊर्जा परिवर्तन से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझा नीतिगत दृष्टिकोण को व्यावहारिक परियोजनाओं में बदलना है।
जलवायु लक्ष्य और ग्रामीण विकास को मिलेगी नई दिशा
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा रणनीति में यह बायोगैस पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जैविक अपशिष्टों का बेहतर उपयोग होगा और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने के राष्ट्रीय प्रयासों को बल मिलेगा।
साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा अवसंरचना के विकास, किसानों की आय बढ़ाने, जैविक खेती को प्रोत्साहन देने और टिकाऊ कृषि मॉडल को मजबूत करने में भी यह पहल अहम साबित हो सकती है। भारत और जापान के बीच यह सहयोग केवल ऊर्जा सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी, जलवायु प्रतिबद्धताओं और ग्रामीण समृद्धि के साझा लक्ष्यों को भी नई मजबूती प्रदान करेगा।
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