नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Crude Oil Price: वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर अस्थिरता बढ़ गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव तथा होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। गुरुवार के कारोबार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.5 फीसदी की बढ़त के साथ 95.40 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 2.9 फीसदी चढ़कर 92.63 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
विशेष बात यह रही कि कच्चे तेल की कीमतें पिछले कारोबारी सत्र के निचले स्तर से करीब 6 फीसदी तक उछल चुकी हैं। हालांकि कीमतें अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बनी हुई हैं, लेकिन बाजार में चिंता का माहौल लगातार गहराता जा रहा है।
Crude Oil Price: होर्मुज स्ट्रेट पर संकट ने बढ़ाई चिंता
तेल बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दिया गया सख्त संदेश माना जा रहा है। ईरान के शीर्ष संयुक्त सैन्य कमांड ने घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य को तेल टैंकरों और व्यावसायिक जहाजों के लिए बंद किया जा सकता है। साथ ही चेतावनी दी गई कि इस मार्ग से गुजरने की कोशिश करने वाले जहाजों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि अमेरिकी सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि व्यावसायिक जहाज अभी भी जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं और समुद्री मार्ग पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। अमेरिकी सेना ने उन खबरों का भी खंडन किया जिनमें अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर हमले की बात कही जा रही थी।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाले तेल और गैस व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
यदि इस जलमार्ग में किसी प्रकार की बाधा आती है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर तत्काल असर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक और ऊर्जा कंपनियां इस क्षेत्र में होने वाली हर गतिविधि पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
अमेरिका के नए हमलों से बढ़ा तनाव
बाजार में चिंता तब और बढ़ गई जब अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर कई रणनीतिक ठिकानों पर अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई की। इस घटनाक्रम ने उस नाजुक युद्धविराम को लेकर आशंकाएं बढ़ा दी हैं, जो इस वर्ष की शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच संघर्ष कम करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

अमेरिकी तेल भंडार में बड़ी गिरावट
जियोपॉलिटिकल तनाव के अलावा अमेरिकी तेल भंडार के आंकड़ों ने भी बाजार को समर्थन दिया है।
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार 5 जून को समाप्त सप्ताह में अमेरिकी क्रूड ऑयल इन्वेंटरी में 7.2 मिलियन बैरल की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों ने लगभग 4 मिलियन बैरल की कमी का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक गिरावट इससे काफी अधिक रही।
कुशिंग, ओक्लाहोमा स्थित प्रमुख डिलीवरी हब में भी भंडार घटा है, जिससे आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
Crude Oil Price: ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में व्यवधान लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा। बढ़ती ऊर्जा कीमतें वैश्विक महंगाई को फिर से ऊपर धकेल सकती हैं और आर्थिक विकास की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं।
तेल की ऊंची कीमतों का असर परिवहन, विनिर्माण और बिजली उत्पादन जैसी कई गतिविधियों पर पड़ता है, जिससे उपभोक्ताओं और उद्योगों दोनों की लागत बढ़ जाती है।
आगे क्या है बाजार की नजर?
फिलहाल बाजार की नजर दो प्रमुख कारकों पर बनी हुई है—पहला, अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों का अगला कदम और दूसरा, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही की स्थिति।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है या तेल आपूर्ति में और व्यवधान आता है, तो ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर की ओर बढ़ सकता है। वहीं स्थिति सामान्य होने पर कीमतों (Crude Oil Price) में कुछ राहत भी देखने को मिल सकती है।
फिलहाल वैश्विक ऊर्जा बाजार उच्च सतर्कता की स्थिति में है और निवेशक हर नए घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
====
इन ख़बरों को भी पढ़ें…
खरीफ 2026: जैविक खाद की मांग में रिकॉर्ड उछाल, किसानों ने खरीदी 11.17 लाख टन खाद
GDP 7.7% बढ़ी, लेकिन कृषि क्षेत्र की रफ्तार धीमी; 2025-26 में ग्रोथ घटकर 3% पर पहुंची
मई 2026 में वैश्विक खाद्य कीमतें रहीं लगभग स्थिर, अनाज और चीनी महंगी, वनस्पति तेल सस्ते
केला उत्पादकों पर TR4 फंगस का खतरा, 50,000 करोड़ रुपये की केला अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा संकट
अक्टूबर तक कॉटन आयात शुल्क मुक्त, उद्योग को राहत; किसानों पर बढ़ेगा दबाव