नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): FAO रिपोर्ट: संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में वैश्विक खाद्य कीमतें लगभग स्थिर बनी रहीं। अनाज और चीनी की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली, लेकिन वनस्पति तेलों की कीमतों में आई तेज गिरावट ने कुल खाद्य मूल्य सूचकांक पर पड़ने वाले दबाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया।
FAO का खाद्य मूल्य सूचकांक (Food Price Index- FAO) मई 2026 में औसतन 130.8 अंक पर दर्ज किया गया। यह अप्रैल के संशोधित स्तर की तुलना में 0.2 प्रतिशत कम रहा, जबकि मई 2025 के मुकाबले 2.9 प्रतिशत अधिक था। संगठन का कहना है कि वैश्विक खाद्य बाजारों ने अब तक लचीलापन दिखाया है, लेकिन मौसम संबंधी जोखिम, बढ़ती उत्पादन लागत और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं आगे भी बाजार को प्रभावित कर सकती हैं।
खाद्य बाजारों पर मंडरा रहे जोखिम: FAO
FAO के बाजार एवं व्यापार प्रभाग के निदेशक बूबाकर बेन-बेलहासेन ने कहा कि वैश्विक खाद्य बाजार फिलहाल स्थिर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन अनाज की कीमतों में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि बाजार मौसम संबंधी चुनौतियों और ऊर्जा व कृषि इनपुट आपूर्ति में आने वाले व्यवधानों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है।
उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक व्यापार मार्गों में जारी अनिश्चितता उर्वरकों की उपलब्धता और लागत को प्रभावित कर सकती है, जिसका असर अंततः खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है।
अनाज की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
मई 2026 में एफएओ का अनाज मूल्य सूचकांक अप्रैल की तुलना में 2.6 प्रतिशत बढ़ा और सालाना आधार पर लगभग 5 प्रतिशत ऊंचा रहा। ईंधन और उर्वरकों की बढ़ती लागत तथा प्रतिकूल मौसम इसके प्रमुख कारण रहे।
| प्रमुख अनाज | मासिक बदलाव | वार्षिक बदलाव |
|---|---|---|
| गेहूं | +3.4% | +7.8% |
| मक्का | +1.9% | – |
| चावल | +2.7% | – |
गेहूं की कीमतों में सबसे अधिक तेजी देखने को मिली। अमेरिका सहित प्रमुख निर्यातक देशों में उत्पादन कम होने की आशंकाओं ने वैश्विक बाजार को प्रभावित किया। एफएओ के अनुसार अमेरिकी शीतकालीन गेहूं की फसल कई दशकों के सबसे कमजोर स्तरों में आंकी जा रही है। मई 2026 में अमेरिकी हार्ड रेड विंटर गेहूं की कीमतें पिछले वर्ष की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक थीं।
मक्का की कीमतों को मजबूत आयात मांग, ब्राजील और अमेरिका में सीमित उपलब्धता तथा एथेनॉल उद्योग की बढ़ती मांग से समर्थन मिला। वहीं प्रमुख एशियाई निर्यातक देशों में मौसम संबंधी चिंताओं और ऊंची ऊर्जा कीमतों के कारण चावल की कीमतों में भी मजबूती दर्ज की गई।
वनस्पति तेलों में पहली मासिक गिरावट
अनाज के विपरीत, वनस्पति तेलों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। एफएओ वनस्पति तेल मूल्य सूचकांक मई में अप्रैल की तुलना में 4.6 प्रतिशत नीचे आ गया, जो वर्ष 2026 की पहली मासिक गिरावट है।
पाम ऑयल की कीमतों पर कमजोर वैश्विक मांग और ऊर्जा बाजारों की अनिश्चितता का दबाव रहा। सोयाबीन तेल में मिश्रित रुख देखने को मिला। दक्षिण अमेरिका से बढ़ी आपूर्ति ने कीमतों को नीचे खींचा, जबकि उत्तरी अमेरिका में बायोफ्यूल की मांग ने समर्थन दिया। दूसरी ओर रेपसीड और सूरजमुखी तेल की कीमतें सीमित उपलब्धता के कारण बढ़ीं।
अल नीनो की आशंका से चीनी हुई महंगी
मई में सबसे अधिक वृद्धि चीनी की कीमतों में दर्ज की गई। एफएओ चीनी मूल्य सूचकांक 7.5 प्रतिशत बढ़ गया।
बाजार को चिंता है कि ब्राजील में गन्ने की फसल का बड़ा हिस्सा चीनी उत्पादन की बजाय एथेनॉल निर्माण में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा संभावित अल नीनो परिस्थितियों के कारण भारत और थाईलैंड जैसे प्रमुख उत्पादक देशों में अगले सीजन के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंकाओं ने भी कीमतों को समर्थन दिया।
डेयरी और मांस बाजार में मिला-जुला रुख
डेयरी उत्पादों के बाजार में हल्की कमजोरी देखी गई। डेयरी मूल्य सूचकांक अप्रैल की तुलना में 0.5 प्रतिशत घट गया। मक्खन की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट इसका मुख्य कारण रही। हालांकि स्किम्ड मिल्क पाउडर की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पनीर और होल मिल्क पाउडर बाजार में मिश्रित रुझान देखने को मिला।
वहीं FAO का मांस मूल्य सूचकांक 0.1 प्रतिशत बढ़ा, जो बाजार में सीमित लेकिन सकारात्मक मांग का संकेत देता है।

2026-27 में घट सकता है वैश्विक अनाज उत्पादन: FAO
FAO के ताजा अनाज आपूर्ति एवं मांग आकलन के अनुसार 2026-27 सीजन में वैश्विक अनाज उत्पादन 2.982 अरब टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के रिकॉर्ड 3.043 अरब टन उत्पादन की तुलना में 2 प्रतिशत कम होगा।
हालांकि वैश्विक अनाज खपत में केवल 0.6 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है, जिसके कारण बाजार में गंभीर आपूर्ति संकट की संभावना फिलहाल नहीं दिखाई देती। वैश्विक स्टॉक-टू-यूज अनुपात 31.7 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है, जो अपेक्षाकृत आरामदायक स्थिति को दर्शाता है।
FAO का मानना है कि आने वाले महीनों में वैश्विक व्यापार मार्गों पर तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, उर्वरकों की लागत और मौसम संबंधी घटनाएं खाद्य बाजारों की दिशा तय करने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे। यदि ये जोखिम बढ़ते हैं तो खाद्य कीमतों में नई तेजी देखने को मिल सकती है, जिसका असर दुनिया भर के उपभोक्ताओं और कृषि क्षेत्र दोनों पर पड़ेगा।
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