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राष्ट्रीय कृषि तकनीक सम्मेलन ‘उड़ान 1.0’ का अमृतसर में शुभारंभ, मेद सिंह ने वैज्ञानिक खेती अपनाने का किया आह्वान

उड़ान 1.0

रिपोर्ट: बिचित्र शर्मा

अमृतसर, (कृषि भूमि ब्यूरो): उड़ान 1.0: गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (GNDU) के इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी विंग तथा सेंटर फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च एंड इनोवेशन (CARI) द्वारा एग्री लाइव इंटरनेशनल ट्रेड एसोसिएशन (AITA) के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि तकनीक कार्यशाला ‘उड़ान 1.0’ का शुभारंभ मंगलवार को उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, शोधार्थियों और कृषि विशेषज्ञों को आधुनिक कृषि तकनीकों, डिजिटल समाधान और वैज्ञानिक खेती की नई अवधारणाओं से जोड़ना है।

उड़ान 1.0 कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि सत्वंत सिंह संधू, अध्यक्ष फतेह एफपीओ, तथा विभागाध्यक्ष डॉ. हरदीप कौर की उपस्थिति में दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। आयोजन में पंजाब, हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से किसान, कृषि उद्यमी, शोधकर्ता और छात्र शामिल हुए।

पहाड़ी किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की जरूरत: मेद सिंह

कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश की फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (FPC) के चेयरमैन मेद सिंह ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश कृषि और बागवानी के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, लेकिन आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग के मामले में अभी भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित कृषि भूमि और परिवहन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए तकनीक आधारित समाधान अपनाना समय की मांग है।

मेद सिंह ने कहा कि कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा दिए बिना किसानों की आय में स्थायी वृद्धि संभव नहीं है। उन्होंने किसानों से पारंपरिक अनुभवों के साथ-साथ आधुनिक अनुसंधान और तकनीकी ज्ञान को अपनाने की अपील की।

एफपीओ मॉडल से किसानों को मिल रही नई दिशा

अपने वक्तव्य में मेद सिंह ने बताया कि किसानों को संगठित कर बेहतर बाजार, तकनीकी मार्गदर्शन और मूल्य संवर्धन के अवसर उपलब्ध कराने के लिए फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (FPC) की अवधारणा महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

उन्होंने कहा कि उनकी संस्था पहाड़ी क्षेत्रों में किसानों को आधुनिक खेती, फसल विविधीकरण, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा कृषि उद्यमिता से जोड़ने का कार्य कर रही है। इससे किसानों को न केवल उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल रही है बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है।

कृषि ड्रोनों का लाइव प्रदर्शन बना आकर्षण का केंद्र

उड़ान 1.0: कार्यशाला के पहले दिन का सबसे प्रमुख आकर्षण कृषि ड्रोनों का लाइव प्रदर्शन रहा। प्रबंधक डॉ. रमनदीप सिंह सहगल और डॉ. संदीप कौर के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय परिसर में आधुनिक ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन किया गया।

इस दौरान ड्रोन के माध्यम से फसलों पर कीटनाशकों और पोषक तत्वों के सटीक छिड़काव, खेतों की निगरानी तथा कृषि प्रबंधन की विभिन्न प्रक्रियाओं को प्रदर्शित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि ड्रोन तकनीक श्रम लागत कम करने, समय बचाने और संसाधनों के कुशल उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

ड्रोन प्रदर्शन को देखने के लिए बड़ी संख्या में युवा किसान, कृषि विद्यार्थी और शोधार्थी मौजूद रहे। प्रतिभागियों ने तकनीक आधारित खेती में गहरी रुचि दिखाई और विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की।

उड़ान 1.0
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उड़ान 1.0: कृषि में नवाचार और अनुसंधान पर जोर

आयोजकों के अनुसार कार्यशाला के दौरान कृषि डिजिटलीकरण, स्मार्ट फार्मिंग, प्रिसिजन एग्रीकल्चर, कृषि उद्यमिता तथा नवाचार आधारित खेती जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों का उद्देश्य किसानों और युवाओं को कृषि क्षेत्र में उभरती तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग से अवगत कराना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीकों, अनुसंधान और किसानों की भागीदारी के समन्वय से कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है। इसी दिशा में ‘उड़ान 1.0’ जैसे आयोजन किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान का प्रभावी मंच बनकर उभर रहे हैं।

राष्ट्रीय कृषि तकनीक कार्यशाला ‘उड़ान 1.0’ ने अपने पहले दिन ही यह संदेश दिया कि भविष्य की खेती तकनीक, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित होगी। विशेषज्ञों ने किसानों को नई तकनीकों को अपनाने और संगठित प्रयासों के माध्यम से कृषि को अधिक लाभकारी बनाने का आह्वान किया।

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