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नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): खाद्यान्न उत्पादन 2025-26: भारत में कृषि क्षेत्र से जुड़ी बड़ी उपलब्धि सामने आई है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन 37.65 करोड़ टन रहने का अनुमान जताया है। यह पिछले वर्ष 2024-25 के 35.77 करोड़ टन उत्पादन की तुलना में लगभग 188 लाख टन यानी 5.3 प्रतिशत अधिक है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो यह देश के इतिहास का अब तक का सबसे अधिक खाद्यान्न उत्पादन होगा।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रमुख फसलों के उत्पादन के तीसरे अग्रिम अनुमान जारी करते हुए कहा कि बेहतर बीज, वैज्ञानिक खेती और जलवायु अनुकूल तकनीकों के कारण उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

खाद्यान्न उत्पादन: चावल, गेहूं और मक्का में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार चावल का उत्पादन 15.40 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर होगा। पिछले वर्ष चावल उत्पादन 15.01 करोड़ टन था। इसी तरह गेहूं उत्पादन 12.06 करोड़ टन रहने की संभावना है, जबकि पिछले वर्ष यह 11.79 करोड़ टन रहा था।

मक्का उत्पादन में सबसे अधिक वृद्धि देखने को मिल सकती है। अनुमान के मुताबिक 2025-26 में मक्का उत्पादन 550.93 लाख टन तक पहुंच सकता है, जबकि पिछले वर्ष यह 434.09 लाख टन था। कृषि विशेषज्ञ इसे पशु आहार, एथेनॉल और औद्योगिक उपयोग की बढ़ती मांग का प्रभाव मान रहे हैं।

मोटे अनाज और दलहन उत्पादन भी मजबूत

सरकार के अनुसार श्री अन्न यानी मोटे अनाज (मिलेट्स) का उत्पादन 175.84 लाख टन रहने का अनुमान है। वहीं दलहन उत्पादन में भी सकारात्मक स्थिति बनी हुई है।

चना उत्पादन 125.14 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 14 लाख टन अधिक होगा। अरहर उत्पादन 35.92 लाख टन और मसूर उत्पादन 17.62 लाख टन रहने की संभावना जताई गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दलहन उत्पादन में वृद्धि से देश की आयात निर्भरता कम हो सकती है और किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।

खाद्यान्न उत्पादन
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तिलहन और गन्ना उत्पादन में भी नया रिकॉर्ड

कुल तिलहन उत्पादन 430.59 लाख टन रहने का अनुमान है। मूंगफली उत्पादन 130.74 लाख टन तक पहुंच सकता है, जबकि सोयाबीन उत्पादन 125.96 लाख टन रहने की संभावना है। रेपसीड-सरसों उत्पादन भी रिकॉर्ड 137.68 लाख टन रहने का अनुमान जताया गया है।

व्यावसायिक फसलों में गन्ना उत्पादन 50 करोड़ टन से अधिक रहने की संभावना है। पिछले वर्ष की तुलना में इसमें लगभग 4.54 करोड़ टन की वृद्धि का अनुमान है। वहीं कपास उत्पादन 290.24 लाख गांठ और जूट उत्पादन 91.76 लाख गांठ रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।

वैज्ञानिक खेती और नई तकनीकों का असर

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उत्पादन में वृद्धि का बड़ा कारण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा विकसित जलवायु अनुकूल फसल किस्में और वैज्ञानिक खेती तकनीकों का व्यापक प्रसार है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में आईसीएआर ने विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए 339 नई फसल किस्में जारी की हैं। इनमें अनाज, दलहन, तिलहन, चारा और व्यावसायिक फसलें शामिल हैं।

इसके अलावा वर्ष 2024-25 में ब्रीडर बीज उत्पादन 109,370.2 क्विंटल और क्वालिटी बीज उत्पादन 433,114.7 क्विंटल दर्ज किया गया। सरकार का मानना है कि बेहतर गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता ने किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

खाद्यान्न उत्पादन: कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत

रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन का यह अनुमान देश की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और कृषि निर्यात के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून सामान्य रहता है और बाजार प्रबंधन बेहतर होता है तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक कृषि बाजार में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

सरकार का दावा है कि कृषि क्षेत्र में तकनीकी सुधार, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और किसानों को आधुनिक खेती के प्रति जागरूक करने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगा है।

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