नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Gold Import Rules: भारत सरकार ने सोने के आयात को लेकर नियमों को और सख्त कर दिया है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) की ओर से जारी नए निर्देशों के अनुसार अब एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत कोई भी कंपनी अधिकतम 100 किलो सोना ही ड्यूटी फ्री आयात कर सकेगी। इससे पहले इस स्कीम में आयात की कोई तय सीमा नहीं थी।
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और देश पर बढ़ते आयात बिल का दबाव भी बढ़ रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और रुपये की कमजोरी के बीच सरकार विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए आयात नियंत्रण की नीति अपना रही है।
क्या है एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम?
एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत ज्वेलरी और एक्सपोर्ट आधारित कंपनियों को बिना आयात शुल्क दिए कच्चा माल मंगाने की अनुमति मिलती है। इसका उद्देश्य निर्यात को बढ़ावा देना है ताकि कंपनियां कम लागत पर उत्पाद तैयार कर सकें।
इस स्कीम के तहत कंपनियां सोना, चांदी, पैकेजिंग मटेरियल, फ्यूल और अन्य जरूरी इनपुट्स आयात कर सकती हैं, लेकिन इनका उपयोग केवल एक्सपोर्ट प्रोडक्ट तैयार करने के लिए ही किया जा सकता है।
अब सरकार ने इस सुविधा पर सीमा तय करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि एक कंपनी अधिकतम 100 किलो सोने तक ही ड्यूटी फ्री इंपोर्ट कर पाएगी।
पहली बार आवेदन करने वालों पर सख्त निगरानी
नए नियमों के तहत पहली बार आवेदन करने वाली कंपनियों के लिए फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। अधिकारियों की टीम कंपनी की फैक्ट्री और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का निरीक्षण करेगी।
इस जांच में यह देखा जाएगा कि कंपनी वास्तव में संचालन में है या नहीं, उसकी उत्पादन क्षमता कितनी है और क्या वह निर्यात मानकों के अनुसार काम कर रही है। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी कंपनियों और स्कीम के दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सकेगी।

50% एक्सपोर्ट पूरा होने पर ही मिलेगा अगला परमिट
सरकार ने नियमों में एक और अहम बदलाव किया है। अब किसी भी कंपनी को अगला एडवांस ऑथराइजेशन तभी मिलेगा, जब वह पहले मिले परमिट के तहत कम से कम 50 प्रतिशत निर्यात पूरा कर चुकी होगी।
इसके साथ ही कंपनियों को हर 15 दिन में अपनी परफॉर्मेंस रिपोर्ट जमा करनी होगी। यह रिपोर्ट एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित करानी होगी, जिसमें आयात किए गए सोने और उसके बदले किए गए एक्सपोर्ट का पूरा रिकॉर्ड देना होगा।
मासिक निगरानी भी होगी अनिवार्य
DGFT के क्षेत्रीय अधिकारी अब हर महीने सभी जारी किए गए एडवांस ऑथराइजेशन की रिपोर्ट मुख्यालय को भेजेंगे। इससे सरकार को यह ट्रैक करने में आसानी होगी कि किस कंपनी ने कितना सोना आयात किया और उसके बदले कितना निर्यात किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का उद्देश्य गोल्ड इंपोर्ट को पूरी तरह रोकना नहीं बल्कि उसे नियंत्रित और पारदर्शी बनाना है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातक देशों में शामिल है और हर साल बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा केवल गोल्ड खरीद में खर्च होती है।
Gold Import Rules: आयात शुल्क में भी भारी बढ़ोतरी
सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी पर आयात शुल्क भी बढ़ा दिया है। 13 मई से लागू नए नियमों के तहत गोल्ड और सिल्वर पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी गई है। वहीं प्लैटिनम पर शुल्क 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत किया गया है।
नीचे नई और पुरानी ड्यूटी दरों की तुलना दी गई है:
| धातु | पुराना आयात शुल्क | नया आयात शुल्क |
|---|---|---|
| सोना | 6% | 15% |
| चांदी | 6% | 15% |
| प्लैटिनम | 6.4% | 15.4% |
Gold Import Rules: इन फैसलों का असर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। ज्वेलरी उद्योग से जुड़े कारोबारियों का मानना है कि आयात महंगा होने से सोने के दाम और बढ़ सकते हैं, जिससे उपभोक्ताओं की मांग पर असर पड़ने की संभावना है।
हालांकि सरकार का कहना है कि इन कदमों से गैर-जरूरी आयात कम होगा और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। आने वाले समय में सरकार जरूरत पड़ने पर नियमों में और बदलाव भी कर सकती है।
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