मुंबई (कृषि भूमि ब्यूरो): महाराष्ट्र नया बीज कानून – महाराष्ट्र सरकार किसानों को सशक्त बनाने और बीज क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से एक अलग बीज कानून लाने की तैयारी कर रही है। इस प्रस्तावित कानून के तहत किसानों को अपने बीजों को सुरक्षित रखने, उपयोग करने, आपस में आदान-प्रदान करने और बेचने का अधिकार मिलेगा। हालांकि, वे इन बीजों को ब्रांड नाम से बाजार में नहीं बेच सकेंगे।
राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रय विठोबा भरणे ने बताया कि नए बीज कानून का उद्देश्य पारंपरिक खेती प्रथाओं को संरक्षित करना और किसानों को विश्वसनीय व गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना है।
बीज कानून: क्वालिटी कंट्रोल और जवाबदेही पर फोकस
प्रस्तावित कानून में बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कड़े मानक लागू किए जाएंगे। यदि कोई बीज खराब या मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता है, तो किसानों को त्वरित मुआवजा देने का प्रावधान किया जाएगा। इसके साथ ही बीज कंपनियों की जवाबदेही भी स्पष्ट रूप से तय की जाएगी।

यह पहल मौजूदा बीज अधिनियम 1966 से आगे बढ़ते हुए नियामक ढांचे को आधुनिक बनाने का प्रयास मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि बीज क्षेत्र में विश्वास और पारदर्शिता दोनों को मजबूत किया जाए।
नए बीज कानून में पंजीकरण अनिवार्य
नए कानून के तहत बीज आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े सभी हितधारकों—जैसे उत्पादक, प्रोसेसिंग यूनिट, वितरक, विक्रेता और नर्सरी—के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। इससे पूरे सेक्टर में निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
सरकार ने साथी पोर्टल के माध्यम से ‘ट्रुथफुल सीड्स’ के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इस पोर्टल पर पहले ही बीज उत्पादन से जुड़े संस्थानों का 100% पंजीकरण पूरा किया जा चुका है।
पारदर्शिता के लिए QR कोड और ट्रैकिंग सिस्टम
नए बीज कानून के तहत बीज पैकेटों पर QR कोड लगाने का प्रावधान किया जाएगा, जिससे उपभोक्ता बीज की गुणवत्ता, स्रोत और उत्पादन की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। इसके साथ ही उत्पादन से लेकर बिक्री तक बीजों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए एक केंद्रीकृत ट्रेसबिलिटी सिस्टम लागू किया जाएगा।
इससे नकली या घटिया बीजों की समस्या पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी और किसानों को बेहतर गुणवत्ता के बीज मिल सकेंगे।
शिकायत निवारण तंत्र होगा मजबूत
सरकार जिला स्तर पर बीज शिकायत निवारण केंद्र स्थापित करने की योजना बना रही है। इससे किसानों की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
इसके अलावा, कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा किए गए शोध को भी इस नए नियामक ढांचे में शामिल किया जाएगा, जिससे वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा।
महाबीज़ में सुधार और सख्त कार्रवाई
राज्य सरकार महाबीज़ के कामकाज में सुधार लाने पर भी ध्यान दे रही है। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों और संस्थाओं के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी इस कानून में शामिल किया जाएगा।
खरीफ 2026 से लागू होगी नई व्यवस्था
सरकार का लक्ष्य है कि खरीफ 2026 सीजन से बीजों का उत्पादन, वितरण और बिक्री पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित हो। इससे ट्रेसबिलिटी, प्रमाणन और जवाबदेही में उल्लेखनीय सुधार होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून किसानों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ बीज उद्योग को अधिक संगठित और पारदर्शी बनाएगा।
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