नई दिल्ली/मुंबई, 30 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): Kerosene Supply India Crisis – पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल और गैस सप्लाई पर असर पड़ा है, जिससे भारत समेत कई देशों में ईंधन संकट गहराने लगा है। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने केरोसिन (सुपीरियर केरोसिन ऑयल – SKO) को लेकर बड़ा निर्णय लिया है।
सरकार ने अस्थायी रूप से PDS (पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम) और चुनिंदा पेट्रोल पंपों के माध्यम से केरोसिन की आपूर्ति को मंजूरी दे दी है, ताकि घरेलू स्तर पर ईंधन की कमी को दूर किया जा सके।
21 राज्यों में फिर शुरू होगी आपूर्ति
29 मार्च को जारी अधिसूचना के अनुसार, देश के 21 “केरोसिन-फ्री” राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 60 दिनों के लिए एड-हॉक आधार पर केरोसिन की आपूर्ति फिर से शुरू की जाएगी।
यह आपूर्ति खासतौर पर घरेलू जरूरतों—जैसे खाना पकाने और रोशनी—के लिए होगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसका दुरुपयोग न हो।
पेट्रोल पंपों को भी मिली अनुमति
सरकार ने पेट्रोलियम नियम, 2002 के तहत अस्थायी छूट देते हुए सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा संचालित चुनिंदा पेट्रोल पंपों को केरोसिन भंडारण और बिक्री की अनुमति दी है।
हर जिले में अधिकतम दो पेट्रोल पंपों को नामित किया जाएगा, जहां से केरोसिन उपलब्ध होगा। प्रत्येक पंप पर अधिकतम 5,000 लीटर तक केरोसिन स्टोर किया जा सकेगा।
नियमों में ढील से आसान होगी सप्लाई
केरोसिन वितरण को सुगम बनाने के लिए सरकार ने लाइसेंसिंग नियमों में भी अस्थायी ढील दी है। PDS डीलरों और अधिकृत एजेंटों को कुछ शर्तों के तहत लाइसेंस संबंधी प्रावधानों से छूट दी गई है।
इस कदम का उद्देश्य है कि ईंधन की आपूर्ति तेज़ी से घर-घर तक पहुंच सके, खासकर उन इलाकों में जहां LPG की उपलब्धता प्रभावित हुई है।
क्यों जरूरी पड़ा यह कदम?
भारत में पिछले एक दशक से केरोसिन पर निर्भरता कम करने की नीति अपनाई गई थी। उज्ज्वला योजना और LPG विस्तार के बाद कई राज्यों ने खुद को “केरोसिन-फ्री” घोषित कर दिया था।
लेकिन मौजूदा वैश्विक संकट, विशेषकर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई में बाधा, ने सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया।
केरोसिन आपूर्ति व्यवस्था

| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| लागू अवधि | 60 दिन (अस्थायी) |
| राज्य/UT | 21 केरोसिन-फ्री क्षेत्र |
| वितरण माध्यम | PDS + चुनिंदा पेट्रोल पंप |
| स्टोरेज सीमा | प्रति पंप 5,000 लीटर |
| उपयोग | घरेलू (खाना, रोशनी) |
आम जनता को राहत
यह निर्णय विशेष रूप से ग्रामीण और गरीब परिवारों के लिए राहत लेकर आया है, जो LPG की कमी के कारण प्रभावित हो सकते हैं। केरोसिन की उपलब्धता से उन्हें वैकल्पिक ईंधन मिलेगा और दैनिक जीवन पर असर कम होगा।
सरकार का यह कदम एक आपातकालीन राहत उपाय के रूप में देखा जा रहा है, जो मौजूदा ईंधन संकट से निपटने के लिए उठाया गया है। केरोसिन की वापसी यह दर्शाती है कि ऊर्जा सुरक्षा अब फिर से प्राथमिकता बन गई है।
हालांकि, यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी है और स्थिति सामान्य होने पर इसे वापस लिया जा सकता है। फिर भी, यह निर्णय बताता है कि संकट के समय पारंपरिक ईंधन विकल्पों की अहमियत अब भी बनी हुई है।
👉 नोट: वैश्विक तेल बाजार और घरेलू सप्लाई की स्थिति के अनुसार सरकार आगे और कदम उठा सकती है। जुड़े रहें ताजा अपडेट के लिए।
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