नई दिल्ली, 16 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): देश में पीली मटर (येलो पीज) के आयात से दाल उत्पादक किसानों पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को अहम निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से कहा है कि इस मुद्दे पर सभी संबंधित मंत्रालयों और हितधारकों की बैठक बुलाकर मौजूदा नीति की समीक्षा की जाए।
कोर्ट का मानना है कि ऐसी नीति तैयार करने की जरूरत है जिससे देश में दालों की खेती को बढ़ावा मिले और किसानों को बेहतर प्रोत्साहन मिल सके।
नई नीति पर पहल करने का निर्देश
किसान संगठन किसान महापंचायत की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से दाल उत्पादन बढ़ाने और किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करने वाली नीति पर विचार करने को कहा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 13 मार्च को कहा कि कृषि, खाद्य और वाणिज्य मंत्रालय मिलकर इस मुद्दे का प्रभावी समाधान निकालें। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि विभिन्न हितधारकों के साथ होने वाली बैठक और चर्चा का पूरा विवरण कोर्ट के सामने प्रस्तुत किया जाए।
इस मामले की अगली सुनवाई 8 मई को निर्धारित की गई है।
किसान संगठनों ने जताई चिंता
किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला केंद्र सरकार के कृषि, खाद्य और वाणिज्य मंत्रालयों की किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्धता की परीक्षा साबित होगा।
उनका कहना है कि सरकार को फसल विविधीकरण, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और MSP पर सुनिश्चित खरीद जैसे मुद्दों पर स्पष्ट और प्रभावी नीति बनानी चाहिए।
आयात से किसानों को नुकसान का आरोप
याचिका में कहा गया है कि विदेशों से आयात की जा रही पीली मटर देश के दाल किसानों की आजीविका पर असर डाल रही है।
कनाडा, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पीली मटर का उपयोग आमतौर पर पशु चारे के रूप में किया जाता है। हालांकि भारत में इसका इस्तेमाल दाल के विकल्प के रूप में होने लगा है।
किसान संगठनों का आरोप है कि इससे देश में उगाई जाने वाली अरहर (तूर) और चना जैसी दालों की मांग प्रभावित हो रही है, जिसके कारण किसानों को उचित कीमत नहीं मिल पा रही।
सरकार का पक्ष
वाणिज्य मंत्रालय के अधीन विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने अपने जवाब में कहा कि यह याचिका कानूनी रूप से उचित नहीं है क्योंकि इससे किसी मौलिक या कानूनी अधिकार का उल्लंघन नहीं होता।
सरकार का कहना है कि विदेशी व्यापार नीति के तहत लिए गए निर्णयों में कोई अवैधता या मनमानी नहीं है। DGFT ने यह भी बताया कि 29 अक्टूबर 2025 से पीली मटर के आयात पर 30 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है।
| नीति पहलू | विवरण |
|---|---|
| आयात वस्तु | पीली मटर (Yellow Peas) |
| आयात शुल्क | 30% |
| शुल्क लागू होने की तिथि | 29 अक्टूबर 2025 |
| प्रमुख निर्यातक देश | कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया |
MSP और खरीद व्यवस्था पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसानों को MSP पर सुनिश्चित खरीद मिलती है तो दालों का उत्पादन स्वाभाविक रूप से बढ़ सकता है।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि कई बार दाल उत्पादक किसानों को अपनी फसल MSP से 20–25 प्रतिशत कम कीमत पर बेचनी पड़ती है, क्योंकि गेहूं और धान की तरह दालों की सरकारी खरीद की मजबूत व्यवस्था नहीं है।
दालों की खेती को बढ़ावा देने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विभिन्न मंत्रालयों को बेहतर समन्वय के साथ ऐसी नीति तैयार करनी चाहिए जिससे उत्तर और मध्य भारत में गेहूं और धान के विकल्प के रूप में दालों की खेती को बढ़ावा दिया जा सके।
इसके लिए किसानों को लाभकारी MSP, उत्पादन लागत के अनुरूप मूल्य और समय पर सरकारी खरीद की गारंटी देना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी नीतियों से न केवल दाल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि किसानों की आय भी अधिक सुरक्षित हो सकेगी।
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