पटना, 05 अगस्त (कृषि भूमि ब्यूरो):
राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU), पूसा, समस्तीपुर ने बिहार की कृषि (Agriculture) परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मक्का की तीन नई किस्में विकसित की हैं, जो राज्य के किसानों की आय बढ़ाने और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई इन किस्मों के नाम हैं: राजेन्द्र पॉपकॉर्न‑1, शक्तिमान‑5, राहुल मक्का‑4। इनमें से ‘राजेन्द्र पॉपकॉर्न‑1’ एक विशेष किस्म है जो पॉपकॉर्न उत्पादन के लिए आदर्श है। यह किस्म कम समय में तैयार हो जाती है और इसमें फूटने की बहुत अच्छी क्षमता (popping quality) पाई गई है, जो बाजार में इसकी मांग को बढ़ा सकती है।
‘शक्तिमान‑5’ और ‘राहुल मक्का‑4’ को जैव-संवर्धित (biofortified) किस्मों के रूप में विकसित किया गया है। इन किस्मों में प्रोटीन, आयरन और जिंक की मात्रा अधिक है, जिससे यह स्थानीय पोषण संकट, विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं में कुपोषण से निपटने में सहायक हो सकती हैं।
RPCAU के कुलपति डॉ. रमेश चंद्र सिंह ने बताया, “हमने इन किस्मों को बिहार की जलवायु, सीमित सिंचाई और छोटे जोत वाले किसानों की जरूरतों के अनुरूप डिजाइन किया है। इन किस्मों से न केवल उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि किसानों को बेहतर बाजार मूल्य भी मिलेगा।”
इन मक्का किस्मों का औसतन उत्पादन 60–65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताया गया है, जबकि परंपरागत किस्मों की तुलना में यह 15–20% अधिक है। इसके अलावा इन किस्मों की परिपक्वता अवधि 95 से 110 दिन के बीच है, जिससे यह रबी और खरीफ दोनों मौसम में सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं।
राज्य सरकार ने भी इन किस्मों को कृषि इनपुट सब्सिडी योजना में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दो वर्षों में इन किस्मों का बीज पूरे बिहार में व्यापक रूप से उपलब्ध होगा।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन किस्मों को बड़े स्तर पर अपनाया जाए, तो यह न केवल बिहार बल्कि पूरे पूर्वी भारत की कृषि और पोषण नीति में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।
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