भोपाल (कृषि भूमि ब्यूरो): मध्य प्रदेश – राजधानी भोपाल में पिछले कुछ दिनों से चल रहा किसानों का भारी विरोध प्रदर्शन आखिरकार समाप्त हो गया है। मध्य प्रदेश सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच हुई सकारात्मक बातचीत के बाद सरकार ने किसानों की कई प्रमुख मांगें स्वीकार कर ली हैं। सरकार द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग की एमएसपी पर खरीद सीमा बढ़ाने, ई-उपार्जन पोर्टल की समय-सीमा में विस्तार करने और ई-टोकन व्यवस्था को अस्थायी रूप से स्थगित करने के फैसलों के बाद किसानों ने अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा कर दी है।
आंदोलन की मुख्य वजह और सरकार के साथ समझौता
यह पूरा घटनाक्रम आंदोलन के दूसरे दिन तब तेजी से बदला जब हजारों की संख्या में किसान पुलिस बैरिकेड्स तोड़कर भोपाल में दाखिल हुए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तुरंत एक उच्चस्तरीय मंत्रिस्तरीय समिति का गठन किया।
मंत्रियों और भारतीय किसान यूनियन (BKU) सहित विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच लंबी मैराथन बैठक हुई। इस बैठक में किसानों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई जिसके बाद सरकार ने राहत भरे फैसलों की घोषणा की।
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए प्रमुख निर्णय
राज्य सरकार ने किसानों के हित में कई बड़े और महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनका विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| मांग / विषय | पुराना प्रावधान | नया संशोधित निर्णय |
| ग्रीष्मकालीन मूंग खरीद सीमा | उत्पादन का अधिकतम 25% | पात्र किसान की कुल उपज का 60% |
| ई-उपार्जन स्लॉट बुकिंग | 30 जुलाई तक | बढ़ाकर 10 अगस्त तक |
| मूंग खरीद की अंतिम तिथि | 10 अगस्त तक | बढ़ाकर 20 अगस्त तक |
| उर्वरक वितरण व्यवस्था | ई-टोकन प्रणाली लागू | प्रणाली अस्थाई रूप से स्थगित |
केंद्रीय मंजूरी और खरीद का दायरा
राज्य सरकार के अनुसार, केंद्र सरकार ने मूल्य समर्थन योजना (Price Support Scheme) के अंतर्गत मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की 4.52 लाख मीट्रिक टन (MT) खरीद को मंजूरी दी थी। यह शुरुआती मंजूरी राज्य के कुल अनुमानित उत्पादन के 25% हिस्से तक सीमित थी।

किसानों के कड़े विरोध और उनकी मांग को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर दायरा बढ़ाने का फैसला किया। अब सरकार ने तय किया है कि वह प्रत्येक पात्र किसान की ग्रीष्मकालीन मूंग की उपज का 60% हिस्सा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदेगी, जो कि पहले तय सीमा से दोगुने से भी अधिक है।
किसानों की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति
सरकार की ओर से लिखित और आधिकारिक आश्वासन मिलने के बाद, बुधवार देर रात आंदोलनकारी किसानों ने अपना धरना और आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी। हालांकि, कुछ किसान संगठनों और व्यक्तिगत किसानों ने इस फैसले पर अपनी असंतुष्टि भी जाहिर की। उनका तर्क था कि मूंग खरीद की सीमा को कम से कम 80% तय किया जाना चाहिए था ताकि सभी किसानों को पूरा लाभ मिल सके।
इसके बावजूद, मध्य प्रदेश के अधिकांश किसानों ने सरकार के इस कदम को सकारात्मक शुरुआत माना है। समय-सीमा बढ़ने और खरीद का कोटा बढ़ने से राज्य के हजारों किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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