भोपाल, 02 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को ‘कृषि वर्ष (Krishi Varsh 2026)’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा के समिति कक्ष में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि कृषि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और यही क्षेत्र गरीब वर्ग, किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए सबसे अधिक अवसर पैदा कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कृषि वर्ष 2026 की टैगलाइन ‘समृद्ध किसान–समृद्ध प्रदेश’ होगी। लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की शुद्ध आय बढ़ाकर कृषि को लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक-आधारित रोजगार मॉडल में बदलना है। आत्मनिर्भर किसान, बेहतर बाजार कनेक्टिविटी और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था इस अभियान के केंद्र में रहेंगे।
प्रदेश की विविध भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार कृषि नवाचार को प्राथमिकता देगी। धान, गेहूं, चना, दलहन, तिलहन और हॉर्टीकल्चर में नई तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए देश-विदेश के अध्ययन भ्रमण भी कराए जाएंगे, ताकि वे वैश्विक सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं से सीख सकें।
कृषि से जुड़े हर सेक्टर का एकीकरण
कृषि वर्ष के तहत कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और वानिकी को एकीकृत करते हुए जिला-आधारित क्लस्टर विकास मॉडल लागू किया जाएगा। प्राकृतिक खेती, डिजिटल सेवाएं, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात-उन्मुख कृषि के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष फोकस रहेगा।
सरकार का जोर केवल किसानों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण युवाओं के लिए ड्रोन सेवाएं, FPO प्रबंधन, फूड प्रोसेसिंग, हाइड्रोपोनिक्स, मशरूम उत्पादन और एग्री-स्टार्टअप्स में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएंगे। कृषि को आधुनिक स्किल्स से जोड़कर ग्रामीण पलायन रोकने की भी रणनीति है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती को हर गांव तक पहुंचाना कृषि वर्ष 2026 की प्राथमिकता होगी। इसके साथ ही आर्गेनिक उत्पादों के लिए बेहतर बाजार, कृषि मंडियों का आधुनिकीकरण, मृदा संरक्षण, डेयरी और मत्स्य पालन में नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा।
कृषि वर्ष के लिए मासिक कैलेंडर तैयार किया गया है, जिसमें राज्य से लेकर जिला स्तर तक मेले, महोत्सव और जागरूकता कार्यक्रम होंगे। उन्नत किसान, गैर-सरकारी संगठन और कृषि विशेषज्ञ भी इस अभियान से जोड़े जाएंगे।
राज्य स्तर पर एग्रो विजन कार्यक्रम, मृदा स्वास्थ्य परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक तकनीकों पर व्यापक गतिविधियां होंगी। मोटे अनाज, गोपालन, दुग्ध उत्पादन, मखाना, मधुमक्खी पालन, धान, आम, सोयाबीन, कपास, मिर्च, मत्स्य पालन, कृषक उत्पादक संगठन (FPO), पराली प्रबंधन और उद्यानिकी फसलों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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