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किसानों को सिर्फ ‘कर्ज’ नहीं, पूरा ‘समर्थन’ दें बैंक: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बैंको को सलाह

मुंबई, 29 नवम्बर, 2025 (कृषि भूमि डेस्क):  भारत की वित्त मंत्री ने हाल ही में देश के बैंकों को एक महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकों को किसानों और बागवानी क्षेत्र (Horticulture Sector) के लिए अपनी भूमिका को सिर्फ ऋणदाता (Loan Provider) तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें इस क्षेत्र को पूरी तरह से सहयोग और समर्थन देना चाहिए।

वित्त मंत्री का यह निर्देश देश की कृषि और बागवानी क्षेत्र के पूर्ण विकास के लिए आवश्यक है। उनका मानना है कि बैंक केवल ऋण देने के बजाय, किसानों के उत्पादन के मूल्यवर्धन (Value Addition) में मदद कर सकते हैं। इसमें प्रसंस्करण इकाइयों (Processing Units) की स्थापना, बेहतर भंडारण सुविधाओं (Storage Facilities) और कोल्ड चेन (Cold Chain) के विकास में सहयोग शामिल है। यह दृष्टिकोण किसानों को केवल वित्तीय मदद देने से आगे बढ़कर, उन्हें बाजार से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) बनाने पर केंद्रित है।  कृषि और बागवानी भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इन क्षेत्रों को बैंकों का पूर्ण समर्थन मिलने से न केवल उनका विकास होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

बागवानी क्षेत्र पर विशेष ध्यान

वित्त मंत्री ने बागवानी क्षेत्र की अपार संभावनाओं पर विशेष जोर दिया। भारत फल, सब्जियां और फूलों के उत्पादन में दुनिया के अग्रणी देशों में से एक है, लेकिन उचित समर्थन की कमी के कारण अक्सर कटाई के बाद बड़े नुकसान का सामना करना पड़ता है। बैंकों को बागवानी किसानों को ऐसे ऋण और वित्तीय उत्पाद उपलब्ध कराने चाहिए जो उन्हें आधुनिक कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रिजरेटेड परिवहन की व्यवस्था करने में मदद करें। इससे उनकी उपज को खराब होने से बचाया जा सकेगा और उन्हें बेहतर कीमत मिलेगी। बैंकों को उन परियोजनाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए जो बागवानी में नई तकनीकों, ड्रिप इरीगेशन (Drip Irrigation) और संरक्षित खेती (Protected Cultivation) जैसे नवाचारों को बढ़ावा देती हैं।

बैंकों के लिए निर्देश

वित्त मंत्री ने बैंकों को इस दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कुछ स्पष्ट सुझाव दिए हैं:

  1. उत्पाद-आधारित वित्तपोषण: किसानों की व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से विशेष वित्तीय उत्पादों को डिज़ाइन करना, न कि केवल सामान्य कृषि ऋण देना।

  2. जागरूकता फैलाना: यह सुनिश्चित करना कि किसान केवल ऋण सुविधाओं के बारे में ही नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं और वित्तीय समावेशन के अन्य उपकरणों के बारे में भी पूरी तरह से अवगत हों।

  3. सरकारी योजनाओं का लाभ: बैंकों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN), फसल बीमा योजना और कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund) जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

यह सलाह बताती है कि सरकार अब कृषि क्षेत्र में बैंकों की भूमिका को केवल पैसे देने वाले से बदलकर विकास सहयोगी के रूप में देखना चाहती है। यह किसानों की आत्मनिर्भरता और भारतीय कृषि की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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