पूसा, बिहार, 26 फरवरी (कृषि भूमि डेस्क): डॉ. राजेंद्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में गुरुवार को मखाना क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक पहल के तहत मखाना अनुसंधान एवं विकास उत्कृष्ट केन्द्र का उद्घाटन किया गया। उद्घाटन श्री रामनाथ ठाकुर, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री, भारत सरकार, ने डॉ प्रभात कुमार (बागवानी आयुक्त) एवं विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पी एस पांडेय के साथ संयुक्त रूप से किया।
इसी अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “मखाना अनुसंधान एवं विकास” के उद्घाटन समारोह का भी आयोजन किया गया, जिसमें बिहार के विभिन्न जिलों से आए मखाना किसान, देशभर के वैज्ञानिक और छात्र बड़ी संख्या में शामिल हुए।

केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए श्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने स्वयं को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक स्थापित किया है। उन्होंने प्राकृतिक खेती, डिजिटल एग्रीकल्चर और दीक्षारंभ कार्यक्रम को देश के लिए नई दिशा देने वाला बताया।
उन्होंने कहा कि मखाना अनुसंधान एवं विकास उत्कृष्ट केन्द्र मखाना की उत्पादन क्षमता और उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे किसानों के साथ-साथ उद्यमियों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उनके अनुसार, मखाना अनुसंधान के क्षेत्र में यह विश्वविद्यालय पूरे देश को नई राह दिखाएगा।
वैज्ञानिक अनुभव और नवाचार पर जोर
बागवानी आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि डॉ. पांडेय का लंबा प्रशासनिक और शैक्षणिक अनुभव विश्वविद्यालय के नवोन्मेषी कार्यक्रमों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। उन्होंने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से कुलपति को पूर्ण सहयोग देने का आह्वान किया, ताकि संस्थान को और अधिक उत्कृष्ट बनाया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय संगोष्ठी वैज्ञानिकों, किसानों और उद्यमियों के लिए ज्ञान और अनुभव साझा करने का एक प्रभावी मंच बनेगी, जिससे मखाना उद्योग के लिए नवाचारी समाधान निकलेंगे।
मखाना वैल्यू चेन पर समग्र अनुसंधान
कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय ने बताया कि विश्वविद्यालय में मखाना और इससे जुड़े क्षेत्रों पर केंद्रित 17 वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम गठित की गई है, जो मखाना की पूरी वैल्यू चेन पर कार्य करेगी। इस टीम में कृषि वैज्ञानिकों के साथ-साथ कृषि अभियांत्रिकी, प्रबंधन, विपणन और प्रसार के विशेषज्ञ भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि बीज उत्पादन, किसान प्रशिक्षण, नई मशीनों का विकास, पैकेजिंग और निर्यात जैसे सभी पहलुओं पर एकीकृत दृष्टिकोण से कार्य किया जाएगा। मखाना अनुसंधान एवं विकास उत्कृष्ट केन्द्र का उद्घाटन विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो उन्नत अनुसंधान को गति देगा।
अनुसंधान से किसानों को आर्थिक लाभ
निदेशक अनुसंधान डॉ ए के सिंह ने कहा कि यह केन्द्र मखाना में प्रभेद सुधार, उन्नत उत्पादन तकनीक और कटाई उपरांत प्रबंधन पर अनुसंधान को सशक्त बनाएगा। इससे मखाना की गुणवत्ता और उपज दोनों में वृद्धि होगी।
उन्होंने बताया कि कुलपति का लक्ष्य मखाना की उत्पादकता को दोगुना करना है, जिसे साकार करने के लिए सभी वैज्ञानिकों को एकजुट होकर कार्य करना होगा।
व्यापक सहभागिता और तकनीकी सत्र
कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों से आए 300 से अधिक किसान, देशभर के वैज्ञानिक और विश्वविद्यालय के छात्र शामिल हुए। उद्घाटन समारोह के दौरान डॉ. मुकेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कुलसचिव डॉ. पी. के. प्रणव, डीन पीजीसीए डॉ. मयंक राय, डीन फिशरीज डॉ. पी. पी. श्रीवास्तव सहित अनेक शिक्षक, वैज्ञानिक और अधिकारी उपस्थित रहे।
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में तकनीकी सत्र, शोध पत्र प्रस्तुतियां और व्यापक चर्चा आयोजित की जाएंगी। यह कार्यक्रम 26 फरवरी 2026, पूर्वाह्न 11:30 बजे, विद्यापति सभागार, आरपीसीएयू पूसा, बिहार में आयोजित किया गया।
===
हमारे लेटेस्ट अपडेट्स और खास जानकारियों के लिए अभी जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45