भूमि अधिकारों को लेकर किसानों-आदिवासियों का नासिक से मुंबई लॉन्ग मार्च, सरकार ने वार्ता के लिए बुलाया

मुंबई, 28 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): भूमि अधिकार, सिंचाई सुविधाओं और वन अधिकारों से जुड़ी मांगों को लेकर नासिक से मुंबई की ओर पैदल मार्च कर रहे हजारों किसानों और आदिवासी निवासियों के आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार, यह बैठक मंगलवार को मुंबई स्थित मंत्रालय में प्रस्तावित है।

सीपीआई (एम) से संबद्ध ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) के नेतृत्व में चल रहे इस ‘लॉन्ग मार्च’ की शुरुआत रविवार को नासिक जिले से हुई थी। पूर्व विधायक जे. पी. गवित ने बताया कि दिंडोरी तहसील कार्यालय के बाहर किए गए आंदोलन के दौरान प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने के बाद किसानों और आदिवासियों ने मुंबई कूच करने का निर्णय लिया। मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों ने भोजन, अनाज, जलावन और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था स्वयं की है।

बीते दो दिनों में किसान-आदिवासी लगभग 60 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं। मंगलवार सुबह वे कसारा घाट से उतरते हुए नासिक से ठाणे जिले में प्रवेश कर गए। गवित का दावा है कि मार्च की व्यापक भागीदारी और लगातार मिल रहे मीडिया कवरेज के बाद राज्य सरकार ने आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया है।

मुख्यमंत्री से होगी प्रतिनिधिमंडल की बातचीत

प्रतिनिधिमंडल में जे. पी. गवित के साथ सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो सदस्य एवं AIKS के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक धवले, किसान सभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव अजीत नवाले और विधायक विनोद निकोले शामिल हैं। यह प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रियों से किसानों-आदिवासियों की मांगों पर चर्चा करेगा।

भूमि अधिकार और सिंचाई प्रमुख मुद्दे

गवित ने बताया कि पेठ, सुरगाणा, कालवण और त्र्यंबकेश्वर तालुकों के बड़ी संख्या में आदिवासी किसान इस आंदोलन में शामिल हैं। ये क्षेत्र सूखाग्रस्त हैं और लंबे समय से भूमि अधिकार, सिंचाई सुविधाओं और वन अधिकार दावों से जुड़े मुद्दों का सामना कर रहे हैं।

किसानों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारियों की मांगों में पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों और उनकी सहायक नदियों पर बड़े चेक डैमों का निर्माण, चार हेक्टेयर तक अतिक्रमित भूमि पर खेती का नियमितीकरण, भूमि अभिलेख जारी करना, खारिज किए गए वन अधिकार दावों की पुनः समीक्षा और वन भूमि पर खेती करने वाले किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर उपज की खरीद शामिल है।

पिछले दो दिनों में दिंडोरी क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन के चलते यातायात प्रभावित रहा और कई वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से मोड़ा गया। गवित ने बताया कि नासिक कलेक्टर आयुष प्रसाद के साथ पहले ही बैठक हो चुकी है, जिसमें स्थानीय मुद्दों के समाधान जिला स्तर पर और राज्य स्तरीय मांगों को मुंबई में उठाने पर सहमति बनी थी।

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