मुंबई, 09 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): Crude Oil – कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन तेजी देखने को मिली। वेनेजुएला से सप्लाई के भविष्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और ईरान में राजनीतिक अशांति के चलते वहां उत्पादन प्रभावित होने की आशंकाओं ने बाजार को सहारा दिया। इसके साथ ही तेल इस सप्ताह तीसरी बार बढ़त दर्ज करने की राह पर है।
ब्रेंट और WTI के ताज़ा भाव
| बेंचमार्क | कीमत | बदलाव |
|---|---|---|
| ब्रेंट क्रूड | $62.43 प्रति बैरल | +44 सेंट (0.71%) |
| WTI क्रूड | $58.15 प्रति बैरल | +39 सेंट (0.68%) |
लगातार दो दिनों की गिरावट के बाद गुरुवार को दोनों बेंचमार्क में 3% से अधिक की तेज़ उछाल आई थी। साप्ताहिक आधार पर ब्रेंट करीब 2.7% और WTI लगभग 1.4% की बढ़त की ओर बढ़ रहे हैं।
ईरान और वेनेजुएला से बढ़ी सप्लाई को लेकर चिंता
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि अशांति के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा हुई तो उस पर “कड़ा” जवाब दिया जाएगा। इससे मध्य-पूर्व में सप्लाई रिस्क को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
वहीं वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाए जाने के बाद अमेरिकी कदमों का असर भी बाजार में आंका जा रहा है। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि नए राजनीतिक हालात में तेल सप्लाई कैसे प्रभावित होगी।
कैश फ्लो और री-बैलेंसिंग से मिला सपोर्ट
सिटीग्रुप इंक. के मुताबिक, सालाना कमोडिटी इंडेक्स री-बैलेंसिंग के दौरान तेल में दोबारा कैश फ्लो आने की संभावना है, जिससे मौजूदा तेजी को और बल मिल सकता है। गुरुवार की तेज़ रैली के बाद तेल फ्यूचर्स फिलहाल साप्ताहिक बढ़त की दिशा में बने हुए हैं।
सरप्लस और बेयरिश सेंटिमेंट
हालांकि, आउटलुक पूरी तरह सकारात्मक नहीं है। गोल्डमैन सैक्स ग्रुप इंक. का कहना है कि उसके क्लाइंट्स इस समय पिछले 10 वर्षों में तेल को लेकर सबसे ज्यादा बेयरिश नजरिया रखते हैं। बैंक के मुताबिक, इस साल के अंत तक संभावित बड़ा सप्लाई सरप्लस आने वाले महीनों में कीमतों पर दबाव डाल सकता है।
अमेरिका–वेनेजुएला तेल कारोबार पर फोकस
एक्सॉन मोबिल, शेवरॉन और अन्य शीर्ष अमेरिकी ऑयल एग्जीक्यूटिव्स व्हाइट हाउस में वेनेजुएला के एनर्जी सेक्टर को फिर से खड़ा करने पर चर्चा करने वाले हैं।
शेवरॉन, जो फिलहाल वेनेजुएला में काम कर रही इकलौती बड़ी अमेरिकी कंपनी है, सात महीनों में सबसे तेज़ गति से वहां से क्रूड लोड कर रही है। ये सप्लाई मुख्य रूप से अमेरिकी रिफाइनर फिलिप्स 66 के लिए है।
चीन बनाम अमेरिका: सप्लाई की नई जंग
ट्रैफिगुरा और विटोल जैसे बड़े ट्रेडिंग हाउस अमेरिकी रिफाइनर्स से बातचीत कर रहे हैं और वेनेजुएला तेल की बिक्री के लिए शुरुआती अमेरिकी ट्रेजरी लाइसेंस भी हासिल कर चुके हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन के हालिया कदमों से चीन की कीमत पर अमेरिकी प्रोसेसर्स को ज्यादा सप्लाई मिल सकती है। अब तक चीनी रिफाइनर वेनेजुएला क्रूड के सबसे बड़े खरीदार रहे हैं, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद कुछ रिफाइनर अब कनाडा जैसे महंगे विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।
कुलमिलाकर, शॉर्ट टर्म में भू-राजनीतिक जोखिम और सप्लाई अनिश्चितता से कच्चे तेल को सपोर्ट मिल रहा है, लेकिन मीडियम से लॉन्ग टर्म में संभावित सरप्लस और कमजोर डिमांड कीमतों पर दबाव बना सकती है। निवेशकों की नजर अब वैश्विक राजनीति और सप्लाई फैसलों पर टिकी रहेगी।
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