नई दिल्ली/हैदराबाद, 27 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): देश की प्रमुख मिर्च उत्पादक मंडियों में इन दिनों भाव आसमान पर हैं। मिर्च के रकबे में भारी गिरावट, कीटों के हमले और विदेशी बाजारों से बढ़ती मांग के चलते तेलंगाना की वारंगल और खम्मम मंडियों में कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। सीमित सप्लाई और मजबूत मांग के कारण व्यापारियों ने कोल्ड स्टोरेज में रखा पुराना स्टॉक भी उठाना शुरू कर दिया है।
बीते सप्ताह मिर्च की कीमतें ₹22,000 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई थीं। फिलहाल मंडियों में भाव ₹15,000 से ₹18,500 प्रति क्विंटल के बीच बने हुए हैं, जो पिछले तीन वर्षों का उच्चतम स्तर माना जा रहा है।
खम्मम के एक व्यापारी ने बताया “कुछ दिन पहले दाम 22 हजार रुपये तक चले गए थे। अभी ऊपरी स्तर 18,500 रुपये है, लेकिन औसतन कीमतें 15 हजार रुपये के आसपास बनी हुई हैं।”
रकबे में तेज गिरावट बनी बड़ी वजह
किसानों और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कीमतों में इस तेजी का सबसे बड़ा कारण मिर्च की खेती का रकबा घट जाना है। करीब पांच साल पहले जहां मिर्च की खेती 1.25 लाख एकड़ में होती थी, वहीं अब यह घटकर सिर्फ 30,000 एकड़ के आसपास रह गई है। कम उत्पादन के बीच निर्यात मांग ने बाजार को और गर्म कर दिया है।
गुणवत्ता कमजोर, फिर भी भाव मजबूत
कई एक्सपर्ट्स ने दिसंबर के अंतिम सप्ताह में लाल मिर्च बाजार को लेकर मिश्रित रुझान बताया था। जनवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, नई फसल की आवक में अधिक नमी और बारिश से नुकसान के कारण गुणवत्ता को लेकर चिंताएं रहीं, जिससे व्यापारियों ने सतर्कता बरती और कुल कारोबार सीमित रहा।
एक्सपर्ट्स ने जनवरी 2026 के लिए मिर्च का भाव ₹13,500 से ₹15,500 प्रति क्विंटल के बीच रहने का अनुमान जताया था, लेकिन वास्तविक कीमतें इससे कहीं ऊपर बनी हुई हैं।
तेलंगाना रायथु संगम के नेता एस. मल्ला रेड्डी के अनुसार, इस साल मिर्च का कुल उत्पादन करीब 4 लाख टन तक सिमट सकता है, जबकि सामान्य वर्षों में यह औसतन 6.50 लाख टन रहता है।
आंध्र प्रदेश में भी रकबा घटा
आंध्र प्रदेश के कृषि मंत्री किंजरपु अच्चन नायडू ने हाल ही में कहा कि मजबूत मांग के चलते इस सीजन में मिर्च की कीमतों को लेकर परिदृश्य सकारात्मक है।
राज्य में मिर्च की खेती का रकबा पिछले साल के 1.96 लाख एकड़ से घटकर इस साल 1.06 लाख एकड़ रह गया है। इसके चलते उत्पादन भी पिछले साल के 6.62 लाख टन से घटकर इस साल करीब 5.39 लाख टन रहने का अनुमान है।
कुलमिलाकर, कम उत्पादन, सीमित आवक और निर्यात मांग को देखते हुए बाजार जानकारों का मानना है कि निकट अवधि में मिर्च की कीमतों में नरमी की संभावना कम है। हालांकि नई आवक और गुणवत्ता में सुधार से भावों में कुछ स्थिरता आ सकती है।
===
हमारे लेटेस्ट अपडेट्स और खास जानकारियों के लिए अभी जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45